तुलसी निकेतन में शुरू हुआ पुनर्विकास का अभियान

-500 मकानों का सर्वे पूरा, 7,000 से अधिक निवासी होंगे स्थानांतरित 

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर की एक पुरानी और जर्जर होती जा रही कॉलोनी में नया जीवन फूंकने की दिशा में गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने वर्ष 1989-90 के दौरान विकसित की गई तुलसी निकेतन कॉलोनी के पुनर्विकास की प्रक्रिया अब जमीनी स्तर पर तेजी पकड़ चुकी है। अब तक कॉलोनी के लगभग 500 मकानों का सर्वे पूरा हो चुका है और अनुमानित तौर पर लगभग 7,000 निवासियों को इस प्रक्रिया के तहत अस्थायी रूप से स्थानांतरित किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के निर्देश पर यह कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। मंगलवार को जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह और अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह ने टीम के साथ कॉलोनी का निरीक्षण किया और जर्जर हो चुके भवनों की स्थिति का आकलन किया।

सर्वेक्षण की जिम्मेदारी डूडा (जिला नगरीय विकास अभिकरण) और नगर निगम की संयुक्त टीम निभा रही है। तुलसी निकेतन कॉलोनी में वर्ष 2004 में 2,004 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) और 288 एलआईजी (निम्न आय वर्ग) फ्लैट्स बनाए गए थे। समय के साथ इन भवनों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि रहना खतरे से खाली नहीं। वर्ष 2018 में जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय द्वारा किए गए एक तकनीकी सर्वेक्षण में इन मकानों को निवास के अयोग्य घोषित किया गया था। हाल ही में हुई एक दुखद दुर्घटना, जिसमें एक मकान की बालकनी गिरने से दो लोगों की मौत हो गई थी, ने इस पुनर्विकास परियोजना की आवश्यकता को और भी स्पष्ट कर दिया है। जीडीए द्वारा लाई जा रही यह पुनर्विकास योजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर आधारित होगी।

निर्माण कार्य के दौरान जिन निवासियों को स्थानांतरित किया जाएगा, उनकी देखरेख, रहने की वैकल्पिक व्यवस्था और खर्च की जिम्मेदारी डेवलपर्स की होगी। सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य वर्तमान निवासियों की पहचान कर उन्हें बाद में फ्लैट्स का पुन: आवंटन सुनिश्चित करना है ताकि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना से वंचित न रह जाए। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि कॉलोनी के लोगों को सुरक्षित, सुविधाजनक और आधुनिक आवास मिल सके। हमने सर्वे और पुनर्विकास कार्यों को पारदर्शिता और प्राथमिकता के साथ करने का संकल्प लिया है। मैं सभी निवासियों से अपील करता हूं कि वे इस योजना में सहयोग करें ताकि यह परियोजना समयबद्ध ढंग से पूरी हो सके। इस परियोजना से न केवल 7,000 से अधिक लोगों को नए और सुरक्षित घर मिलेंगे, बल्कि गाजियाबाद शहर के समग्र विकास और सौंदर्यीकरण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। अब सभी की निगाहें इस महत्वाकांक्षी परियोजना की प्रगति और सफलता पर टिकी हैं, जो आने वाले समय में शहरी पुनर्विकास का आदर्श मॉडल बन सकती है।