-नगर आयुक्त व अधिकारियों ने लिया ऐप का डेमो
-कम समय में जनता की समस्या का एक क्लिक पर होगा समाधान
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा इसी माह में गाजियाबाद-311 ऐप लॉन्च किया जाएगा। गुरुवार को नगर निगम मुख्यालय स्थित कार्यालय में नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक एवं निगम अधिकारियों ने इसका प्रेजेंटेशन देखा। नगर आयुक्त का कहना है कि उच्च तकनीक युक्त गाजियाबाद 311 ऐप शहरवासियों और नगर निगम के अधिकारियों के लिए लाभदायक होगा। प्रेजेंटेशन के दौरान उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह, जलकल महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद, प्रभारी प्रकाश आस कुमार, संपत्ति प्रभारी पल्लवी सिंह, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी डॉ. संजीव सिन्हा, लेखाधिकारी डॉ. गीता कुमारी, एमएनएलपी विवेक सिंह आदि अधिकारी उपस्थित रहे। नगर आयुक्त ऐप की खुद मॉनिटरिंग कर रहे हैं।
नगर आयुक्त ने बताया कि इस ऐप के माध्यम से लगभग 64 शिकायतों का निस्तारण होगा। इसके लिए सभी विभाग के अधिकारियों को प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसके माध्यम से कम समय में समस्याओं का समाधान किया जाएगा। नगर आयुक्त की उपस्थिति में प्रेजेंटेशन के दौरान सभी विभाग के अधिकारियों ने अपने-अपने विभाग से संबंधित कई बिंदुओं को डेमो के दौरान रखे। इससे ऐप को और अधिक अपडेट किया जा रहा है। इसमें संबंधित बिंदुओं को भी जोड़ा गया। ताकि शहरवासी सरलता से कम समय में अपनी बात निगम तक पहुंचा सकेंगे। इस ऐप को शहर में अवैध पार्किंग, अवैध डेयरी, रोड मरम्मत, हैंड पंप रिपेयर, सफाई व्यवस्था, लाइटों की मरम्मत, पब्लिक शौचालयों की सफाई, मृत पशुओं का उठान, प्रॉपर्टी का म्यूटेशन, अवैध विज्ञापन आदि बिंदुओं को ध्यान रखते हुए ऐप को तैयार किया गया हैं। इसको लेकर सभी विभागीय अधिकारियों ने गाजियाबाद-311 ऐप का डेमो लिया।
नगर आयुक्त ने संबंधित टीम को भी तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। नगर आयुक्त के नेतृत्व में एचडीएफसी बैंक से आई सिविक सॉल्यूशन कंपनी द्वारा जनहित की समस्याओं के तत्काल समाधान पर कार्रवाई करने के लिए ऐप को तैयार किया है। इस ऐप का प्रशिक्षण अधिकारियों को दिया जाएगा। निगम के सभी पांचों जोन में भी शहरवासियों के लिए सुविधा की जाएगी। सोशल मीडिया समेत अन्य माध्यम से भी आमजन तक ऐप की जानकारी पहुंचाई जाएगी। नगर निगम द्वारा शीघ्र ही उच्च तकनीक के संयुक्त ऐप को लांच किया जाएगा। इस ऐप के लॉन्च होने के बाद शहरवासियों और नगर निगम के अधिकारियों को इसका लाभ मिलेगा। इसके साथ ही पार्षदों को भी इसका लाभ मिलेगा।

















