गाजियाबाद नगर निगम बिजली विभाग को लेकर हुआ सख्त, शासन स्तर पर होगी कार्रवाई

– बिजली विभाग सहित विभिन्न सरकारी विभागों पर नगर निगम का 124 करोड़ बकाया

– पावर कॉरपोरेशन, रेलवे, बीएसएनएल, जीडीए सहित विभिन्न विभागों से किया जाएगा समायोजन

गाजियाबाद। बिजली विभाग की कारगुजारियों से सिर्फ आम जनता ही नहीं बल्कि सरकारी महकमा भी परेशान है। महज 500 से 1000 रुपए बकाया होने पर  लोगों के  बिजली कनेक्शन काट देने वाला बिजली विभाग खुद गाजियाबाद नगर निगम के करोड़ों रुपए पर कुंडली मार कर बैठा हुआ है। नगर निगम ने कई बार बिजली विभाग के अधिकारियोंं से इस मसले पर बात की लेकिन इन अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहे हैं। नगर निगम ने बिजली विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों के इस हरकत की शिकायत शासन से की है और अब शासन से ही बकाया की वसूली की जाएगी। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम सहित विभिन्न सरकारी विभागों पर गाजियाबाद नगर निगम का करीब 124 करोड़ बकाया है। शासन ने विभिन्न विभागों पर बकाया राशि की नगर निगम से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। फिर शासन स्तर से विभिन्न विभागों पर करोड़ों के बकाए का समायोजन कराया जाएगा। सबसे ज्यादा पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम पर बकाया है इसके बाद बीएसएनएल और रेलवे सहित अन्य सरकारी विभाग हैं।पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम पर नगर निगम का हाउस टैक्सस के मद में 80 करोड़ रुपए बकाया है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम पर 2013-14 से 2019-20 तक करीब 60 करोड़ का बकाया है। दूसरी ओर सड़कों पर लगे ट्रांसफार्मरों का 15 करोड़ से अधिक किराया पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम को देना है। दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन को विभिन्न मेट्रो स्टेशनों पर 30 करोड़ से अधिक का बकाया भुगतान करना है। बीएसएनल पर छह करोड़ और रेलवे से नगर निगम को चार करोड़ बकाया वसूलना है। प्रताप विहार में जल निगम के भवन पर चार करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि का भुगतान बकाया है। बकाया भुगतान के लिए नगर निगम की ओर से विभिन्न विभागों को कई बार पत्र लिखे जा चुके हैं। लेकिन तमाम रिमाइंडर के बावजूद अब तक विभागों ने बकाया का भुगतान नहीं किया है। बकाया भुगतान न होने से नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर फर्क पडऩे के साथ ही विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में शासन की मांग पर अब नगर निगम की ओर से विभिन्न विभागों पर बकाया राशि का विस्तृत विवरण भेजा जा रहा है। शासन स्तर से बकाया धनराशि का विभागों से समायोजन कराने की बात कही गई है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी संजीव सिन्हा ने बताया कि शासन की ओर से विभिन्न विभागों पर बकाया राशि का विस्तृत ब्यौरा मांगा गया है।