मिशन शक्ति 5.0: डर को हराने और अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए खुद मैदान में उतरीं, नगर जोन में महिला सुरक्षा को मिली नई धार
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मिशन शक्ति 5.0 केवल एक सरकारी अभियान भर नहीं, बल्कि महिलाओं के मन से भय निकालकर उनमें आत्मविश्वास और सुरक्षा का भरोसा भरने की एक सशक्त पहल बनता जा रहा है। इस अभियान को नगर जोन पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद में जमीनी स्तर पर प्रभावी बनाने का जिम्मा जिस अधिकारी ने अपने कंधों पर लिया है, वे हैं सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम उपासना पांडेय। उनकी कार्यशैली ने मिशन शक्ति को कागजों से निकालकर सड़कों, बाजारों, स्कूलों और कॉलेजों तक पहुंचा दिया है। एसीपी उपासना पांडेय का मानना है कि महिला सुरक्षा केवल थानों की चारदीवारी में बैठकर सुनिश्चित नहीं की जा सकती। इसके लिए पुलिस को महिलाओं के बीच जाना होगा, उनकी बात सुननी होगी और उन्हें यह विश्वास दिलाना होगा कि कानून उनके साथ है। इसी सोच के साथ वह खुद सड़कों पर उतरकर महिलाओं और बालिकाओं को जागरूक कर रही हैं। चाहे शैक्षणिक संस्थान हों, बाजार हों या भीड़भाड़ वाले इलाके, एसीपी उपासना पांडेय हर जगह मिशन शक्ति का संदेश लेकर पहुंच रही हैं।
रविवार को इसी क्रम में सहायक पुलिस आयुक्त नंदग्राम उपासना पांडेय ने नंदग्राम थाना प्रभारी उमेश कुमार, महिला थाना प्रभारी, मिशन शक्ति टीम, एंटी रोमियो स्क्वॉड थाना सिहानी गेट तथा नगर जोन की महिला पुलिस बल के साथ थाना सिहानी गेट क्षेत्र में पैदल गश्त की। इस दौरान महिलाओं को उनकी सुरक्षा से जुड़े अधिकारों, हेल्पलाइन नंबरों और पुलिस की कार्यप्रणाली की जानकारी दी गई। गश्त के दौरान एसीपी ने महिलाओं से सीधे संवाद किया और उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना। एसीपी उपासना पांडेय ने महिलाओं को बताया कि किसी भी तरह की छेड़छाड़, उत्पीड़न या हिंसा को सहना मजबूरी नहीं है। उन्होंने महिलाओं को 112, 1090, 1091 जैसे हेल्पलाइन नंबरों के उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी और कहा कि एक कॉल पर पुलिस तुरंत मदद के लिए पहुंचेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि शिकायत करने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उनकी इस पैदल गश्त का असर यह रहा कि महिलाएं खुलकर अपनी बात रखने लगीं। कई महिलाओं ने पहली बार पुलिस अधिकारियों से सीधे संवाद किया और अपनी समस्याएं साझा कीं। एसीपी उपासना पांडेय ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए ताकि शिकायतों का त्वरित समाधान किया जा सके। यह कार्यशैली महिलाओं के बीच पुलिस के प्रति भरोसे को और मजबूत करती नजर आई। उपासना पांडेय की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वे मिशन शक्ति को केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बनने देतीं। वे इसे सामाजिक बदलाव का माध्यम मानती हैं। स्कूलों और कॉलेजों में जाकर वह छात्राओं को आत्मरक्षा, साइबर अपराध से बचाव और कानूनी अधिकारों की जानकारी देती हैं।
बाजारों में दुकानदारों और आम लोगों को भी यह समझाया जाता है कि महिला सुरक्षा समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। नगर जोन में महिला सुरक्षा को लेकर उनकी सक्रियता का सकारात्मक असर दिखने लगा है। एंटी रोमियो स्क्वॉड की सक्रियता बढ़ी है, सार्वजनिक स्थानों पर निगरानी सख्त हुई है और महिलाओं में शिकायत दर्ज कराने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मिशन शक्ति के तहत मिल रही सूचनाओं से कई संभावित घटनाओं को समय रहते रोका गया है।
एसीपी उपासना पांडेय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि महिला सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जो भी महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करेगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं, बल्कि सुरक्षा का एहसास कराना है। मिशन शक्ति 5.0 के तहत एसीपी उपासना पांडेय की यह पहल यह साबित कर रही है कि जब पुलिस संवेदनशीलता, दृढ़ इच्छाशक्ति और मानवीय दृष्टिकोण के साथ काम करती है, तो समाज में सकारात्मक बदलाव संभव है। नगर जोन में उनकी कार्यशैली महिलाओं के लिए न सिर्फ सुरक्षा की गारंटी बन रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर और निर्भीक बनने की प्रेरणा भी दे रही है।

















