लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं। चुनाव परिणाम जल्द सामने आ जाएंगे। मतदाताओं का प्यार और साथ किसे मिलेगा, इसे लेकर अभी से हलचल तेज हो चुकी है। एग्जिट पोल्स के सर्वे ने जहां भाजपा को खुश होने का मौका दिया है, वहीं टीएमसी की टेंशन बढ़ा दी है। चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कांटे का मुकाबला रहा। चुनाव में बंपर वोटिंग के क्या मायने हैं, इस पर बहस शुरू हो गई है। बंपर वोटिंग का लाभ किसे मिलेगा, यह देखना दिलचस्प होगा। वैसे पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भाजपा के लिए करो या मरो की स्थिति है। बंगाल में बुधवार को वोटिंग खत्म होने के साथ ही सबकी नजरें अब 4 मई यानि सोमवार पर है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चौथी बार मुख्यमंत्री बनकर क्या नया कीर्तिमान स्थापित करेंगी या भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आकर सबको चौंका देगी? दोनों दलों ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव में जमकर पसीना बहाया है। भाजपा के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का मुद्दा बन गया है। भाजपा को इस बात का बखूबी अहसास है कि यदि इस बार पार्टी बंगाल में सत्ता में आने से चूक गई तो पार्टी के लिए राज्य में संगठन और कैडर तक बचाना मुश्किल हो जाएगा।
इसके मद्देनजर पीएम मोदी के नेतृत्व में एक तरफ जहां भाजपा महिला आरक्षण से जुड़े बिल के लोकसभा में पास नहीं होने का ठीकरा ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर फोड़ती रही है, वहीं टीएमसी अपने महिला सांसदों की संख्या और महिला मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का जिक्र कर भाजपा को ही महिला विरोधी साबित करने की कोशिश में जुटी रही। इसके अलावा महिलाओं के लिए भाजपा ने अपने घोषणापत्र में सौगातों की बौछार की। जिसके जवाब में ममता ने पहले से संचालित लक्ष्मी भंडार योजना की राशि बढ़ाने का वायदा किया है। महिला मतदाताओं के साथ ही राज्य में मुस्लिम मतदाता भी ममता बनर्जी की जीत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। राज्य की सवा सौ सीटों पर मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका में है और इसमें से ज्यादातर सीटों पर टीएमसी का कब्जा है। टीएमसी का आरोप है कि एसआईआर के नाम पर मुस्लिम मतदाताओं के ही नाम काटे गए। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम और हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी ने भी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाने की कोशिश की है। महिला और मुस्लिम मतदाताओं के साथ ही ब्रांड मोदी और ममता भी राज्य के जनादेश को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
जिस प्रकार से पीएम मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संदेश के जरिए ममता बनर्जी को महिला विरोधी बताकर मोर्चा खोला, उससे साफ-साफ नजर आ रहा है कि इस देश के कई राज्यों में संपन्न विधानसभा चुनाव की तर्ज पर ही बंगाल में भी भाजपा ने ‘ब्रांड मोदी’ के नाम पर ही चुनाव लड़ा। जबकि टीएमसी पिछले तीन विधानसभा चुनावों की तरह ही इस बार भी ‘ब्रांड ममता बनर्जी’ पर ही निर्भर है। पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य, घमासान और चुनावी बयानबाजी से यह साफ-साफ दिखाई दे रहा है कि इस राज्य का विधानसभा चुनाव पीएम मोदी बनाम सीएम ममता बनर्जी का चुनाव बन गया। कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट, दूर-दूर तक मुकाबले में कहीं नजर नहीं आए। हालांकि इस बात को भूलना नहीं चाहिए कि चुनावी राजनीति में जनता कभी-कभी अप्रत्याशित चमत्कार भी कर देती है। उधर, भाजपा को महिला सुरक्षा को बड़ा मुद्दा बनाने में ममता बनर्जी के एक बयान से भी मदद मिली, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को शाम सात बजे के बाद बाहर नहीं निकलना चाहिए।
भाजपा ने महिला सुरक्षा के मुद्दे पर आरजी कर की पीड़िता की मां मंजू देवनाथ को पनियाहाटा से उम्मीदवार बनाकर एक तरह से राज्य की महिलाओं को संदेश दे दिया, संदेश यह कि वह उनकी सुरक्षा के लिए संजीदा है। भाजपा ने महिलाओं को लुभाने के लिए दुर्गा सुरक्षा दस्ते बनाने और नौकरियों में महिलाओं को तैतीस फीसद आरक्षण देने का भी वादा किया। इसके अलावा महिलाओं को मध्य प्रदेश, हरियाणा और महाराष्ट्र की तरह प्रतिमाह तीन हजार रुपए देने का वादा किया है। ममता बनर्जी ने पिछली बार बंगाली माटी और मानुष यानी स्थानीय को मुद्दा बनाया था। उन्हें इस मुद्दे से पिछली बार मदद भी मिली। इस बार भी ममता विपक्ष यानी भाजपा के नेताओं के बाहरी होने का आरोप लगाती रहीं। इसके जवाब स्वरूप अमित शाह ने ऐलान किया कि यदि पश्चिम बंगाल में पार्टी सत्ता में आई तो राज्य का मुख्यमंत्री ‘धरती का बेटा’ यानी स्थानीय व्यक्ति ही बनेगा।
पार्टी ने इस बार घुसपैठ को भी बड़ा मुद्दा बनाया। राज्य में विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान नब्बे लाख वोटरों के नाम हटाने को लेकर ना सिर्फ सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस बल्कि समूचा गैर भाजपा दल मुद्दा बनाता रहा। हालांकि अमित शाह ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर के कदम को सही बताया। भाजपा यहीं नहीं रुकी, उसने वादा किया है कि अगर वह सत्ता में आई तो राज्य से अवैध घुसपैठियों की पहचान करेगी और उन्हें बाहर करेगी। इसके साथ पार्टी ने कहा कि सत्ता में आने के डेढ़ माह के अंदर सीमा पर बाड़ लगाने के लिए केंद्र सरकार को जमीन दी जाएगी। भाजपा ने इसके जरिए बांग्लादेश की ओर हो रही पशु तस्करी को रोकने का भी ऐलान किया है।

















