अब टैबलेट से दौड़ेगी विवेचना, गाजियाबाद पुलिस ने स्मार्ट पुलिसिंग की ओर बढ़ाया ऐतिहासिक कदम

-तकनीक के जरिए न्याय प्रक्रिया को मिलेगा नया बल: जे. रविन्द्र गौड़
-तकनीक से तेज होगी विवेचना, अपराधियों को नहीं मिलेगा बचने का मौका: केशव चौधरी
-स्मार्ट पुलिसिंग का नया दौर शुरू, अब हर जांच होगी डिजिटल और पारदर्शी: धवल जायसवाल
-932 विवेचना अधिकारियों को मिले अत्याधुनिक टैबलेट, जांच प्रक्रिया होगी तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिसिंग को आधुनिक, पारदर्शी और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में कमिश्नरेट गाजियाबाद ने एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ के नेतृत्व में शुक्रवार को जिले के सभी थानों में नियुक्त विवेचना अधिकारियों को अत्याधुनिक टैबलेट उपकरण उपलब्ध कराए गए। इस पहल के साथ गाजियाबाद पुलिस ने स्मार्ट पुलिसिंग और तकनीक आधारित जांच व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मुख्यालय एवं अपराध केशव चौधरी तथा डीसीपी सिटी एवं ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने संयुक्त रूप से विवेचना अधिकारियों को टैबलेट वितरित किए। कमिश्नरेट क्षेत्र के कुल 932 विवेचकों को यह आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे विवेचना प्रक्रिया को डिजिटल और अधिक प्रभावशाली बनाया जा सके। पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ ने कहा कि वर्तमान समय में तकनीक हर क्षेत्र में बदलाव का माध्यम बन रही है और पुलिसिंग भी इससे अछूती नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग से न केवल विवेचना की गुणवत्ता में सुधार आएगा, बल्कि मामलों का निस्तारण भी अधिक तेजी और पारदर्शिता के साथ हो सकेगा।

उन्होंने कहा कि पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना नहीं, बल्कि पीडि़तों को समय पर न्याय दिलाना भी है और यह तकनीकी पहल उसी दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। पुलिस आयुक्त ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों-भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-के प्रभावी क्रियान्वयन में भी टैबलेट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। इससे विवेचना अधिकारी मौके पर ही आवश्यक सूचनाएं दर्ज कर सकेंगे, डिजिटल दस्तावेजों का आदान-प्रदान कर सकेंगे और जांच से संबंधित सूचनाओं को तुरंत अपडेट कर पाएंगे। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त केशव चौधरी ने कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से विवेचना प्रक्रिया में अनावश्यक देरी कम होगी और जांच की गुणवत्ता बेहतर बनेगी। उन्होंने कहा कि कागजी कार्यवाही में कमी आने से विवेचक अधिक समय जांच और अपराध नियंत्रण पर दे सकेंगे। इससे लंबित मामलों के निस्तारण में भी तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग लगातार तकनीकी सुधारों को अपनाते हुए नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए कार्य कर रहा है।

टैबलेट आधारित व्यवस्था से रिकॉर्ड प्रबंधन आसान होगा और जांच संबंधी सूचनाओं की निगरानी भी अधिक प्रभावी तरीके से की जा सकेगी। डीसीपी सिटी एवं ट्रांस हिंडन धवल जायसवाल ने कहा कि पुलिस और जनता के बीच विश्वास को मजबूत बनाने के लिए पारदर्शी और जवाबदेह पुलिसिंग आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह पहल पुलिस अधिकारियों को अधिक दक्ष और उत्तरदायी बनाएगी। जांच से संबंधित सूचनाओं का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से पारदर्शिता बढ़ेगी और शिकायतकर्ताओं को भी अपने मामलों की प्रगति के बारे में बेहतर जानकारी मिल सकेगी। धवल जायसवाल ने कहा कि स्मार्ट पुलिसिंग का मूल उद्देश्य तकनीक के माध्यम से जनता को त्वरित, प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करना है। टैबलेट मिलने से विवेचक मौके पर ही आवश्यक विवरण दर्ज कर सकेंगे, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक सटीक और समयबद्ध बनेगी।

कमिश्नरेट गाजियाबाद की इस पहल को पुलिसिंग में तकनीकी नवाचार का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में यह व्यवस्था अपराध नियंत्रण, साक्ष्य संकलन और न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। गाजियाबाद पुलिस का कहना है कि नागरिकों को बेहतर, तेज और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विभाग लगातार नवाचार और आधुनिकीकरण की दिशा में कार्य कर रहा है। तकनीक और दक्षता के इस समन्वय से न केवल पुलिस व्यवस्था सशक्त होगी, बल्कि आमजन का विश्वास भी और अधिक मजबूत होगा।