मेरठ डिप्टी कमिश्नर की दो-टूक चेतावनी: अब सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, दिखना चाहिए जमीनी असर

• अब कोई बहाना नहीं चलेगा: राजस्व लक्ष्य हर हाल में करें पूरा, अवैध शराब का पूरी तरह हो सफाया: राकेश कुमार सिंह

• फील्ड में उतरने, जवाबदेही तय करने और नेटवर्क मजबूत करने के दिए सख्त निर्देश

• राजस्व बढ़ाओ, अवैध शराब मिटाओ-फील्ड में उतरकर कार्रवाई करो, सिर्फ मीटिंग और फॉर्मेलिटी से नहीं चलेगा काम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गुरुवार का दिन गाजियाबाद आबकारी विभाग के लिए चेतावनी की घंटी लेकर आया। मेरठ मंडल के उप आबकारी आयुक्त राकेश कुमार सिंह ने जिला आबकारी कार्यालय में अचानक निरीक्षण और समीक्षा बैठक कर विभागीय कार्यप्रणाली पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि अगर गाजियाबाद जैसे संवेदनशील जिले में कार्यरत हैं तो नतीजे देने होंगे। दिखावे या फॉर्मेलिटी से काम नहीं चलेगा। उन्होंने साफ कहा कि अब केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा। हर अधिकारी को फील्ड में उतरकर ज़मीनी स्तर पर सक्रियता दिखानी होगी, वरना जवाबदेही तय की जाएगी। उप आबकारी आयुक्त ने अधिकारियों को सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि गाजियाबाद एक बेहद संवेदनशील जिला है, जहां बाहरी राज्यों से अवैध शराब की तस्करी हमेशा एक बड़ा खतरा बनी रहती है। ऐसे में केवल रूटीन निरीक्षण या बैठकों से हालात नहीं सुधरेंगे। जरूरत है कि हर दिन धरातल पर उतरकर ठोस कार्रवाई की जाए और अवैध शराब के खिलाफ निर्णायक अभियान चलाया जाए।

बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों से स्पष्ट शब्दों में कहा कि विभाग का मूल उद्देश्य सिर्फ राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि अवैध शराब के कारोबार को जड़ से खत्म करना भी है। इसके लिए ठोस रणनीति बनाकर उस पर तुरंत अमल जरूरी है। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर किसी अधिकारी के क्षेत्र में अवैध शराब, ओवर रेटिंग या बिना लाइसेंस के शराब परोसने की शिकायत सामने आती है तो संबंधित सिपाही और निरीक्षक के साथ-साथ जिला आबकारी अधिकारी भी जिम्मेदार माने जाएंगे। उन्होंने कहा कि आबकारी अधिकारियों को अब केवल कार्यालय में बैठकर रिपोर्ट तैयार करने या फोन पर जानकारी लेने की आदत छोडऩी होगी। हर इंस्पेक्टर को प्रतिदिन अपने क्षेत्र में फील्ड में जाकर कार्य करना होगा, दुकानों की चेकिंग करनी होगी और शराब तस्करों पर दबिश देनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि शराब की दुकानों पर ओवर रेटिंग की जांच गुप्त रूप से की जाए। इसके लिए गुप्त रूप से टेस्ट परचेजिंग की जाए और ग्राहकों से भी बातचीत कर विक्रेताओं की गतिविधियों की जानकारी ली जाए।

उप आबकारी आयुक्त ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समाधान गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से आने वाली शिकायतों को केवल औपचारिकता के तौर पर हल न किया जाए, बल्कि मौके पर जाकर कार्रवाई की जाए और शिकायतकर्ता को संतोषजनक जवाब दिया जाए। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा की कि अब मेरठ से प्रवर्तन की एक टीम गाजियाबाद में जनपदीय टीम के साथ मिलकर निरीक्षण करेगी। यदि प्रवर्तन की कार्यवाही के दौरान किसी अधिकारी की लापरवाही या कार्य के प्रति उदासीनता पाई गई तो उस पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। बैठक में उपस्थित आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम, इंस्पेक्टर मनोज शर्मा, अखिलेश कुमार, अखिलेश बिहारी वर्मा, त्रिवेणी प्रसाद मौर्य, डॉ. राकेश त्रिपाठी और अनुज वर्मा के साथ कई आबकारी सिपाही भी शामिल रहे। उप आयुक्त ने सभी को स्पष्ट रूप से निर्देशित किया कि रेस्टोरेंट, होटल, बार और ढाबों की नियमित जांच की जाए। उन्हें लाइसेंस संबंधी जानकारी दी जाए और यदि किसी भी संस्थान में बिना लाइसेंस के शराब परोसी जा रही हो तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि शासन द्वारा तय किए गए राजस्व लक्ष्य को हर हाल में पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएं। जिले में चल रही कार्रवाई और राजस्व संग्रहण की समीक्षा करते हुए उन्होंने अधिकारियों को प्रोत्साहित भी किया और भरोसा दिलाया कि यदि कोई अधिकारी पूरी ईमानदारी से काम करता है और उसे कोई व्यक्ति परेशान करता है या विभाग की छवि को धूमिल करने की कोशिश करता है तो उसकी शिकायत सीधे उन्हें करें। बैठक का माहौल जहां एक ओर अधिकारियों के लिए चेतावनी से भरा था, वहीं दूसरी ओर ईमानदार कर्मचारियों के लिए हौसला बढ़ाने वाला भी रहा।

