मिडिल ईस्ट संकट की मार से सुस्त पड़ा प्रॉपर्टी बाजार, रियल एस्टेट को राहत पैकेज की मांग तेज

-व्यापारी एकता समिति ने सरकार से टैक्स रियायत और ब्याज दरों में राहत की उठाई मांग
-टॉप 7 शहरों में घरों की कीमतों में महज 2% वृद्धि, निवेशकों की सतर्कता बढ़ी
-वैश्विक अनिश्चितता और बाजार की अस्थिरता का असर भारत के रियल एस्टेट सेक्टर पर स्पष्ट

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली/गाजियाबाद। पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत के रियल एस्टेट बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता और निवेशकों की सतर्कता के चलते देश के प्रमुख महानगरों में प्रॉपर्टी की कीमतों में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हो पा रही है। एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से मार्च 2026 की तिमाही में दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु समेत देश के टॉप सात शहरों में आवासीय संपत्तियों की कीमतों में औसतन केवल दो प्रतिशत की मामूली वृद्धि दर्ज की गई है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव और आर्थिक अस्थिरता के कारण निवेशकों का रुख सतर्क हो गया है। जब तक बाजार में स्थिरता और आय को लेकर भरोसा कायम नहीं होगा, तब तक बड़े निवेश फैसलों में तेजी आना मुश्किल है। रियल एस्टेट सेक्टर, जो पहले से ही निर्माण लागत, ब्याज दरों और नियामकीय प्रक्रियाओं जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है, अब वैश्विक संकट के दबाव को भी महसूस कर रहा है।

व्यापारी एकता समिति संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने इस स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का सीधा असर निवेश माहौल पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है और इससे लाखों लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है। यदि इस क्षेत्र में सुस्ती आती है तो इसका प्रभाव सीमेंट, स्टील, परिवहन, बैंकिंग और अन्य सहायक उद्योगों पर भी पड़ता है।
प्रदीप गुप्ता ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में सरकार को रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देने के लिए ठोस और त्वरित कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि होम लोन की ब्याज दरों में राहत, स्टांप ड्यूटी में अस्थायी कटौती, जीएसटी में रियायत और निर्माण सामग्री पर टैक्स में कमी जैसे कदम बाजार में नई ऊर्जा भर सकते हैं। उनके अनुसार यदि सरकार समय रहते हस्तक्षेप करती है तो निवेशकों का विश्वास बहाल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि जब लोग अपनी आय और रोजगार को लेकर आश्वस्त होते हैं, तभी वे घर खरीदने जैसे बड़े फैसले लेते हैं। लेकिन वैश्विक संकट और बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण आम उपभोक्ता फिलहाल इंतजार की नीति अपना रहे हैं। इससे डिमांड में सुस्ती आ रही है और प्रोजेक्ट्स की बिक्री प्रभावित हो रही है। प्रदीप गुप्ता ने सरकार से आग्रह किया कि रियल एस्टेट सेक्टर को विशेष पैकेज के तहत प्रोत्साहन दिया जाए, ताकि निर्माण गतिविधियां तेज हों और रोजगार के अवसर बढ़ें। उन्होंने कहा कि यदि यह क्षेत्र मजबूत रहेगा तो अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर उद्योग जगत के साथ संवाद स्थापित करेंगी और मौजूदा चुनौतियों से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान निकालेंगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सामान्य होते हैं और घरेलू स्तर पर नीतिगत समर्थन मिलता है, तो रियल एस्टेट सेक्टर फिर से गति पकड़ सकता है। फिलहाल बाजार की नजर सरकार के आगामी कदमों और वैश्विक परिस्थितियों के स्थिर होने पर टिकी है।