बिजनौर में शराब माफिया पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: आबकारी विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप, ढाबों-होटलों पर चला कानून का डंडा

-अवैध शराब, ओवररेटिंग और बिना लाइसेंस परोसने वालों की अब खैर नहीं
-एक-एक बोतल पर नजर, हर ढाबे-होटल-शराब ठेके पर विभाग का शिकंजा कस गया

उदय भूमि संवाददाता
बिजनौर। बिजनौर में शराब माफिया के लिए अब कोई कोना महफूज नहीं बचा है। जिले की सेहत और कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाए जिला आबकारी अधिकारी वरुण कुमार ने जिस ढंग से अवैध शराब कारोबारियों की नकेल कसनी शुरू की है, उसने पूरे शराब तंत्र में खलबली मचा दी है। जिले में न सिर्फ अवैध शराब की तस्करी और निर्माण पर शिकंजा कसा जा रहा है, बल्कि शराब की फुटकर बिक्री में एक रुपये की भी हेराफेरी पर भी सख्त कार्यवाही की जा रही है। वरुण कुमार की टीम अब जिले में एक-एक दुकान, होटल, बार, ढाबे और रेस्टोरेंट्स पर पैनी निगाह रखे हुए है। जिला आबकारी अधिकारी वरुण कुमार के नेतृत्व में आबकारी विभाग ने जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और खपत की गतिविधियों के खिलाफ सघन अभियान छेड़ दिया है। उनकी स्पष्ट सोच, मजबूत निगरानी नेटवर्क और लगातार फील्ड में रहने वाली टीमों की मुस्तैदी ने माफियाओं की कमर तोड़ दी है। वरुण कुमार के नेतृत्व में विभाग की टीमें गांव से लेकर शहर, ढाबों से लेकर हाईवे किनारे बने रेस्टोरेंट्स तक अपना शिकंजा कस चुकी हैं।

रविवार को जिले के विभिन्न हिस्सों में आबकारी निरीक्षकों की टीमों ने एक साथ व्यापक जांच अभियान चलाया। हरि नारायण यादव, त्रिवेणी प्रसाद मौर्य, अतुल राय कुसुमाकर धर और देवेश कुमार सोती जैसे अनुभवी अधिकारियों की टीम ने नजीबाबाद समेत कई क्षेत्रों में ढाबों, रेस्टोरेंट्स और शराब दुकानों पर औचक निरीक्षण किया। चेकिंग के दौरान अवैध शराब की कोई खेप बरामद नहीं हुई, लेकिन यह विभाग की प्रभावशाली मौजूदगी का प्रमाण था कि अब तस्कर पहले जैसी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। शराब की फुटकर दुकानों पर स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया और साथ ही गोपनीय रूप से टेस्ट परचेज भी कराया गया ताकि यह देखा जा सके कि दुकानदार निर्धारित मूल्य से अधिक तो नहीं वसूल रहे हैं। कई दुकानदारों को सख्त चेतावनी दी गई कि एक रुपये भी एमआरपी से अधिक लेने पर न केवल जुर्माना लगेगा, बल्कि लाइसेंस रद्द करने की कार्यवाही भी की जाएगी।

आबकारी टीम ने रेस्टोरेंट व ढाबा संचालकों को स्पष्ट निर्देश दिए कि कोई भी ग्राहक उनके परिसर में शराब पीते हुए न मिले, अन्यथा उनके खिलाफ भी विधिक कार्रवाई की जाएगी। जिला आबकारी अधिकारी वरुण कुमार की यह नीति अब सिर्फ अवैध शराब के खिलाफ ही नहीं, बल्कि शराब संस्कृति को नियंत्रण में लाने की एक मुहिम बन चुकी है। उनकी कार्यशैली की सबसे खास बात है कि विभाग अब सिर्फ तस्करों के पीछे नहीं भाग रहा, बल्कि खुद को हर उस स्थान पर मौजूद कर रहा है जहां शराब को लेकर कानून का उल्लंघन होने की संभावना होती है। बिजनौर में पहली बार ऐसा हो रहा है कि होटल, बार, क्लब और हाईवे के ढाबों तक की निगरानी एक रणनीतिक योजना के तहत हो रही है। वरुण कुमार ने यह साफ किया है कि विभाग अब हर उस गतिविधि पर नजर रखेगा, जिससे जिले की सामाजिक सेहत पर बुरा असर पड़ता हो। उनके मुताबिक अवैध शराब का नेटवर्क खत्म करना सिर्फ एक लक्ष्य नहीं, बल्कि लोगों को सुरक्षित और स्वस्थ जीवन देना असली प्राथमिकता है।

