-अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के नेतृत्व में कलेक्ट्रेट तक निकाला गया जुलूस
-2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी लागू करने के फैसले से बढ़ी चिंता
-प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अधिनियम में संशोधन की मांग
-मांगें न मानी गईं तो राजधानी लखनऊ में बड़े आंदोलन की चेतावनी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के विरोध में सोमवार को गाजियाबाद में शिक्षकों का बड़ा शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के नेतृत्व में जिले भर से आए हजारों शिक्षकों ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्र होकर शांतिपूर्ण जुलूस निकाला और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा। इस दौरान शिक्षकों ने सरकार से अधिनियम में संशोधन कर लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों को राहत प्रदान करने की मांग की। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णय के बाद देशभर के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के बीच असमंजस और चिंता का माहौल बना हुआ है। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि सभी सेवारत शिक्षकों के लिए सेवा में बने रहने और पदोन्नति प्राप्त करने हेतु शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। विशेष रूप से 23 अगस्त 2010 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों पर भी यह अनिवार्यता लागू किए जाने को लेकर शिक्षक संगठनों में नाराजगी देखी जा रही है। शिक्षकों का कहना है कि नियुक्ति के समय ऐसी कोई शर्त लागू नहीं थी, इसलिए अब वर्षों बाद नियम बदलना उनके साथ अन्याय है।
इसी मुद्दे को लेकर देशभर के 12 शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ का गठन किया है। महासंघ के महासचिव डॉ. अनुज त्यागी ने कहा कि हजारों शिक्षक पिछले कई वर्षों से ईमानदारी और समर्पण के साथ शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे शिक्षकों पर अचानक नई परीक्षा की अनिवार्यता थोपना न केवल अनुचित है बल्कि उनके मनोबल को भी प्रभावित करता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि शिक्षकों के अनुभव, सेवा अवधि और वास्तविक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए नियमों में आवश्यक संशोधन किया जाए। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने बताया कि गाजियाबाद जिले के विभिन्न ब्लॉकों से बड़ी संख्या में शिक्षक जुलूस में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी टकराव के लिए नहीं बल्कि न्यायपूर्ण समाधान के लिए किया जा रहा है।
शिक्षकों ने शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाई, जिससे यह स्पष्ट संदेश दिया जा सके कि शिक्षक अपने अधिकारों को लेकर गंभीर हैं। पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष दर्शन बंसल ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता से हजारों अनुभवी शिक्षकों का भविष्य असमंजस में पड़ गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था का आधार अनुभव और व्यवहारिक ज्ञान होता है, जिसे केवल एक परीक्षा के आधार पर नहीं आंका जा सकता। जुलूस का मुख्य उद्देश्य सरकार का ध्यान शिक्षकों के साथ हो रहे कथित अन्याय की ओर आकर्षित करना था। अटेवा के जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा ने आंदोलन को व्यापक बताते हुए कहा कि यदि सरकार ने समय रहते शिक्षकों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षक शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन मांगें पूरी न होने पर प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के जिलाध्यक्ष अनुराग यादव ने चेतावनी दी कि शिक्षकों की समस्याओं का समाधान नहीं होने पर अगला चरण राजधानी लखनऊ में आयोजित किया जाएगा, जहां प्रदेशभर के शिक्षक एकजुट होकर प्रदर्शन करेंगे। प्रदर्शन के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष अमित यादव, पुष्पेंद्र सिंह, मनोज डागर, मनोज त्यागी, पवन कौशिक, अवधेश, ललित टांक, सदाकत अली, देवांकुर, ब्रजपाल सिंह, प्रवीन कुमार, देवेंद्र कुमार, इमराना सिद्दीकी, प्रदीप चौहान, परमानंद पाठक और लव वर्मा, राम शेष वर्मा जिला महामंत्री अटेवा, अमित कुमार त्यागी वरिष्ठ उपाध्यक्ष अटेवा, पारस गोस्वामी ब्लॉक अध्यक्ष लोनी, प्रणोद बंसल वरिष्ठ सलाहकार, मीनू शर्मा जिला महामंत्री, आरती वर्मा जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ, मोहमद अब्बास,हिमांशु गुप्ता,कल्पना पाण्डेय, संजय चौधरी ब्लॉक अध्यक्ष मुरादनगर,मनोज रूहेला जिला प्रवक्ता, राजपाल यादव ब्लॉक अध्यक्ष भोजपुर, तरुण कुमार महामंत्री महानगर, प्रदीप चौहान ज़िला कोषाध्यक्ष अटेवा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक उपस्थित रहे। सभी शिक्षकों ने एक स्वर में अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया। ज्ञापन सौंपने के बाद शिक्षकों ने कहा कि उनका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को प्रभावित करना नहीं बल्कि अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार शिक्षकों की भावनाओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेगी, ताकि शिक्षा व्यवस्था में स्थिरता बनी रहे और अनुभवी शिक्षकों का भविष्य सुरक्षित हो सके।

















