-अध्यात्म और संतों के संदेश से विश्व मानवता को करुणा, मैत्री और अहिंसा का मिलेगा मार्ग : योगी आदित्यनाथ
-उत्तर प्रदेश में जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि पर योगी आदित्यनाथ का ऐतिहासिक कदम
-फाजिलपुर का नाम बदलकर भगवान महावीर के नाम पर होगा, अध्यात्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को मिलेगा नई पहचान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मुरादनगर के बसंतपुर सैंतली स्थित तरुण सागरम् तीर्थ धाम में गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भव्य गुफा मंदिर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर देशभर से श्रद्धालुओं और नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे कार्यक्रम स्थल और आसपास के क्षेत्र में भारी रौनक देखने को मिली। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उद्घाटन समारोह में कहा कि उत्तर प्रदेश जैन तीर्थों की जन्मभूमि है, जहां भगवान ऋषभदेव समेत अनेक जैन तीर्थंकरों ने जन्म लिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि अध्यात्म ही मानवता का मार्ग है और हमें ऋषि-मुनियों और संतों के संदेशों को अपनाकर समाज में करुणा, मैत्री और अहिंसा का विस्तार करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय संस्कृति सदियों से त्याग और बलिदान की महागाथाओं से समृद्ध रही है। उन्होंने पिछले कुछ वर्षों के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण और उसका भव्य पूर्णाहुति महायज्ञ इस परंपरा का नवीनतम उदाहरण है। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धर्म, अध्यात्म और सांस्कृतिक मूल्यों को बनाए रखना ही राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है।
उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने गुफा मंदिर के निर्माण की जानकारी साझा करते हुए बताया कि पंचकल्याणक महामहोत्सव के अंतर्गत मात्र 100 दिनों में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा किया गया। उन्होंने भगवान पार्श्वनाथ जी और संत तरुण सागर जी महाराज को नमन किया और अपनी नई पुस्तकें ‘मेरी बिटिया’ तथा ‘अंतर्मना दिव्य मंगल पाठ’ का विमोचन भी किया। मुख्यमंत्री ने फाजिलपुर का नाम बदलकर इसे भगवान महावीर के नाम पर करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की यह गौरवशाली भूमि जैन तीर्थंकरों की जन्मभूमि होने के साथ-साथ विश्व मानवता को करुणा, अहिंसा और मैत्री का संदेश भी देती है। उन्होंने 24 जैन तीर्थंकरों की समाज कल्याण और विश्व मानवता में योगदान को याद करते हुए कहा कि उनका मार्गदर्शन आज भी उतना ही प्रासंगिक है। इस अवसर पर प्रसन्न सागर महाराज ने भारतीय संस्कृति में संतों की भूमिका पर जोर दिया और कहा कि संत समाज के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए प्रेरणा हैं।
उन्होंने मुख्यमंत्री को कमंडल और लवंग माला भेंट की और बताया कि संतों की उपस्थिति समाज में भयमुक्त वातावरण, महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, और सामाजिक अनुशासन स्थापित करती है। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री नरेंद्र कश्यप, सांसद अतुल गर्ग, विधायक नंदकिशोर गुर्जर, अजीत पाल त्यागी, पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद तोमर, भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, तरुण सागरम् तीर्थ के अध्यक्ष सुनील जैन और संरक्षक रवि त्यागी सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जैन मुनियों की कठोर साधना, तप, अनुशासन और आत्मसंयम की उदाहरणीय जीवनशैली का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज ने 557 दिनों तक साधना की, जिसमें 496 दिनों का निर्जल उपवास शामिल है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि व्यक्ति संकल्प और अनुशासन के साथ जीवन यापन करता है तो बाहरी दुनिया में दिखाई देने वाला सब कुछ भीतर के अनुभवों का प्रतिबिंब बन जाता है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यात्मिक उन्नति, भौतिक विकास, सुरक्षित और साफ-सुथरा वातावरण ही समाज और राष्ट्र की प्रगति के लिए अनिवार्य है। उन्होंने जैन धर्म की शिक्षा और तीर्थों की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि संतों की साधना और अनुशासन केवल व्यक्तिगत जीवन के लिए नहीं बल्कि समाज और राष्ट्र निर्माण में भी प्रेरणास्त्रोत हैं। उद्घाटन कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों और श्रद्धालुओं ने कहा कि यह आयोजन न केवल जैन धर्म और तीर्थों की महत्ता को प्रदर्शित करता है, बल्कि उत्तर प्रदेश की संस्कृति, अध्यात्म और सामाजिक सुरक्षा में संतों की महत्वपूर्ण भूमिका को भी सामने लाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदर्शिता और धार्मिक व सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।
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