-लोनी क्षेत्र में बाढ़ की आहट, जिलाधिकारी की सतर्क निगरानी से काबू में हालात
-लोनी क्षेत्र में बाढग़्रस्त गाँवों का लगातार निरीक्षण, प्रभावित परिवारों के लिए शरणालयों व भोजन-पानी की व्यवस्था
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। वर्षा ऋतु के दौरान हरियाणा के हथनीकुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे भारी जल प्रवाह को देखते हुए गाजियाबाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ के नेतृत्व में बाढ़ से निपटने की तैयारियां लगातार तेज की जा रही हैं। प्रशासनिक टीम ने बुधवार को लोनी तहसील क्षेत्र के कई गांवों का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं बचाव कार्यों को प्राथमिकता दी। तहसील लोनी क्षेत्र के ग्राम बदरपुर, मीरपुर हिन्दू, पचायरा, इलायचीपुर, लुत्फुल्लापुर नवादा और अल्लीपुर बाढ़ के संभावित असर वाले इलाके माने जा रहे हैं। इन क्षेत्रों में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी लोनी दीपक सिंघनवाल, तहसीलदार जयप्रकाश और नायब तहसीलदार लीलू सिंह लगातार निगरानी कर रहे हैं। जिलाधिकारी माँदड़ के स्पष्ट निर्देश हैं कि किसी भी परिस्थिति में लोगों को असुविधा न हो और समय रहते उन्हें हर आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन द्वारा जलस्तर बढऩे से प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए अब तक कुल 12 शरणालय तैयार किए गए हैं। इन शरणालयों में भोजन और पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी के आदेश पर राहत शिविरों में बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए विशेष सुविधा की भी व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए यमुना नदी के किनारे नावों और गोताखोरों की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, बाढ़ चौकियों पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने के लिए पर्याप्त स्टाफ की तैनाती की गई है। ग्राम स्तर पर बाढ़ सुरक्षा समितियों को सक्रिय कर दिया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत पहुंचाई जा सके। 19 अगस्त की रात से यमुना नदी का जलस्तर कम होना शुरू हो गया है।
खेतों में पानी भर जाने से पहले जो स्थिति बनी थी, अब उसमें काफी सुधार हुआ है और फसलों को नुकसान होने की संभावना टल गई है। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार माँदड़ ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बाढ़ क्षेत्र की हर गतिविधि पर सतर्क दृष्टि रखी जाए और किसी भी आकस्मिक स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाए। जिलाधिकारी माँदड़ की कार्यशैली की सबसे बड़ी विशेषता यही मानी जा रही है कि वह संकट की घड़ी में केवल आदेश जारी नहीं करते, बल्कि स्वयं मौके पर जाकर स्थिति का जायजा लेते हैं और जनता को भरोसा दिलाते हैं कि प्रशासन हर समय उनके साथ है। उनके नेतृत्व में गाजियाबाद प्रशासन ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि समन्वित प्रयास और समयबद्ध कार्रवाई से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
















