-ओएसडी शैलेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में प्राधिकरण ने किया दो सौ करोड़ से अधिक मूल्य की भूमि का ध्वस्तीकरण
-अवैध कालोनियों पर शिकंजा, यमुना प्राधिकरण की सख़्ती ने उड़ाई माफियाओं की नींद
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने अपने अधिसूचित क्षेत्र में अवैध कालोनियों और बिना अनुमति किए गए निर्माणों के खिलाफ एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई की। यह अभियान शुक्रवार को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) आर.के. सिंह के निर्देश पर ओएसडी शैलेन्द्र कुमार सिंह के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। इस कार्रवाई के तहत जेवर बांगर, मंगरौली और मेवला गोपालगढ़ क्षेत्र में कुल 11.3480 हेक्टेयर यानी 1,13,480 वर्गमीटर भूमि पर अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए, जिनका कुल मूल्य लगभग 226.96 करोड़ रुपये आंका गया। सीईओ आर.के. सिंह ने हमेशा यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के नियमानुसार और व्यवस्थित विकास को प्राथमिकता दी है। उनके नेतृत्व में प्राधिकरण ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि किसी भी अवैध निर्माण या प्लाटिंग को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की भूमि पर किसी भी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि कानूनन दंडनीय है और ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई होगी। उनका यह दृष्टिकोण केवल कानून की पालना सुनिश्चित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के विकास, निवेशकों के विश्वास और आने वाली पीढिय़ों के लिए सुरक्षित पर्यावरण सुनिश्चित करने का माध्यम भी है।
सीईओ आर.के. सिंह के निर्देशानुसार ओएसडी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने परियोजना विभाग और भूलेख विभाग के अधिकारियों, उपजिलाधिकारी जेवर, क्षेत्राधिकारी पुलिस और प्रभारी निरीक्षकों के साथ मिलकर अवैध निर्माणों की पहचान और ध्वस्तीकरण कार्यवाही का संचालन किया। उन्होंने बताया कि जेवर बांगर में 7.8060 हेक्टेयर और मेवला गोपालगढ़ में 3.5420 हेक्टेयर भूमि पर अवैध निर्माण पाए गए, जिनमें कॉलोनियों के बाउंड्री, प्लाटिंग और अन्य निर्माण कार्य शामिल थे। ध्वस्तीकरण के दौरान कालोनाइजरों के विरोध के बावजूद पुलिस और प्राधिकरण की टीम ने पूरी कार्यवाही शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न की।
ओएसडी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एक्ट 1976 की धारा 10 के तहत सक्षम अधिकारी द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में की गई। सभी अवैध कालोनाइजरों के खिलाफ जेवर थाना में एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल अवैध निर्माण को हटाना ही नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्राधिकरण की भूमि का उपयोग नियमानुसार हो और निवेशकों का विश्वास बनाए रखा जाए। किसी भी व्यक्ति या संस्था द्वारा अवैध खरीद-फरोख्त की गई संपत्ति में होने वाले किसी भी लाभ-हानि के लिए प्राधिकरण जिम्मेदार नहीं होगा। सीईओ आर.के. सिंह का यह अभियान केवल कड़ी कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उनका उद्देश्य प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में एक व्यवस्थित, सुरक्षित और निवेश के अनुकूल माहौल सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर निरीक्षण कर अवैध निर्माणों की पहचान की जाएगी और कड़े कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। यह नीति निवेशकों और आम जनता दोनों के लिए भरोसेमंद माहौल बनाने में सहायक है।
ध्वस्तीकरण का सामाजिक और आर्थिक महत्व
ध्वस्तीकरण से न केवल प्राधिकरण की भूमि संरक्षित होगी, बल्कि क्षेत्र में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के अवसर भी सुरक्षित रहेंगे। ओएसडी शैलेन्द्र कुमार सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई समाज और आर्थिक विकास दोनों के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। अवैध निर्माणों को हटाकर प्राधिकरण ने यह सुनिश्चित किया कि क्षेत्र का नियोजित और व्यवस्थित विकास हो। सीईओ आर.के. सिंह ने जनता से अपील की कि यदि वे प्राधिकरण की भूमि पर किसी प्रकार की अनधिकृत गतिविधि देखें तो तुरंत अधिकारियों को सूचित करें। उन्होंने कहा कि समुदाय का सहयोग ही इस अभियान की सफलता की कुंजी है। शैलेन्द्र कुमार सिंह ने भी यह स्पष्ट किया कि सभी अवैध निर्माणों की निगरानी लगातार जारी रहेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
भविष्य की योजनाएं और सतत निरीक्षण
यमुना एक्सप्रेसवे प्राधिकरण का यह अभियान निरंतर जारी रहेगा। सीईओ आर.के. सिंह ने निर्देश दिए हैं कि प्राधिकरण की टीम समय-समय पर क्षेत्र का निरीक्षण करे और किसी भी अवैध निर्माण को चिन्हित कर तत्काल कार्रवाई करे। उनका कहना है कि केवल कार्रवाई भर से नहीं, बल्कि सतत निगरानी और नियामक दृष्टिकोण से ही क्षेत्र का सुरक्षित और व्यवस्थित विकास सुनिश्चित किया जा सकता है। इस तरह, सीईओ आर.के. सिंह के नेतृत्व में प्राधिकरण ने यह संदेश स्पष्ट कर दिया कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास क्षेत्र में अवैध निर्माण की कोई भी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शैलेन्द्र कुमार सिंह और पूरी टीम ने इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करते हुए क्षेत्र में कानून और व्यवस्था की नई मिसाल स्थापित की है। इस अभियान से यह स्पष्ट होता है कि सख्त नियम, पारदर्शिता और नेतृत्व क्षमता के माध्यम से अवैध गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सकता है।

















