-हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा से संपन्न है, संस्कृति उत्सव इसे करता है जीवंत: नरेन्द्र कश्यप
-दृष्टिहीन, मूक-बधिर और दिव्यांग कलाकारों ने भी अपने शानदार प्रदर्शन से सभी को किया मंत्रमुग्ध
-गायन, नृत्य और वादन प्रतियोगिताओं में विजेताओं ने जनपद का मान बढ़ाया, 24 जनवरी उत्तर प्रदेश दिवस पर होगा भव्य आयोजन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश पर्व-हमारी संस्कृति, हमारी पहचान-की भावना को साकार करते हुए जिला प्रशासन एवं जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद द्वारा शनिवार को हिंदी भवन, लोहिया नगर में ‘संस्कृति उत्सव-2026’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि नरेन्द्र कश्यप, मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल, परियोजना निदेशक प्रदीप पांडेय, जिला विकास अधिकारी प्रज्ञा श्रीवास्तव, बीएसए ओ.पी. यादव सहित अन्य गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। आयोजन समिति की ओर से अतिथियों का पुष्पगुच्छ, पौधा एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया गया। स्वागत संबोधन में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव गोपाल ने कहा कि हमारी परंपरागत सांस्कृतिक विधाओं को जीवंत बनाए रखने के लिए संस्कृति उत्सव एक सशक्त मंच है। उन्होंने बताया कि इस उत्सव का आयोजन ग्राम पंचायत और ब्लॉक स्तर से प्रारंभ होकर जनपद की तीनों तहसीलों-सदर, लोनी और मोदीनगर में किया गया, जहां से चयनित विजेता कलाकारों ने जनपद स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
गायन, वादन और नृत्य की विभिन्न विधाओं में लोक संस्कृति, सुगम संगीत, शास्त्रीय एवं उपशास्त्रीय कला का सुंदर समावेश देखने को मिला, जो आगे मंडल स्तरीय प्रतियोगिताओं में जनपद का प्रतिनिधित्व करेगा।
मुख्य अतिथि श्री नरेन्द्र कश्यप ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि भारत और उत्तर प्रदेश अपनी समृद्ध संस्कृति को साथ लेकर विकास की दिशा में निरंतर अग्रसर हैं। जिला प्रशासन एवं विभिन्न विभागों द्वारा आयोजित ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम यह प्रमाणित करते हैं कि देश, प्रदेश और जनपद ही नहीं, बल्कि प्रत्येक तहसील स्तर पर भी प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हर बच्चा किसी न किसी प्रतिभा से संपन्न होता है और इस मंच पर प्रस्तुत कार्यक्रमों ने इस तथ्य को सजीव कर दिया है।
राज्य मंत्री ने विशेष रूप से यह उल्लेख किया कि कार्यक्रम में केवल सामान्य बच्चों ने ही नहीं, बल्कि दृष्टिहीन, मूक-बधिर एवं अन्य दिव्यांगजन कलाकारों ने भी देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत होकर अपनी अद्भुत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, जो अत्यंत प्रेरणादायी है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रस्तुतियों की गुणवत्ता देखकर वे भाव-विभोर हो गए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि 24 जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर गाजियाबाद जनपद एक और भव्य व यादगार सांस्कृतिक आयोजन प्रस्तुत करेगा। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न प्रतियोगिताओं में कलाकारों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सामूहिक लोकनृत्य में कंपोजिट विद्यालय गढ़ी कटैया, लोनी ने प्रथम तथा पीबीएएस इंटर कॉलेज, मोदीनगर ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। शास्त्रीय समूह नृत्य में अयाना ग्रुप प्रथम और जैन मती इंटर कॉलेज द्वितीय स्थान पर रहा। एकल नृत्य में उर्वशी प्रथम एवं सौम्या द्वितीय रहीं, जबकि युवा एकल नृत्य में उज्ज्वल ने प्रथम स्थान हासिल किया। एकल लोकनृत्य में शांतनु ने प्रथम स्थान प्राप्त किया।
शास्त्रीय एकल गायन (युवा वर्ग) में रोहन विजेता रहे। सुगम संगीत एकल (किशोर) में मुक्ता प्रथम और ईहा द्वितीय रहीं, जबकि एकल लोक गायन (किशोर) में खनक ने प्रथम और अर्पण ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। लोक गायन समूह गान में जेएलएम इंटर कॉलेज, मुरादनगर प्रथम तथा पीबीएस द्वितीय स्थान पर रहा। सुगम संगीत सामूहिक गायन में डायमंड इंटर कॉलेज, टीला शाहबाजपुर प्रथम और एसएस इंटरनेशनल द्वितीय रहा। वाद्य यंत्र प्रतियोगिता में गायत्री प्रथम और राधिका द्वितीय रहीं। युवा वर्ग के स्वर वाद्य में सुहानी प्रथम तथा किशोर वर्ग में आयुष्मान प्रथम और अंश द्वितीय स्थान पर रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में माध्यमिक शिक्षा विभाग से जूनियर हाई स्कूल कुशलिया की प्रधानाचार्य, बेसिक शिक्षा विभाग की एसआरजी पूनम शर्मा का विशेष योगदान रहा।
तीनों तहसीलों की नोडल प्रधानाचार्य रुचि शर्मा, निधि शर्मा एवं अनुराधा गॉड ने कार्यक्रम का सफल संयोजन किया। आयोजन में आलोक कुमार की विशेष भूमिका रही। निर्णायक मंडल में डॉ. ज्योति शर्मा, दामिनी भार्गव, डॉ. महेश व्हाइट, डॉ. मुक्त वार्ष्णेय, दामिनी गुप्ता एवं कुमारी हेमलता शामिल रहीं। मंच संचालन पूनम शर्मा द्वारा प्रभावी ढंग से किया गया। समापन अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने कहा कि ‘संस्कृति उत्सव-2026’ न केवल कला और प्रतिभा का उत्सव है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोडऩे और समाज को सकारात्मक दिशा देने का सशक्त माध्यम भी है।

