बिजनौर की जनता ने भी इस मुहिम को हाथोंहाथ लिया है। लगातार मिल रही जनशिकायतों और सूचना चैनलों से स्पष्ट है कि अब लोग खुद सामने आकर इस मुहिम में सहभागी बनना चाहते हैं। यह परिवर्तन दर्शाता है कि जिला प्रशासन की नीयत और नीति जब साफ होती है, तो उसका असर सीधे जनता की सोच पर पड़ता है। आने वाले दिनों में विभाग और भी ज्यादा आक्रामक कार्रवाई की योजना में है। खास तौर पर उन फार्म हाउसों और निजी कार्यक्रम स्थलों की पहचान की जा रही है, जहां बिना लाइसेंस शराब परोसी जाती है। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी नेटवर्क को सक्रिय कर विभाग गांव-गांव अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। बिजनौर में आबकारी विभाग की इस सख्त कार्यशैली ने माफिया को घुटनों पर ला दिया है। अब न कोई छिपकर बेच सकता है, न ही खुलेआम पी सकता है। ‘वरुण नीति’ के तहत चला यह अभियान न सिर्फ बिजनौर बल्कि उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए भी एक आदर्श मॉडल बनकर उभरा है। जिले की जनता का अब एक ही स्वर है शराब माफिया बाहर जाएं, कानून और सेहत का राज कायम रहे।

चेतावनी साफ: ओवररेटिंग पर होगी दुकान सील
निरीक्षण के दौरान शराब दुकानों के विक्रेताओं को साफ चेतावनी दी गई कि अगर किसी भी ग्राहक से बोतल पर अंकित मूल्य से एक रुपये भी अधिक वसूली की गई, तो सख्त कार्रवाई होगी। न केवल जुर्माना बल्कि दुकान का लाइसेंस भी निरस्त किया जा सकता है। विभाग ने यह भी निर्देशित किया कि दुकानों के बाहर कोई भी व्यक्ति शराब पीता हुआ नहीं दिखना चाहिए। शराब की बिक्री सिर्फ वैधानिक और निर्धारित दायरे में ही हो।

सख्त चेकिंग, हर कोना खंगाला गया
रविवार को चलाए गए प्रवर्तन अभियान के तहत जिलेभर में आबकारी निरीक्षक हरि नारायण यादव, त्रिवेणी प्रसाद मौर्य, अतुल राय कुसुमाकर धर और देवेश कुमार सोती की टीमें मैदान में उतरीं। इन टीमों ने अपने-अपने क्षेत्रों में रेस्टोरेंट और ढाबों पर औचक छापेमारी, शराब की दुकानों पर भौतिक स्टॉक का मिलान, गोपनीय रूप से “टेस्ट परचेज” कर अवैध ओवररेटिंग की जांच और सार्वजनिक स्थलों पर शराब सेवन की निगरानी
की गई।

होटल, बार और रेस्टोरेंट भी रडार पर
वरुण कुमार के निर्देश पर बार, होटल और रेस्टोरेंट्स पर विशेष नजर रखी जा रही है। बिना लाइसेंस के शराब परोसने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। विभाग के अनुसार राजस्व हित और सामाजिक सुरक्षा दोनों सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।