वैशाली में अध्यात्म और विज्ञान का संगम, ध्यान संघ कार्यक्रम ने साधकों को किया आलोकित

-श्री गुरु रत्ना प्रभु के संकल्प से संचालित मासिक ध्यान कार्यक्रम में वैशाली में जुटे सैकड़ों साधक
-संतुलन, शांति और चेतना की दिशा में एक और सफल कदम: गाजियाबाद में आयोजित हुआ ध्यान संघ कार्यक्रम

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सेक्टर-1, वैशाली में गत रविवार को श्रीमद् राजचंद्र मिशन, दिल्ली के संस्थापक परम श्रद्धेय श्री गुरु रत्ना प्रभु की प्रेरणा से संचालित ध्यान संघ कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह आयोजन सावित्री ‘संजू’ एवं कमल किशोर के निवास स्थान पर किया गया, जो पिछले तीन वर्षों से प्रत्येक माह नियमित रूप से आयोजित होता आ रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत 25 मिनट के संगीतमय सत्संग से हुई, जिसके पश्चात 40 मिनट का निर्देशित ध्यान साधकों को कराया गया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को आंतरिक शांति, आत्मचिंतन और जागरूकता की गहराई तक पहुँचने का अवसर प्रदान किया। इस विशेष अवसर पर पार्षद कुसुम गोयल ने भी साधकों के साथ ध्यान में सहभागिता की और कार्यक्रम की सराहना की। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि श्री गुरु रत्ना प्रभु के संदेश के माध्यम से मानव मस्तिष्क पर ध्यान के प्रभाव को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी प्रस्तुत किया गया।

उन्होंने विशेष रूप से मस्तिष्क के ऐमिगडला, हिप्पोकैम्पस एवं नियोकार्टेक्स जैसे भागों पर ध्यान के सकारात्मक असर को रेखांकित किया। जिससे साधकों को ध्यान को केवल आध्यात्मिक नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पद्धति के रूप में अपनाने की प्रेरणा मिली। कार्यक्रम में शामिल प्रमुख साधकों में जोगेश भांबरी, यतेश शर्मा, कुमकुम शर्मा, मंजू आर्या, सुभाष जैन, पूनम जैन, रीता देवी, लीना सौरभ, ज्योति चौधरी, राजेश कुमार, पवन चौहान, राज कुमार, नरेश कुमार, किरण सिंह, सुषमा सहगल, रेखा वार्ष्णेय, हरीश वार्ष्णेय, प्रतिमा गुप्ता, निशी गुप्ता, सरिका गुप्ता, मनसा कोरंगा, दिव्या गुप्ता, स्वर्णिमा अग्रवाल समेत 50 से अधिक साधकों ने गहन रूप से भाग लिया। सभी साधकों ने ध्यान के बाद अपने अनुभव साझा किए और बताया कि यह कार्यक्रम मानसिक शांति, एकाग्रता और आत्मिक उन्नयन के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो रहा है।

यह मासिक ध्यान कार्यक्रम न केवल एक आध्यात्मिक साधना है, बल्कि समाज में सकारात्मकता, समरसता और संवेदनशीलता को बढ़ावा देने वाला एक सशक्त अभियान बन चुका है। साधकों का विश्वास है कि श्री गुरु रत्ना प्रभु के मार्गदर्शन में ध्यान संघ कार्यक्रम आने वाले समय में और भी अधिक लोगों को आत्मजागृति की दिशा में प्रेरित करेगा। ध्यान संघ कार्यक्रम ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि आधुनिक जीवन की आपाधापी में भी ध्यान और सत्संग के माध्यम से शांति और चेतना को जागृत किया जा सकता है। इस आयोजन ने न केवल गाजियाबाद में अध्यात्म की लौ को प्रज्वलित किया, बल्कि एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ ध्यान को जन-जन तक पहुँचाने का भी सशक्त प्रयास किया।