-यूजीसी/यूजीसीएसए अधिसूचना पर सवाल: सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकार और करियर पर संकट
-संघर्ष समाज और आत्मसम्मान के लिए: न कि किसी पार्टी के लिए तरुण मिश्र का साफ संदेश
-आरक्षण और समानता पर कटाक्ष: यदि समानता चाहिए तो सभी प्रकार के आरक्षण पूरी तरह किए जाए समाप्त
उदय भूमि संवाददाता
सतना। केंद्रीय सरकार की नई शिक्षा नीति और यूजीसी एक्ट 2026 की अधिसूचना के प्रकाश में आम स्वर्ण समाज के छात्र-छात्राओं को भविष्य में होने वाले दिक्कतों पर जनसेवक तरुण मिश्र चिंता जताई। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम सामान्य वर्ग के छात्रों के अधिकारों और करियर के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकता है। तरुण मिश्र ने कहा कि देश में बहुसंख्यक अग्री जातियों के लोगों की स्थिति इस प्रकार होती जा रही है कि वे भविष्य में अल्पसंख्यक बन जाएंगे, यदि ऐसा होता है तो भविष्य में क्या उन्हें किसी प्रकार का आरक्षण मिलेगा? उन्होंने स्पष्ट कहा कि समानता लाना ही है तो आरक्षण को पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिए। उनका कहना था कि आर्थिक आधार पर कर और योग्यता के आधार पर नौकरी मिलने से ही वास्तविक समानता स्थापित होगी। यूजीसी/यूजीसीएसए जैसे कानूनों के दुरुपयोग से सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के खिलाफ झूठी शिकायतें बढ़ सकती हैं, जिससे उनके शैक्षणिक करियर में बाधा आएगी। इसके अलावा शिक्षण संस्थानों में भेदभाव और मानसिक उत्पीडऩ की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
तरुण मिश्र ने इस अधिनियम को ‘सामाजिक समरसता के बजाय द्वेष की भावना बढ़ाने वाला’ बताया और तत्काल प्रभाव से इसे समाप्त करने की मांग की। उन्होंने कहा आज पूरे स्वर्ण समाज के मन में यह सवाल गूंज रहा है कि बड़े नेताओं की मौनता क्यों है? केंद्रीय मंत्री हों या अन्य बड़े पदों पर बैठे चेहरे, सभी समाज और आने वाली पीढ़ी के सवालों पर मौन साधे हुए हैं। मैं किसी पार्टी का विरोध नहीं कर रहा, बल्कि अपने समाज, अपने बच्चों और अपने आत्मसम्मान के लिए संघर्ष कर रहा हूँ। यह लड़ाई अधिकार, भविष्य और आत्मसम्मान की है। जनसेवक तरुण मिश्र ने कहा कि यदि सरकार यूजीसी एक्ट 2026 में न्यायपूर्ण संशोधन नहीं करती, तो आम समाज के छात्रों के शैक्षणिक अवसर गंभीर रूप से प्रभावित होंगे। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अधिनियम की गलत व्याख्या से छात्रों में असुरक्षा और भय की भावना बढ़ेगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं है, बल्कि यह समाज और आने वाली पीढिय़ों के भविष्य की रक्षा के लिए है। उन्होंने सरकार से अनुरोध किया कि सामान्य वर्ग के हितों की रक्षा के लिए यूजीसी रेगुलेशन एक्ट 2026 को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए ताकि शिक्षा क्षेत्र में न्याय और समानता बनी रहे। तरुण मिश्र के इस आंदोलन ने स्वर्ण समाज और आम नागरिकों में व्यापक चर्चा और जागरूकता पैदा की है। उनका संदेश है कि समाज के नेता और नागरिक मिलकर केवल अपने अधिकारों के लिए ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों के उज्ज्वल भविष्य के लिए भी सतत संघर्ष करें।
















