-अर्थला में सैनिटरी पैड केंद्र का उद्घाटन, इको-फ्रेंडली सस्ते सैनिटरी नैपकिन्स बनाने की सुविधा
गाजियाबाद। भारत में एंबेसी आफ इजरायल ने खुशी फाउंडेशन के सहयोग से एक विशेष परियोजना सारस का शुभारंभ किया। जो अर्थला में महिला सशक्तिकरण, माहवारी स्वच्छता और जागरूकता पैदा करेगा। खुशी के अध्यक्ष अनिरुद्ध खेतान के साथ भारत में इजराइल के राजदूत महामना नाओर गिलोन ने मंगलवार को अर्थला में केंद्र का उद्घाटन किया। जिसमें इको-फ्रेंडली सस्ते सैनिटरी नैपकिन्स बनाने की सुविधा है। इस निर्माण इकाई को मासव की मदद से स्थापित किया गया। उद्धाटन से पूर्व, खुशी और इजराइल दूतावास के साथ राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट के डॉक्टरों ने माहवारी जागरूकता शिविर का आयोजन किया।

एंबेस्डर नोर गिलोन ने कहा, हमें इस प्रकार के प्रमुख पहल का हिस्सा बनने पर गर्व है। यह एक विशेष परियोजना है जिसका उद्देश्य माहवारी से जुड़े स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के बारे में जागरूकता फैलाना एवं महिलाओं के कौशल और क्षमताओं का विकास करना है। यह पहल दोनों देशों के बीच राजयनिक संबंधों के 30 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में दूतावास द्वारा शुरू की जा रही गतिविधियों का हिस्सा है। एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एट खुशी फांउडेंशन हरीश गोसाईं ने कहा, स्त्री कल्याण और स्वच्छता पर काफी समय से नजर रखी जा रही है, इसमें युवतियों के जीवन के बुनियादी चरण में ही महिला सशक्तिकरण को बढ़ाने की अत्यधिक क्षमता है। इसलिए, मैं इस प्रकार के सशक्त परिवर्तन का हिस्सा बनने पर उत्साहित हूं।

यह परियोजना माहवारी स्वास्थ्य और स्वच्छता में सुधार के लिए सभी स्तंभों, सामाजिक समर्थन, ज्ञान, कौशल, सुविधाएं और सामग्रियां, से संबंधित है। समुदाय में, पैड्स के उत्पादन के पहले चरण से लेकर इनके वितरण तक, पूरी प्रक्रिया, खुशी और हमारी सलाहकार स्टेला रिचर्ड द्वारा प्रशिक्षित महिलाओं की स्थानीय टीम द्वारा किया जाता है। इसके साथ ही परियोजना ने स्वास्थ्य विभाग, मान्यताप्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा कार्यकर्ताओं) के साथ सहयोग किया है। जिन्होंने समुदाय को संवेदनशील बनाने और एकजुट करने में टीम की मदद की है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ ने परियोजना में दो इंटर्न डॉक्टरों को भी शामिल किया है जो समुदाय की वर्तमान स्थिति के साथ-साथ भविष्य की आवश्यकताओं की रूपरेखा तैयार करने में योगदान करेंगे।

हेड ऑफ पब्लिक डिप्लोमेसी एट द इजरायल एंबेसी इन इंडिया शनि रापोपोर्ट एस्टोनी ने कहा, मुझे परियोजना सारस पर बहुत गर्व है। यह परियोजना उन मूल्यों का प्रतिनिधित्व करती है जिन्हें हम, इजराइल दूतावास में, बढ़ावा देने और निष्पादित करने का प्रयास करते हैं। महिलाओं को बढ़ावा देने के लिए काम करने वाले व्यक्ति के रूप में मुझे खुशी फाउंडेशन की उदात्त महिलाओं और विशेष सलाहकार स्टेला रिचर्ड (सीईओ विनस्टार) के साथ सहयोग करने का मौका मिला है। सैनिटरी पैड, सारस, शोधन और रसायनिक धुलाई की किसी भी प्रक्रिया से नहीं गुजरता है। इसमें कोई कृत्रिम सुगंध का प्रयोग नहीं किया जाता और यह रैश (चकत्तों) मुक्त माहवारी के लिए बहुत किफायती मूल्य पर मिलने वाला एक नया उत्पाद है। केंद्र पर लगी मशीन एक दिन में 10, हजार पैड्स तैयार कर सकती है।















