15 साल की प्रतीक्षा के बाद मधुबन-बापूधाम के किसानों को मिला अपना भूखंड, किसानों के चेहरे खिले

– जीडीए ने लॉटरी ड्रॉ से भूखंडों का किया वितरण
-जीडीए ने पारदर्शी तरीके से किसानों को भूखंड सौंपे, आवंटन प्रक्रिया पूरी निष्पक्ष
-पहले चरण में 372 किसानों को मिला अधिकार, शुक्रवार को शेष 277 पात्र किसानों के लिए आयोजन

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की मधुबन-बापूधाम योजना से प्रभावित किसानों के लिए गुरुवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब 15 साल के लंबित इंतजार के बाद 372 किसानों को लॉटरी ड्रॉ के माध्यम से उनके भूखंड आवंटित किए गए। इस अवसर पर किसानों के चेहरे खुशी और उत्साह से खिल उठे। लोहिया नगर स्थित हिंदी भवन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल के निर्देश पर किया गया। जीडीए के अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह की अध्यक्षता में ओएसडी कनिका कौशिक, संयुक्त सचिव श्याम अवध चौहान सहित अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम सुबह 11 बजे से प्रारंभ हुआ और किसानों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि इस चरण में कुल 372 किसानों को भूखंड आवंटित किए गए। इसमें 40 वर्गमीटर के भूखंड 162 किसानों को, 60 वर्गमीटर के भूखंड 90 किसानों को और 90 वर्गमीटर के भूखंड 120 किसानों को प्रदान किए गए। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार को शेष 277 पात्र किसानों के लिए भी लॉटरी ड्रॉ आयोजित किया जाएगा, जिसमें 150 वर्गमीटर से लेकर 2382 वर्गमीटर तक के भूखंड आवंटित किए जाएंगे। जीडीए ने वर्ष 2004 में मधुबन-बापूधाम योजना की शुरुआत छह गांव की लगभग 1,234 एकड़ भूमि पर की थी, जिसमें से 800 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया। आज का लॉटरी ड्रॉ इस योजना के तहत किसानों को उनकी अर्जित भूमि के अनुपात में 6/4 प्रतिशत विकसित आवासीय भूखंड देने के वादे का पूरा प्रमाण है।

किसानों ने इस अवसर पर जीडीए के प्रयासों की सराहना की और कहा कि लॉटरी ड्रॉ प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ सम्पन्न हुई। उपस्थिति अधिकारियों ने भी किसानों को बधाई दी और उन्हें बताया कि अब वे अपने भूखंडों की रजिस्ट्री करवा सकते हैं और नक्शा पास कराके आशियाना का निर्माण आरंभ कर सकते हैं। अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह ने बताया यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से आयोजित की गई है। अब सभी आवंटी किसान अपने भूखंडों की रजिस्ट्री करवा सकते हैं और नक्शा पास कराके आशियाना का निर्माण आरंभ कर सकते हैं। जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने इस अवसर पर कहा,  ‘यह हमारे लिए गर्व का क्षण है कि लंबे समय से प्रतीक्षित योजना के तहत किसानों को उनका अधिकार वापस मिल रहा है। हम आगे भी इस प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाए रखेंगे, ताकि हर पात्र किसान समय पर अपनी भूमि का लाभ उठा सके।