• आईएएसपी सॉफ्टवेयर से मामलों की मॉनिटरिंग शुरू
• जनवरी से मार्च 2025 तक 119 मामलों का निपटारा
• जीडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) के विभिन्न कोर्ट में लंबित मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व में न्यायिक प्रक्रियाओं को सुचारु और पारदर्शी बनाने के लिए लीगल केस मैनेजमेंट सिस्टम को लागू किया गया है। इस नई व्यवस्था के तहत आईएएसपी सॉफ्टवेयर की मदद से केसों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण से जुड़े 3070 से अधिक वाद विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। इनमें हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सिविल कोर्ट, जिला न्यायालय, राज्य और राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग, एससी/एसटी आयोग, मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, आयुक्त न्यायालय, एसडीएम कोर्ट सहित अन्य न्यायिक संस्थान शामिल हैं। इन मामलों की मॉनिटरिंग और तेजी से निस्तारण के लिए अब तक 2750 फाइलों को आईएएसपी सॉफ्टवेयर पर अपलोड किया जा चुका है।
जीडीए उपाध्यक्ष ने विधि अनुभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित पत्रावलियों को जल्द से जल्द डिजिटली अपलोड किया जाए, जिससे केसों की समीक्षा और मॉनिटरिंग आसानी से हो सके। नए डिजिटल सिस्टम की बदौलत जनवरी 2025 से मार्च 2025 तक विभिन्न अदालतों द्वारा 119 मामलों का निस्तारण किया जा चुका है, जिनमें से अधिकांश में निर्णय जीडीए के पक्ष में रहा। जीडीए उपाध्यक्ष ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे कोर्ट में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी करें और जिन मामलों में प्राधिकरण के पक्ष में फैसला आ चुका है, उनमें नियमित कार्रवाई को तुरंत सुनिश्चित करें।
विधि अनुभाग में हाई-टेक सिस्टम की व्यवस्था
मामलों की गति को बढ़ाने के लिए जीडीए उपाध्यक्ष ने विधि अनुभाग में अलग से कंप्यूटर सिस्टम, स्कैनर और ऑपरेटर की व्यवस्था की है। इससे फाइलों को स्कैन करके डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा जा रहा है, जिससे किसी भी समय दस्तावेजों की जांच और उनका विश्लेषण किया जा सके।
अधिवक्ताओं के साथ नियमित संवाद जरूरी
समीक्षा बैठक के दौरान जीडीए उपाध्यक्ष ने निर्देश दिया कि विधि अनुभाग के अधिकारी न्यायालय में लंबित मामलों की प्रभावी पैरवी करें और अधिवक्ताओं से केस की सुनवाई से पहले नियमित बैठक कर विचार-विमर्श करें। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए गए कि वे मामलों की पूरी जानकारी लेकर कोर्ट में प्रस्तुत हों, ताकि जीडीए को कानूनी रूप से मजबूत स्थिति में रखा जा सके। जीडीए उपाध्यक्ष ने यह भी संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में सभी अदालती प्रक्रियाओं को पूरी तरह से डिजिटल किया जाएगा, जिससे वादकारियों को अनावश्यक देरी से बचाया जा सके और जीडीए की कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके।
डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से जीडीए कोर्ट मामलों में आएगी पारदर्शिता
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण में न्यायिक मामलों के तेजी से निपटारे के लिए उठाए गए ये कदम पारदर्शिता और प्रभावशीलता को बढ़ाएंगे। आधुनिक तकनीक की मदद से अब मामलों की सटीक निगरानी और त्वरित निस्तारण संभव हो रहा है, जिससे आम लोगों और जीडीए दोनों को लाभ मिलेगा।

जीडीए उपाध्यक्ष
प्राधिकरण से जुड़े न्यायिक मामलों के त्वरित निस्तारण और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। लीगल केस मैनेजमेंट सिस्टम (आईएएसपी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से केसों की प्रभावी मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे अदालतों में लंबित मामलों की समीक्षा और निस्तारण की प्रक्रिया तेज होगी। हमने विधि अनुभाग में कंप्यूटर सिस्टम, स्कैनर और ऑपरेटर की व्यवस्था की है ताकि सभी पत्रावलियों को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जा सके। जनवरी से मार्च 2025 तक 119 मामलों का निस्तारण किया गया, जिनमें से अधिकांश में जीडीए के पक्ष में निर्णय हुआ है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे सभी मामलों की प्रभावी पैरवी करें और न्यायालयों में जीडीए का पक्ष मजबूती से रखें। इसके अलावा, उन्होंने अधिकारियों से अधिवक्ताओं के साथ नियमित संवाद करने और सुनवाई से पहले पूरी तैयारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, ताकि जीडीए से जुड़े मामलों का जल्द समाधान हो सके।
अतुल वत्स
जीडीए उपाध्यक्ष
















