राष्ट्रीय लोक अदालत: 1,86,634 वादों का सफलतापूर्वक निस्तारण, जनता का भरोसा बढ़ा

-जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार की अध्यक्षता में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत
-सुलह-समझौते से 66,600 वादों का समाधान, 1.13 करोड़ से अधिक रुपए वसूले गए
-वैवाहिक और भरण-पोषण संबंधी मामलों का भी निस्तारण
-मोटर वाहन दुर्घटना और बैंक ऋण वसूली के मामलों में राहत
-लोक अदालत ने लंबित मामलों का बोझ घटाया और जनता का विश्वास मजबूत किया

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कचहरी परिसर स्थित जिला न्यायालय में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर न्यायिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और आम जनता की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। राष्ट्रीय लोक अदालत में कुल 1,86,634 वादों का निस्तारण किया गया, जिसमें 66,600 वाद सुलह-समझौते के माध्यम से निपटाए गए। जिला न्यायालय परिसर में आयोजित इस अदालती प्रक्रिया की अध्यक्षता प्रभारी जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष अनिल कुमार ने की। उन्होंने कहा कि इस आयोजन के माध्यम से जनता का न्याय पर भरोसा बढ़ता है और अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी घटता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय लोक अदालत में मामलों का सही और समय पर निस्तारण न्याय व्यवस्था की पारदर्शिता और प्रभावशीलता को बढ़ाता है।

इस अवसर पर संजयवीर सिंह, पीठासीन अधिकारी मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण, परवेन्द्र कुमार शर्मा प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय, प्रमेन्द्र कुमार विशेष न्यायाधीश सीबीआई, नीरज गौतम विशेष न्यायाधीश पोक्सो एक्ट, गौरव शर्मा नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं स्पेशल जज एससी/एसटी एक्ट और कुमार मिताक्षर अपर जिला जज एवं सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सहित अन्य न्यायिक अधिकारी उपस्थित थे। लोक अदालत का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में सुलह योग्य मामलों का समाधान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। वैवाहिक एवं भरण पोषण संबंधी 233 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय द्वारा सुलह-समझौते के आधार पर किया गया। इसके अतिरिक्त, लेबर एक्ट, वाणिज्य अधिनियम, 26 यूपी एक्ट, पुलिस अधिनियम, बाट माप अधिनियम, मोटर वाहन अधिनियम, आबकारी अधिनियम और जिला परिषद अधिनियम से संबंधित लघु प्रकृति के वादों का भी समाधान किया गया।

मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित कुल 10 मामलों का निस्तारण करते हुए पक्षकारों को 3,23,09,174 रुपए अदा किए जाने के आदेश पारित किए गए। इसके अलावा विभिन्न बैंकों के लोन रिकवरी और बीएसएनएल से संबंधित 434 मामलों का निपटारा किया गया, जिसमें 30,40,730 रुपए की धनराशि वसूली के आदेश पारित हुए। राजस्व न्यायालयों से प्राप्त सूचना के अनुसार राजस्व संबंधी 1,19,131 मामलों का निस्तारण भी राष्ट्रीय लोक अदालत में किया गया। प्रभारी जनपद न्यायाधीश अनिल कुमार ने कहा कि इस तरह के आयोजन न केवल जनता को न्याय तक पहुंचाते हैं बल्कि अदालतों पर लंबित मामलों का बोझ भी कम करते हैं। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों और अधिवक्ताओं को इस कार्य में उत्कृष्ट सहयोग देने के लिए सराहा।

संजयवीर सिंह, ट्रिब्यूनल जिला जज ने कहा कि स्वर्गीय आशीष गर्ग जिला जज हमेशा कहते थे कि लोक अदालत को प्रभावी और सुव्यवस्थित तरीके से संचालित करना चाहिए। उनका मार्गदर्शन हमें प्रेरित करता है और हमें अधिक से अधिक वादों का निपटान सुनिश्चित करना चाहिए, जिससे जनता को समय पर न्याय मिल सके। राष्ट्रीय लोक अदालत में निस्तारित मामलों की संख्या और व्यापकता को देखते हुए यह स्पष्ट है कि लोक अदालत जनता और न्याय व्यवस्था के बीच सेतु का कार्य करती है। इस तरह के आयोजन से न केवल न्याय की प्रक्रिया त्वरित और पारदर्शी बनती है बल्कि आम नागरिकों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास भी मजबूत होता है।