उप आबकारी आयुक्त ने कहा कि ईमानदारी और निष्पक्षता से किए गए कार्य की हमेशा सराहना होगी, लेकिन जो अधिकारी फील्ड में निष्क्रिय रहेंगे, उन्हें अब विभाग में टिकने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। गाजियाबाद में आबकारी विभाग की यह समीक्षा बैठक न केवल आने वाले दिनों में विभागीय कार्रवाई को दिशा देगी, बल्कि शराब तस्करी, ओवर रेटिंग और बिना लाइसेंस शराब परोसने जैसी गतिविधियों पर सख्त लगाम कसने का आधार भी बनेगी। विभाग की कार्यशैली में अब बदलाव के संकेत साफ तौर पर दिखने लगे हैं, और अगर यह निर्देश गंभीरता से लागू होते हैं तो निश्चित ही जिले में अवैध शराब का कारोबार कमजोर होगा और सरकार के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा सकेगी।

ऑफिस वर्क से नहीं चलेगा काम
उप आबकारी आयुक्त ने कहा कि अब ऑफिस में बैठकर फोन पर अपडेट लेने की पुरानी कार्यशैली को त्यागना होगा। सभी इंस्पेक्टरों को फील्ड में दिखना चाहिए। शराब की दुकानों पर ओवर रेटिंग रोकने के लिए गुप्त रूप से टेस्ट परचेजिंग कराएं और खुद ग्राहकों से पूछताछ करें। उन्होंने कहा कि अवैध शराब या बिना लाइसेंस शराब परोसने के मामलों में अब सीधे संबंधित सिपाही, इंस्पेक्टर के साथ-साथ जिला आबकारी अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी।

सख्ती और सराहना, दोनों का संतुलन
हालांकि उप आयुक्त ने जहां अधिकारियों को कड़ी चेतावनी दी, वहीं उनकी सराहना भी की और भरोसा दिलाया कि ईमानदारी से काम करने वालों को पूरा डिपार्टमेंटल सपोर्ट मिलेगा। उन्होंने कहा, अगर कोई व्यक्ति बेवजह आपको परेशान करता है या विभाग की छवि खराब करने की कोशिश करता है तो सीधे मुझसे शिकायत करें, त्वरित कार्रवाई की जाएगी।

रेस्टोरेंट, होटल, बार और ढाबों पर लगातार होगी चेकिंग
सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे रेस्टोरेंट, बार, होटल और ढाबों की नियमित चेकिंग करें और उन्हें आबकारी लाइसेंस के बारे में जागरूक करें। यदि किसी स्थान पर बिना लाइसेंस शराब परोसने का मामला सामने आया तो केवल संचालक ही नहीं, संबंधित इंस्पेक्टर भी जवाबदेह होंगे।

राजस्व लक्ष्य और अवैध कारोबार पर डबल प्रहार
शासन द्वारा निर्धारित 100 प्रतिशत राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति और अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और परिवहन पर प्रभावी रोक लगाने के निर्देश दिए गए। उप आयुक्त ने कहा कि विभाग का मुख्य उद्देश्य राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध शराब के नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है, जिसके लिए एक ठोस रणनीति तैयार की जानी चाहिए।

शिकायतों पर हो तत्काल और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण
सोशल मीडिया या कार्यालय में आने वाली किसी भी शिकायत को हल्के में न लें। उप आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ओवर रेटिंग या अवैध शराब की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए और केवल फोन पर समाधान करके इतिश्री न की जाए।