विकसित उत्तर प्रदेश 2047: गाजियाबाद में स्वास्थ्य और महिला सुरक्षा पर केंद्रित कार्यशाला, डॉ. उपासना अरोड़ा ने निजी क्षेत्र की भागीदारी पर दिया जोर

– मुख्य विकास अधिकारी ने QR कोड के माध्यम से सुझाव देने की प्रक्रिया की शुरुआत की
– डा. अखिलेश मोहन और डॉ. राकेश कुमार गुप्ता ने स्वास्थ्य क्षेत्र की चुनौतियों और समाधान पर जोर दिया
– डॉ. उपासना अरोड़ा ने महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी पर विशेष मार्गदर्शन दिया
– डॉ. सुनील डागर और डॉ. कृष्ण कान्त ने डिजिटलाइजेशन और AI आधारित स्वास्थ्य डेटा पर महत्वपूर्ण सुझाव दिए
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश सरकार के “समर्थ उत्तर प्रदेश-विकसित उत्तर प्रदेश @2047” अभियान के तहत जनपद में हिन्दी भवन में मंगलवार को एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में प्रमुख विशेषज्ञ, सरकारी अधिकारी, चिकित्सक, पैरामेडिकल कर्मचारी और स्कूली छात्र-छात्राओं को विजन डॉक्यूमेंट निर्माण के लिए दिशा-निर्देश प्रदान किए गए। इसका उद्देश्य स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र में सुधार के साथ-साथ नागरिकों और विशेषज्ञों के सुझावों को क्यूआर कोड के माध्यम से शामिल करना था। कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य विकास अधिकारी (आईएएस) ने की। उन्होंने विजन डॉक्यूमेंट निर्माण की रूपरेखा प्रस्तुत की और प्रतिभागियों को क्यूआर कोड के माध्यम से सुझाव देने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि यह पहल जनभागीदारी और नीति निर्माण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य क्षेत्र की वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर विशेष ध्यान दिया गया। डा. अखिलेश मोहन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी गाजियाबाद ने मोबाइल लत और इसके स्वास्थ्य पर प्रभाव के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं में मोबाइल की बढ़ती लत गंभीर चिंता का विषय है, और इसके नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए जागरूकता जरूरी है। डा. राकेश कुमार गुप्ता, सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ एवं जिला सर्विलांस अधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों और उनके समाधान के लिए प्रभावी कार्ययोजना प्रस्तुत की।
डॉ. उपासना अरोड़ा का प्रमुख योगदान: महिलाओं के स्वास्थ्य और निजी क्षेत्र की भागीदारी
कार्यक्रम में विशेष रूप से डॉ. उपासना अरोड़ा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी यशोदा अस्पताल को प्रमुखता दी गई। उन्होंने महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका पर अपने विचार साझा किए। डॉ. अरोड़ा ने कहा कि महिलाओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा और बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने महिला स्वास्थ्य सेवाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य और विशेष चिकित्सकीय प्रशिक्षण में निजी संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। इसी प्रकार, डा. सुनील डागर, यशोदा अस्पताल ने हॉस्पिटल सेवाओं, मानव संसाधन प्रबंधन, डिजिटलाइजेशन, फोलोअप मॉनिटरिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित डेटा साझा करने और जीवनशैली संबंधित रोगों के प्रशिक्षण पर जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि यह पहल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने और मरीजों को सुविधा प्रदान करने में अहम भूमिका निभाएगी। नरेन्द्र भूषण, अपर मुख्य सचिव, ऊर्जा एवं प्राविधिक विभाग ने बच्चों में बढ़ती मोबाइल लत को गंभीर चिंता का विषय बताया और लोगों को क्यूआर कोड के माध्यम से सुझाव देने के लिए प्रेरित किया। राजेन्द्र कुमार तिवारी, पूर्व मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश शासन ने स्वस्थ जीवन, शुद्ध भोजन, स्वच्छ जल और वायु के महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि कोई भी प्रदेश तभी विकसित होगा जब हर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ हो। कार्यक्रम में डा. कृष्ण कान्त, रेडियोलॉजिस्ट ने एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और कम्प्यूटेड टोमोग्राफी जैसी जाँचों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित केंद्रीकृत डेटा सिस्टम की आवश्यकता पर जोर दिया, जिससे सभी केंद्रों में डेटा साझा किया जा सके।
जनभागीदारी और तकनीकी नवाचार पर जोर
कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने विजन डॉक्यूमेंट निर्माण में जनभागीदारी बढ़ाने के लिए क्यूआर कोड के उपयोग पर जोर दिया। इस तकनीकी पहल के माध्यम से आम नागरिक, विशेषज्ञ और छात्र-छात्राएं भी अपने सुझाव और विचार साझा कर सकते हैं। कार्यक्रम के अंत में आयुर्वेद चिकित्सक, पैरामेडिकल स्टाफ और मीडिया प्रतिनिधियों का उनके योगदान के लिए धन्यवाद व्यक्त किया गया।