-संयुक्त राष्ट्र द्वारा सत्यापित योजना से पर्यावरणीय संरक्षण और राजस्व में मिलेगी मजबूती
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और शहरी विकास में अग्रणी शहर गाजियाबाद ने अब पर्यावरणीय स्थायित्व के क्षेत्र में भी इतिहास रच दिया है। गाजियाबाद नगर निगम ने अपनी दूरदर्शी सोच और सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को साकार करते हुए खुद को अंतरराष्ट्रीय स्तर की कार्बन क्रेडिट परियोजना में सफलतापूर्वक पंजीकृत करा लिया है। इस उपलब्धि के साथ गाजियाबाद उत्तर प्रदेश का पहला और पूरे भारत का दूसरा नगर निगम बन गया है जिसे संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) द्वारा समर्थित वेरिफाइड कार्बन स्टैंडर्ड (वीसीएस) के अंतर्गत मान्यता प्राप्त हुई है। यह पंजीकरण महज एक कागजी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह गाजियाबाद की उन सतत और सार्थक पहलों का प्रमाण है, जिनका उद्देश्य शहरी जीवन को अधिक पर्यावरण-साझीदार बनाना है।
नगर निगम द्वारा शहरभर में पारंपरिक स्ट्रीट लाइट्स को ऊर्जा-सक्षम एलईडी लाइट्स में बदला गया, जिससे बिजली की भारी बचत हुई। साथ ही, गीले कचरे से कंपोस्टिंग की प्रक्रिया को तेज़ी से लागू करते हुए अपशिष्ट प्रबंधन में क्रांतिकारी सुधार किए गए। इन प्रयासों से अब तक लगभग 2.7 लाख टन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी आई है, जो सीधे तौर पर 2.7 लाख कार्बन क्रेडिट के बराबर है। अब इन कार्बन क्रेडिट्स को अंतरराष्ट्रीय कार्बन बाजार में बेचा जा सकेगा, जिससे गाजियाबाद नगर निगम को एक नया राजस्व स्रोत भी प्राप्त होगा। यह पहल न केवल पर्यावरण की रक्षा को बढ़ावा देगी, बल्कि गाजियाबाद को आर्थिक रूप से भी सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध होगी।
यह सिर्फ गाजियाबाद की नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश की उपलब्धि है

महापौर
नगर निगम गाजियाबाद।
नगर निगम की यह ऐतिहासिक उपलब्धि गाजियाबाद के लिए गर्व का विषय है। यह केवल पर्यावरण की दिशा में हमारी प्रतिबद्धता नहीं दर्शाती, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता की राह भी खोलती है। मैं सभी नागरिकों से अपील करती हूं कि वे स्वच्छता नियमों का पालन करें गीले व सूखे कचरे को अलग रखें और निगम के अधिकृत वाहनों में ही कचरा दें। यह हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है कि हम मिलकर एक हरित, स्वच्छ और टिकाऊ गाजियाबाद का निर्माण करें।
सुनीता दयाल
महापौर

नगर आयुक्त
अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरे उतरे हम
नगर निगम ने ऊर्जा दक्षता व ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में बीते वर्षों में जो सुधार किए हैं, वे अब अंतरराष्ट्रीय मान्यता पा चुके हैं। वेरा रजिस्ट्री में दिसंबर 2023 में प्रस्तुत परियोजना को जून 2025 में सफलतापूर्वक सत्यापन मिला। यह बेहद तकनीकी व कठोर मूल्यांकन प्रक्रिया थी। हमारी अगली योजनाएं भी कार्बन क्रेडिट को ध्यान में रखते हुए तैयार की जाएंगी, जिससे निगम को राजस्व लाभ और शहर को पर्यावरणीय सुरक्षा दोनों प्राप्त हों।
विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त।
नगर निगम बना देश का दूसरा और उत्तर प्रदेश का पहला कार्बन क्रेडिट पंजीकृत नगर निकाय
• 2.7 लाख टन कार्बन उत्सर्जन में कमी
• एलईडी लाइटिंग और कंपोस्टिंग से हुई बचत
• अंतरराष्ट्रीय बाजार में कार्बन क्रेडिट बेचने का मार्ग प्रशस्त
• यूएनएफसीसीसी व वीसीएस द्वारा पंजीकरण को मिली मान्यता
• जनभागीदारी से ही लक्ष्य होगा सफल

















