-स्पॉन्सरशिप योजना के तहत दिलाया जाए पात्रों को लाभ: इन्द्र विक्रम सिंह
गाजियाबाद। जनपद में पॉक्सो एक्ट के प्रकरणों से संबंधित बालिकाओं को नोएडा स्थित बालिका गृह में भेजा जाएगा। इसके साथ ही स्पॉन्सरशिप योजना के तहत पात्रों को लाभ दिलाया जाए। बुधवार को कलेक्ट्रेट स्थित सभागार में जिलाधिकारी इन्द्र विक्रम सिंह ने जिला बाल कल्याण एवं संरक्षण समिति की समीक्षा बैठक करते हुए अधिकारियों को यह दिशा-निर्देश दिए।जिलाधिकारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल,एसीपी प्रियाश्री पाल,जिला प्रोबेशन अधिकारी मनोज कुमार पुष्कर,जिला समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह,अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.अनुराग,जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी पुष्पलता,सहायक श्रम आयुक्त विरेन्द्र कुमार,खंड शिक्षा अधिकारी बीएस राठी,बाल कल्याण समिति की अधीक्षाएं,किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य उपस्थित रहे। डीएम ने बैठक में जनपद में स्वैछिक संगठनों के माध्यम से संचालित बाल गृह (शिशु, बालक एवं बालिका) की समीक्षा की। घरौंदा बाल गृह (शिशु) में 19 बालक,घरौंदा विशेषज्ञ दत्तक ग्रहण अभिकरण में में 5, आशियाना होम फॉर गल्र्स में 19,उड्डयन होम फॉर गल्र्स में 13 एवं उदय खुला बाल आश्रय गृह में 3 बालक निवासरत हैं।
आशियाना होम फॉर गल्र्स की अधीक्षिका पिंकी ने अवगत कराया कि होम में अन्य बालिकाओं के साथ ही पॉक्सो एक्ट की बालिकाएं भी आवासित हैं। जिलाधिकारी ने बाल कल्याण समिति को निर्देशित किया गया कि पॉक्सो एक्ट की सभी बालिकाओं को नोएडा स्थित बालिका गृह में ही भेजा जाए। बाकी बालिकाओं के साथ रहने पर पॉक्सो एक्ट की बालिकाओं के साथ ही अन्य बालिकाओं पर भी इसके प्रभाव पड़ सकते हैं। उन्होंने सभी बाल गृहों के अधीक्षकों को निर्देशित किया कि बच्चों को शीघ्रता से उनके परिवारों में पुर्नवासित किया जाए। बच्चे का पूर्ण विकास अपने परिवार के साथ रहकर ही हो सकता है। चिकित्सा विभाग को निर्देशित किया कि सभी संस्थाओं में बालकों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए महिला रोग विशेषज्ञ,बाल रोग विशेषज्ञ एवं मनोचिकित्सक की संयुक्त टीम बना कर माह में एक दिन निर्धारित कर प्रत्येक माह सभी बालक,बालिकाओं का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाए। इसकी रिपोर्ट उन्हें प्रेषित की जाए। संस्थाओं से संबंधित थाना क्षेत्र की पुलिस नियमित रूप से संस्थाओं के आसपास गश्त करें।
श्रम विभाग को निर्देशित किया कि सभी इंडस्ट्रीज में जाकर निरीक्षण करें कि कोई बच्चा बाल श्रम में तो नहीं लगा है। जिससे बालकों के साथ कोई अप्रिय घटना न हो पाए। चाइल्ड हेल्प लाइन में प्राप्त प्रकरणों में निर्देशित कि यौन शोषण की शिकायतों को संवेदनशीलता के साथ निस्तारित करें तथा प्रकरण का नियमित फॉलोअप लिया जाए। जिला प्रोबेशन अधिकारी मनोज पुष्कर ने अवगत कराया कि बाल सेवा योजना(कोविड)में 723 बालकों,बाल सेवा योजना(सामान्य)में 348 बालकों एवं स्पॉन्सरशिप योजना में 244 बालकों को लाभान्वित किया जा रहा है। वर्तमान में बाल सेवा योजना के स्थान पर स्पॉन्सरशिप योजना आरंभ की गई है। नवीन पात्र बच्चों का इस योजना में चिन्हांंकन किया जा रहा है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि योजना का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार किया जाए। ताकि अधिक से अधिक बच्चों को लाभान्वित किया जा सकें। बाल कल्याण समिति की सदस्या कौमुदी चौधरी ने अवगत कराया कि दत्तक ग्रहण के लिए बालकों को मुक्त करने को ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट थाना से (गैर दावेदार)प्रमाण पत्र जारी होने में काफी समय लग जाता है। इससे बच्चों को दत्तक ग्रहण मुक्त करने में विलंब होता है। जिलाधिकारी ने एएचटीयू थाना प्रभारी एवं संबंधित पुलिस अधिकारी को इस पर जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए। किशोर न्याय बोर्ड में अधिक संख्या में वाद लंबित होने पर डीएम ने रोष प्रकट किया। उन्होंने सदस्यों को वादों का निस्तारण की कार्रवाई के निर्देश दिए।
















