पानी की बर्बादी रोकने का प्रयास, पांच हजार स्मार्ट वाटर मीटर लगेंगे

-प्रथम चरण में लगाए जाने वाले वाटर मीटर की सूची तैयार कर निविदा जारी करने की तैयारी चल रही
-12 करोड़ रुपये खर्च होंगे, ट्रायल के सफल होने पर प्राधिकरण सभी आवंटियों के यहां मीटर लगाएगा

उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। ग्रेनो प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार पानी की बर्बादी रोकने के लिए बड़ी पहल की है। आवासीय, संस्थागत, उद्योग और व्यावसायिक सहित सभी श्रेणी के भूखंडों में मिलाकर 5095 स्मार्ट वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इसकी सूची तैयार करने के बाद अब निविदा जारी की जाएगी। अगले दो माह में काम शुरू हो जाएगा।
गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए अनेक उपाय किए जा रहे है। अब ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने घरों, उद्योगों, शिक्षण संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में स्मार्ट वाटर मीटर लगाने का बड़ा निर्णय लिया है। पायलट परियोजना के रूप में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-1 स्थित वेलेंसिया होम्स और सेक्टर- 10 स्थित अरिहंत सोसाइटी में वाटर मीटर लगाए गए थे। प्राधिकरण अधिकारी के मुताबिक प्रथम चरण में 129 बिल्डर सोसाइटी, 31 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, 68 ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी, 1072 उद्योगों, 51 संस्थागत, 36 आईटी और 4780 व्यक्तिगत घरों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे। ऐसे घर और उद्योग चिन्हित कर लिए गए हैं। जल विभाग ने इस योजना पर काम भी शुरू कर दिया है।

भूजल स्तर रोकने की कवायद
गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए प्राधिकरण प्रयास कर रहा है। पार्क और हरित क्षेत्र की सिंचाई में एसटीपी के पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही भविष्य में शत प्रतिशत गंगाजल की आपूर्ति की जानी है। इसके लिए गंगाजल का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है। वहीं अब मीटर लगाकर पानी की बर्बादी रोकने के लिए कदम बढ़ाया है।

दो सोसाइटी में लगे थे मीटर
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार ने पानी की बचत के लिए सभी बल्क वाटर यूजर्स (ग्रुप हाउसिंग सोसाइटी) के यहां पानी के मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं। ग्रेटर नोएडा में 300 से अधिक सोसाइटियां हैं। फिलहाल वेलेंसिया होम्स व अरिहंत सोसाइटी में यह अल्ट्रासोनिक वाटर मीटर गया है। एक महीने के परीक्षण के बाद इसे अन्य सोसायटियों में लगाने का निर्णय लिया जाएगा। ये मीटर बैटरी से चलेंगे। इसमें सिम कार्ड सेंसर लगा होगी, जिससे रियल टाइम डाटा प्राधिकरण को प्राप्त हो सकेगा, जिससे रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।

ये फायदे होंगे
मीटर लगने से लोग जरूरत के हिसाब से पानी खर्च करेंगे। इससे पानी की बर्बादी रुकेगी। अभी भूखंड के क्षेत्रफल के हिसाब से पानी का बिल वसूला जाता है। इससे पहले भी वाटर मीटर लगाने का प्लान बना, लेकिन मीटर को बिजली कहां से मिलेगी, यह परेशानी सामने आ रही थी। सीईओ एनजी रवि कुमार ने ग्रेटर नोएडावासियों से पानी की बचत करने की अपील की है।