– करीब 10,000 वर्ग मीटर डूब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया, 10 से अधिक घर और 15 बाउंड्री वॉल ध्वस्त
– प्राधिकरण ने जारी की चेतावनी, अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ होगी कड़ी कार्रवाई
– पुलिस और सिंचाई विभाग की संयुक्त कार्रवाई, सुबह 7 बजे से दो घंटे तक चली कार्यवाही
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। एनजीटी के आदेश और सुरक्षा मानकों के अनुपालन में ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने बुधवार को हैबतपुर के डूब क्षेत्र में बुलडोजर चला कर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। इस कार्रवाई के दौरान शिवम एंक्लेव में बने करीब 10 घर और 15 बाउंड्री वॉल को तोड़ा गया। लगभग 10,000 वर्ग मीटर डूब क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने बताया कि यह कार्रवाई एनजीटी के निर्देशानुसार परियोजना विभाग और भूलेख विभाग की टीम द्वारा की गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण की अधिसूचित एरिया में अनुमति या नक्शा पास करवाए बिना कोई भी निर्माण करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीण हैबतपुर के खसरा संख्या 180, 181, 184, 194, 195, 196, 198, 199, 201, 202, 206, 211 और 212 की जमीन हिंडन नदी के डूब क्षेत्र में स्थित है। एनजीटी के आदेश के मुताबिक, डूब क्षेत्र में किसी भी प्रकार का निर्माण प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, कालोनाइजरों ने इस क्षेत्र में चोरी-छिपे प्लॉटिंग कर शिवम एंक्लेव के नाम से अवैध कॉलोनी बसा दी थी। दूर-दराज से आए लोग रोजगार की तलाश में इन कालोनाइजरों से जमीन खरीद कर निर्माण कर चुके थे।
महाप्रबंधक एके सिंह ने बताया कि प्राधिकरण की तरफ से पहले नोटिस जारी किया गया था और अतिक्रमण हटाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद एनजीटी के आदेश पर परियोजना विभाग, सिंचाई विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई की गई। ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने कार्रवाई की सराहना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम समय रहते उठाया गया, अन्यथा अवैध निर्माण बढ़ता और डूब क्षेत्र खतरे में पड़ जाता। वहीं कुछ लोग जिन्होंने गलती से कालोनाइजर से जमीन खरीदी थी, वे अपने नुकसान के लिए निराश दिखे। प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि अब कोई भी कालोनाइजर बिना प्राधिकरण की अनुमति के ग्रेटर नोएडा में किसी भी भूमि पर अवैध निर्माण नहीं कर पाएगा। साथ ही, नागरिकों को भी सलाह दी गई है कि वे हमेशा सरकारी रिकॉर्ड और मान्यता प्राप्त नक्शे की जानकारी लेकर ही जमीन खरीदें।
इस कार्रवाई ने प्राधिकरण की सख्ती और डूब क्षेत्रों में अतिक्रमण रोकने के प्रयासों को फिर से स्पष्ट कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम नदी के प्राकृतिक प्रवाह और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बेहद जरूरी था। एसीईओ सुमित यादव ने स्थानीय नागरिकों से अपील की कि वे प्राधिकरण से संपर्क किए बिना किसी भी जमीन में निवेश न करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसे सभी अवैध निर्माणों को तुरंत हटाया जाएगा और किसी को भी अतिक्रमण की अनुमति नहीं दी जाएगी। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया कि डूब क्षेत्र में निर्माण करने से नदी के प्राकृतिक प्रवाह और सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। इस कार्रवाई का उद्देश्य न केवल अतिक्रमण हटाना है, बल्कि भविष्य में किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा या नदियों के जलस्तर में समस्या पैदा होने से बचना भी है।
सुबह से दो घंटे तक चली कार्रवाई
सुबह 7 बजे से शुरू हुई कार्रवाई दो घंटे तक चली। इस दौरान 4 जेसीबी और 3 डंपरों का इस्तेमाल किया गया। अतिक्रमण हटाने के दौरान महाप्रबंधक एके सिंह, ओएसडी राम नयन सिंह, वरिष्ठ प्रबंधक प्रभात शंकर, वरिष्ठ प्रबंधक सीवर विभाग विनोद शर्मा, वरिष्ठ प्रबंधक राजेश कुमार निम, प्रभारी वरिष्ठ प्रबंधक रतिक, प्रबंधक अभिषेक सिंह, नितीश कुमार, बिजेंद्र कुशवाहा, सहायक प्रबंधक राजीव मोटला, राम किशन, भूपेंद्र त्यागी के साथ पुलिस अधिकारी दीक्षा सिंह और सिंचाई विभाग की टीम मौजूद रही।

ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की अधिसूचित एरिया में किसी भी अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। विशेषकर डूब क्षेत्र जैसी संवेदनशील भूमि पर बिना अनुमति या नक्शा पास कराए निर्माण करना कानून का उल्लंघन है। भविष्य में किसी भी कालोनाइजर या नागरिक को चेतावनी दी जाती है कि बिना प्राधिकरण की स्वीकृति के भूमि पर निर्माण करने का प्रयास न करें। जो लोग ऐसा करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और उनके निर्माण को तत्काल हटाया जाएगा। नागरिकों से भी अपील है कि वे किसी भी जमीन में निवेश करने से पहले प्राधिकरण से पूरी जानकारी अवश्य लें। अवैध निर्माण से न केवल उनकी मेहनत का नुकसान होगा, बल्कि यह नदी और पर्यावरण के लिए भी खतरा है।
एके सिंह
महाप्रबंधक परियोजना, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण

















