• हर बोतल पर क्यूआर कोड की निगरानी हो अचूक: आदर्श सिंह
• आबकारी आयुक्त की सख्ती और रणनीति से आबकारी विभाग में आई नई ऊर्जा, प्रदेश भर में बन रहा मॉडल
• तकनीक, निगरानी और पारदर्शिता के समन्वय से यूपी बना रहा है नया मॉडल, मोहन मीकिन डिस्टिलरी का औचक निरीक्षण
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और राजस्व व्यवस्था को पारदर्शी, अनुशासित और नवाचारयुक्त बनाने की दिशा में आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह का नेतृत्व एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। एक ओर जहां प्रदेश में अवैध शराब कारोबार पर प्रभावी शिकंजा कसा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विभागीय राजस्व में भी अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की जा रही है। आयुक्त आदर्श सिंह का मानना है कि सशक्त निगरानी, स्मार्ट टेक्नोलॉजी और ज़ीरो टॉलरेंस की रणनीति से ही उत्तर प्रदेश को अवैध शराब मुक्त, और एक राजस्व सशक्त राज्य बनाया जा सकता है। इसी विज़न को धरातल पर उतारने के लिए वे निरंतर ज़मीनी स्तर पर सक्रिय हैं। अपने चार दिवसीय पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर आयुक्त आदर्श सिंह लगातार मेरठ जोन के जिलों का निरीक्षण कर रहे हैं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य जिलावार आबकारी व्यवस्था की समीक्षा, अवैध व्यापार पर निगरानी और अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्यप्रणाली के लिए निर्देशित करना है। गाजियाबाद में मंगलवार को उन्होंने मोहन मीकिन डिस्टिलरी का औचक निरीक्षण किया, जहां वे बोतलों की भराई, पैकिंग और क्यूआर कोड प्रणाली की गहराई से जांच करते दिखे। निरीक्षण में संयुक्त आयुक्त दिलीपमणि तिवारी, उप आयुक्त नीरज वर्मा, जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम समेत वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त आदर्श सिंह ने स्पष्ट रूप से कहा कि क्यूआर कोड पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकार का प्रतीक है। यदि उसमें कोई चूक होगी तो वह पूरे तंत्र की जवाबदेही पर प्रश्नचिन्ह लगाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि पैकिंग से लेकर निकासी तक हर चरण पर निगरानी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि यदि किसी चरण में लापरवाही मिली तो सिर्फ जि़म्मेदार कर्मी ही नहीं, संबंधित जिला आबकारी अधिकारी की जवाबदेही भी तय होगी। यह सख्ती विभाग में कार्यसंस्कृति के सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। आयुक्त आदर्श सिंह की नेतृत्व क्षमता और नवाचारपरक सोच ने आबकारी विभाग को एक बार फिर प्रदेश के सबसे प्रभावी राजस्व स्त्रोतों में तब्दील करना शुरू कर दिया है। राज्य सरकार के ‘ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी’ के लक्ष्य में आबकारी विभाग की भूमिका अब सिर्फ राजस्व संग्रहण तक सीमित नहीं, बल्कि प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और तकनीकी सुदृढ़ता का प्रतीक बन रही है।
अवैध शराब के खिलाफ बनी तगड़ी रणनीति, सीमाओं पर बिछाया जा रहा शिकंजा
उत्तर प्रदेश की सीमाओं से होकर गुजरने वाली अवैध शराब की तस्करी को रोकने के लिए आबकारी आयुक्त ने सीमावर्ती जि़लों को विशेष रणनीति अपनाने के निर्देश दिए हैं। इंटरस्टेट मूवमेंट पर सीसीटीवी निगरानी, वाहनों की GPS ट्रैकिंग, मोबाइल चेक पोस्ट और तकनीकी इनपुट आधारित कार्रवाई अब नए मानक बनते जा रहे हैं।
परफॉर्म या रिजाइन- कार्य संस्कृति में बदलाव की चेतावनी
सूत्रों की मानें तो आयुक्त आदर्श सिंह ने कई जिलों में अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में चेताया है कि परफॉर्म करो या कुर्सी छोड़ो। उनका कहना है कि अब बहानों का दौर नहीं, बल्कि परिणाम का समय है। आयुक्त की सख्त लेकिन रणनीतिक कार्यप्रणाली के कारण प्रदेशभर में आबकारी विभाग के अधिकारी पहले से ज्यादा सक्रिय, उत्तरदायी और सजग नज़र आ रहे हैं। गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर, बरेली, नोएडा जैसे जि़लों में लगातार राजस्व वृद्धि के साथ-साथ अवैध कारोबार में भी उल्लेखनीय कमी आई है।
डिजिटल इकोसिस्टम की ओर बढ़ते कदम
विभागीय सूत्रों के अनुसार आयुक्त आदर्श सिंह जल्द ही एक नई डिजिटल आबकारी ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने की योजना बना रहे हैं, जिसमें निर्माता से उपभोक्ता तक हर बोतल का पूरा ब्योरा ट्रैक किया जाएगा। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि कर अपवंचन की भी गुंजाइश नहीं बचेगी।

















