-शहर के प्रमुख निर्माण स्थलों का दौरा • निर्माण अवशेष हटाने और धूल-मुक्त शहर के लिए कड़े निर्देश
-गांधीनगर और प्रमुख मार्गों पर सौंदर्यीकरण • खाली स्थानों पर इंटरलॉकिंग और धूल-मुक्ति अभियान
-विभागीय अधिकारियों के साथ समन्वित निरीक्षण • निर्माण कार्यों में सक्रियता और तत्परता
-धूल-मुक्त और व्यवस्थित शहर की दिशा में बड़ी पहल • पांचों प्रभागों में कार्य शुरू
-नगर निगम की पहल से आने वाला भविष्य • साफ-सुथरा, सुंदर और व्यवस्थित शहर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने शनिवार को गाजियाबाद शहर का विस्तृत भ्रमण कर निर्माण विभाग द्वारा चल रहे अनेक महत्वपूर्ण कार्यों का निरीक्षण किया। जैसे ही नगर आयुक्त का काफिला विभिन्न निर्माण स्थलों पर पहुँचा, निर्माण विभाग की टीम तुरंत सक्रिय हो गई और विभिन्न स्थानों पर जमा निर्माण अवशेषों को हटाने का कार्य तेज़ कर दिया। नगर आयुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य पूर्ण होने के बाद यदि कहीं भी निर्माण अवशेष पाए जाते हैं, तो संबंधित संस्था पर तत्काल कड़ी कार्रवाई की जाएगी और भारी जुर्माना लगाया जाएगा। नगर आयुक्त ने घुमावदार मार्ग गोलचक्कर, उन्नत मार्ग, विवेकानंद नगर चौराहा, नेहरू नगर तथा कालका गढ़ी चौक पर चल रहे कार्यों का विस्तृत निरीक्षण किया। विशेष ध्यान कालका गढ़ी में निर्मित नाले पर दिया गया, जिसकी लागत लगभग तीन करोड़ बत्तीस लाख रुपये है। इस नाले की लंबाई छह सौ बानवे मीटर तथा चौड़ाई एक दशमलव अस्सी मीटर है। यह नाला शहर के वार्ड संख्या 12, 88 और 96 को सीधा लाभ देगा तथा जल निकासी और बेहतर करेगा। निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने नाले तथा सड़क के मध्य खाली स्थान देखकर वहाँ इंटरलॉकिंग टाइल लगाने के निर्देश दिए। मुख्य अभियंता निर्माण नरेंद्र कुमार चौधरी ने नगर आयुक्त को बताया कि नाले का निर्माण कार्य एक माह के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
नगर आयुक्त ने निरीक्षण के क्रम में गांधीनगर क्षेत्र का भी जायजा लिया और यहाँ बने सामग्री पुनर्चक्रण केंद्र पर छत (शेड) लगाने तथा आसपास के खाली स्थानों पर इंटरलॉकिंग लगाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही नगर आयुक्त ने शहर में चल रहे मरम्मत कार्यों की गति बढ़ाने और प्रमुख मार्गों से सटे खाली स्थानों पर तत्काल प्रभाव से इंटरलॉकिंग लगाकर उन्हें धूल-मुक्त करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थान जहाँ वाहनों की आवाजाही अधिक है, वहाँ धूल उडऩे की संभावना अधिक रहती है, इसलिए उन्हें प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्थित किया जाए। नगर आयुक्त ने संकेन्द्रीय विभाजक, हरित पट्टी और प्रमुख चौराहों पर मरम्मत एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को तेज करने के निर्देश भी दिए। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, तथा जल विभाग के महाप्रबंधक कामाख्या प्रसाद आनंद सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।
नगर आयुक्त के निर्देश मिलते ही मुख्य अभियंता ने तत्काल टीम लगाकर शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर इंटरलॉकिंग लगाने का कार्य प्रारम्भ कराया। शहर की वायु गुणवत्ता सुधार अभियान के अंतर्गत नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे महाअभियान को ध्यान में रखते हुए नगर आयुक्त ने निर्माण विभाग के कार्यों की विशेष समीक्षा की। उन्होंने कहा कि प्रमुख मार्गों के समीप खाली स्थानों पर इंटरलॉकिंग लगाने से न केवल धूल का स्तर कम होगा, बल्कि शहर की समग्र सुंदरता और साफ-सफाई में भी वृद्धि होगी। निर्माण विभाग की टीम द्वारा पाँचों प्रभागों में उन स्थानों की पहचान कर कार्य प्रारम्भ कर दिया गया है, जहाँ से धूल उडऩे की अधिक संभावना रहती है। सिटी प्रभाग के निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त के पहुँचते ही निर्माण सामग्री हटाने का कार्य तेज़ी पकड़ गया। नगर आयुक्त ने चेतावनी देते हुए कहा कि कार्य पूर्ण होने पर यदि किसी भी स्थान पर निर्माण अवशेष पाए जाते हैं, तो संबंधित संस्था पर तुरंत कार्यवाही और आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
नगर निगम का यह अभियान प्रदूषण नियंत्रण और धूल-मुक्त शहर की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रहा है। नगर आयुक्त के निर्देशों के कारण निर्माण विभाग की कार्यशैली में उल्लेखनीय सक्रियता देखने को मिली है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक का यह निरीक्षण न केवल शहर में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और गति बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह वायु गुणवत्ता सुधार, शहर की सौंदर्यीकरण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति नगर निगम की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। आने वाले दिनों में इन उपायों के परिणामस्वरूप गाजियाबाद के नागरिकों को एक साफ, धूल-मुक्त और व्यवस्थित शहर का लाभ मिलेगा।















