-महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के स्थान पर नया अधिनियम, कौशल, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता पर केंद्रित
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। कृषि पर आधारित भारतीय अर्थव्यवस्था में ग्रामीण रोजगार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल राहत आधारित योजनाएँ न तो स्थायित्व ला सकती हैं और न ही दीर्घकालिक उत्पादकता सुनिश्चित कर सकती हैं। इसी सोच के साथ केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के स्थान पर विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण अधिनियम 2025 (विकसित भारत-जी राम जी) को लागू कर ग्रामीण रोजगार को एक नई और मजबूत दिशा दी है। यह बातें शुक्रवार को प्रदेश समाज कल्याण मंत्री एवं गाजियाबाद के जिला प्रभारी मंत्री असीम अरुण ने लोक निर्माण विभाग के अतिथि गृह, पटेल नगर (नया बस अड्डा के निकट) में भारतीय जनता पार्टी जिला एवं महानगर द्वारा आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कहीं। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना एक राहत आधारित मॉडल बनकर रह गई थी, जो भ्रष्टाचार, फर्जी रोजगार कार्ड, कमजोर निगरानी व्यवस्था और अल्पकालिक परिसंपत्तियों जैसी समस्याओं से ग्रस्त थी। इसके विपरीत विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम ग्रामीण रोजगार को कौशल विकास, स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और स्थानीय उद्यमिता से जोड़ते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करेगा।
उन्होंने बताया कि नए अधिनियम के अंतर्गत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को 125 दिन के रोजगार की गारंटी दी गई है, जबकि वन क्षेत्रों में कार्यरत अनुसूचित जनजाति के श्रमिकों को 25 दिन का अतिरिक्त रोजगार मिलेगा। मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाएगा तथा उपग्रह आधारित स्थान निर्धारण प्रणाली एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित निगरानी व्यवस्था से पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी। मंत्री असीम अरुण ने कहा कि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम राहत केंद्रित सोच से आगे बढ़कर उत्पादकता, परिवर्तन और आत्मनिर्भरता पर आधारित है। इसे जन-जन तक पहुँचाने के लिए भारतीय जनता पार्टी द्वारा चरणबद्ध जनसंपर्क और संगठनात्मक कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि 8 जनवरी से 28 फरवरी 2026 तक एक व्यापक अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत प्रदेश और जिला स्तर पर प्रेस वार्ताएँ, कार्यशालाएँ, जिला, मंडल और बूथ स्तर पर सम्मेलन, किसान एवं श्रमिक चौपालें आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही 15 फरवरी से 28 फरवरी तक विशेष जनसंपर्क अभियान, लेख, स्तंभ, ब्लॉग, दीवार लेखन और होर्डिंग के माध्यम से जनजागरण किया जाएगा।
पार्टी नेतृत्व, जनप्रतिनिधियों और प्रभावशाली व्यक्तियों के माध्यम से सामाजिक माध्यमों पर भी सशक्त अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले की योजना में लगभग पूर्ण केंद्रीय वित्तपोषण के कारण राज्यों की जवाबदेही कमजोर थी, जबकि विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 के अनुपात में सहभागिता होने से उत्तरदायित्व और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी। डिजिटल उपस्थिति, वास्तविक समय आंकड़ा निगरानी और अनिवार्य सामाजिक लेखा परीक्षा के माध्यम से भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। यह अधिनियम ग्राम पंचायतों को राष्ट्रीय अवसंरचना प्राथमिकताओं से जोड़ते हुए स्थानीय स्तर की योजनाओं को बढ़ावा देगा। प्रेस वार्ता में विकसित भारत-जी राम जी अधिनियम को ग्रामीण रोजगार नीति में एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी सुधार बताते हुए इसे ‘एक नाम-सर्व समाधान’ की संज्ञा दी गई।
प्रेस वार्ता के अंत में भाजपा महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल एवं जिलाध्यक्ष चैन पाल सिंह ने संयुक्त रूप से उपस्थित सभी मंत्रीगण, विधायकगण और कार्यक्रम को जन-जन तक पहुँचाने वाले पत्रकार बंधुओं के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर महानगर अध्यक्ष मयंक गोयल, जिलाध्यक्ष चैन पाल सिंह, विधायक अजीत पाल त्यागी, विधायक मंजू शिवाच, विधायक नंद किशोर गुर्जर, विधायक दिनेश गोयल, पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी, मीडिया प्रभारी प्रदीप चौधरी, अभियान संयोजक रनीता सिंह, सह संयोजक गुंजन शर्मा, पंकज भारद्वाज, वेदप्रकाश जाटव, महामंत्री सुशील गौतम, महामंत्री राजेश त्यागी, करण शर्मा, आकाश गौतम सहित अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
















