-सैकड़ों शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन – बोले, पुरानी पेंशन बहाली और गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति मिले
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में शनिवार को उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले सैकड़ों शिक्षकों ने अपनी आवाज बुलंद की। शिक्षकों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर कलेक्ट्रेट का घेराव किया और सरकार से अपनी लंबित मांगों के समाधान की जोरदार अपील की। प्रदर्शन का नेतृत्व संघ के जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने किया। शिक्षकों ने जिलाधिकारी के माध्यम से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम ज्ञापन सौंपा और कहा कि जब तक उनकी वास्तविक समस्याओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक किसी भी प्रकार के डिजिटाइजेशन या ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को लागू करना अनुचित होगा। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी ने कहा कि प्राथमिक शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की समस्याएं वर्षों से शासन के पास लंबित पड़ी हैं। उन्होंने कहा कि शासन ने अब तक शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण नहीं किया, उल्टा अब ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति जैसी अव्यवहारिक व्यवस्था थोप दी है, जिसके विरोध में शिक्षक एकजुट हैं।
डॉ. त्यागी ने बताया कि शिक्षकों पर ऑनलाइन उपस्थिति लागू करने के लिए दंडात्मक कार्रवाई का भय दिखाया जा रहा है, जो कि न्यायोचित नहीं है। ‘शासन को चाहिए था कि ऐसा कोई आदेश लागू करने से पहले शिक्षक प्रतिनिधियों से वार्ता करता, परंतु ऐसा नहीं किया गया, उन्होंने कहा। उन्होंने याद दिलाया कि जुलाई माह में भी इस मुद्दे पर प्रदेशभर में बड़ा आंदोलन हुआ था, जिसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई थी। लेकिन आज तक न तो समिति का निर्णय आया और न ही शिक्षकों की समस्याओं का निस्तारण हुआ। इसके बावजूद डिजिटल उपस्थिति थोपना शिक्षकों के साथ अन्याय है, जिससे उनमें गहरा रोष है। सभा में शिक्षकों ने एक स्वर में कहा कि जब तक शिक्षकों की मूलभूत मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक डिजिटाइजेशन और नई व्यवस्थाओं पर चर्चा बेमानी है।
शिक्षकों की मुख्य मांगों में ऑनलाइन डिजिटल उपस्थिति आदेश को तत्काल निरस्त करना, गैर-शैक्षणिक कार्यों से मुक्ति, पुरानी पेंशन की बहाली, प्रधानाध्यापक पद की पुन:स्थापना, पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र पूरी करना, समान कार्य के लिए समान वेतन और सभी शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा से जोडऩा शामिल है। जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने कहा कि हम शिक्षक हैं, व्यवस्था के स्तंभ हैं, लेकिन हमारी आवाज लगातार अनसुनी की जा रही है। शासन शिक्षकों पर विश्वास जताने के बजाय उन पर निगरानी की मानसिकता से काम कर रहा है, जो निराशाजनक है। उन्होंने आगे कहा कि शिक्षक आज भी बच्चों के भविष्य के निर्माण में अपनी पूरी निष्ठा से लगे हैं, लेकिन उनके साथ भेदभावपूर्ण नीतियां अपनाई जा रही हैं।
सभा को संबोधित करते हुए वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदेश मित्तल, ब्लॉक अध्यक्ष मनोज डागर (लोनी), पुष्पेंद्र सिंह (भोजपुर), मनोज त्यागी (रजापुर), अमित यादव (मुरादनगर), धर्मेश जौहर, गुलफाम अली, प्रवीण कुमार, निशि रानी शर्मा, रियाजुद्दीन, अरविंद शर्मा, यादवेंद्र शर्मा, प्रीति शर्मा, नूतन चौहान, मीनाक्षी, अजय, रविन्द्र कुमार, और दिनेश कुमार सहित कई शिक्षक पदाधिकारियों ने अपने विचार रखे। प्रदर्शन स्थल पर शिक्षकों का जोश देखने लायक था। नारे गूंज रहे थे ‘शिक्षक एकता जिंदाबाद ‘, ‘पहले समाधान, फिर डिजिटाइजेशन ‘, ‘पुरानी पेंशन हमारी पहचान ‘। शिक्षकों ने कहा कि वे किसी भी तरह की तकनीकी व्यवस्था के विरोधी नहीं हैं, लेकिन जब तक उनकी वास्तविक समस्याएं हल नहीं होतीं, तब तक ऐसे आदेश लागू करना शिक्षा व्यवस्था को और जटिल बना देगा। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
‘हम संवाद चाहते हैं, संघर्ष नहीं। लेकिन अगर शासन ने अनसुनी जारी रखी, तो सड़क से सदन तक आवाज उठाई जाएगी, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी ने कहा। कलेक्ट्रेट परिसर में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुए इस प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में मांग की गई है कि शिक्षकों की समस्याओं का तत्काल निस्तारण किया जाए, पुरानी पेंशन लागू की जाए, और शिक्षा व्यवस्था को राजनीतिक प्रयोगशाला न बनाया जाए। कलेक्ट्रेट में गूंजते नारों और शिक्षकों की एकजुटता ने यह संदेश दिया कि अब शिक्षक अपनी आवाज दबाने नहीं देंगे। यह आंदोलन केवल डिजिटल उपस्थिति का विरोध नहीं, बल्कि सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई है।

















