– कमाऊपूत जिले की सुरक्षा का जिम्मा, आबकारी विभाग बना मजबूत कप्तान
– कप्तान सुबोध कुमार श्रीवास्तव की रणनीति से 6266 करोड़ का राजस्व रिकॉर्ड
– सात इंस्पेक्टरों की टीम खेल रही ‘एक्शन का टी-20’, रोज गिर रहे तस्करों के विकेट
लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। कभी शराब माफियाओं के लिए आसान रास्ता माना जाने वाला गौतमबुद्ध नगर आज उनके लिए सबसे कठिन मैदान बन गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह है आबकारी विभाग की टी-20 क्रिकेट जैसी तेज, आक्रामक और रणनीतिक कार्यशैली। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि गौतमबुद्ध नगर जनपद प्रदेश का महत्वपूर्ण और संवेदनशील जिला होने के कारण अवैध शराब की बिक्री और तस्करी पर पूरी सख्ती के साथ कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग की टीमें लगातार छापेमारी, औचक निरीक्षण, वाहन चेकिंग एवं मुखबिर तंत्र के माध्यम से अवैध कारोबार पर निगरानी बनाए हुए हैं।
उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता सरकार के राजस्व की सुरक्षा के साथ-साथ जनपद में सुरक्षित माहौल बनाए रखना है। किसी भी स्थिति में अवैध शराब की बिक्री या तस्करी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी आबकारी निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं और लाइसेंसी शराब दुकानों की भी लगातार जांच की जा रही है। जिला आबकारी अधिकारी ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों, हाईवे और संवेदनशील स्थानों पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। आम जनता से भी अपील की गई है कि यदि कहीं अवैध शराब की बिक्री या भंडारण की सूचना मिले तो तत्काल विभाग को जानकारी दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि आबकारी विभाग आगे भी इसी तरह सख्त अभियान चलाकर जनपद को अवैध शराब मुक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा।
यदि जिले में आबकारी विभाग की कार्यवाही को क्रिकेट से जोड़ा जाए तो यह पूरा सिस्टम एक हाई-वोल्टेज टी-20 मैच जैसा नजर आता है। जहां कप्तान की भूमिका जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव निभा रहे हैं। करीब ढाई वर्षों पहले जिले की कमान संभालने वाले सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने विभाग को सिर्फ कार्रवाई करने वाली इकाई नहीं बल्कि परिणाम देने वाली टीम में बदल दिया। उनकी रणनीति स्पष्ट रही अवैध शराब पर सख्ती, लाइसेंसी दुकानों की निगरानी, राजस्व वृद्धि-जनता को सुरक्षित माहौल हैं। इस रणनीति का परिणाम यह रहा कि पिछले ढाई वर्षों में जिले ने प्रदेश सरकार को लगभग 6266 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व दिया। शराब बिक्री, बार लाइसेंस और व्यवस्थित नियंत्रण प्रणाली ने गौतमबुद्ध नगर को प्रदेश का सबसे कमाऊ जिला बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
सात इंस्पेक्टरों की टीम: मैदान पर उतरती ‘आबकारी सेवन’
किसी भी मैच में कप्तान अकेला जीत नहीं दिलाता, जीत पूरी टीम दिलाती है। यही तस्वीर गौतमबुद्ध नगर आबकारी विभाग में देखने को मिलती है। जिले में तैनात सात आबकारी निरीक्षक मानो टी-20 टीम के स्पेशलिस्ट खिलाड़ी हैं-आशीष पाण्डेय, अखिलेश बिहारी वर्मा, सचिन त्रिपाठी, अभिनव शाही, नामवर सिंह, संजय चन्द्र, डॉ. शिखा ठाकुर इन अधिकारियों की टीम दिन-रात अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय रहती है। कोई तेज गेंदबाज की तरह अचानक दबिश देता है, कोई स्पिनर की तरह मुखबिर तंत्र से जाल बिछाता है और कोई फील्डर की तरह हाईवे व सीमाओं पर निगरानी करता है। महिला अधिकारी डॉ. शिखा ठाकुर की सक्रिय भूमिका भी विभाग में नई मिसाल बन चुकी है। उनकी भागीदारी ने टीम को और मजबूत बनाया है।
हर दिन गिर रही तस्करों की विकेट
आबकारी विभाग की कार्रवाई बिल्कुल टी-20 मैच की तरह तेज और परिणाम आधारित दिखाई देती है। पिछले तीन दिनों में विभाग ने लगातार कार्रवाई करते हुए तीन शराब तस्करों को गिरफ्तार किया। थाना कासना क्षेत्र से शनि वाल्मीकि को गिरफ्तार कर 30 पव्वा दोस्ताना देशी शराब बरामद की गई। 4 मई को दनकौर क्षेत्र में संयुक्त कार्रवाई के दौरान नितिन कुमार को पकड़ा गया, जिसके कब्जे से 50 पव्वा मिस इंडिया ब्रांड देशी शराब मिली। 3 मई को कासना क्षेत्र से आशू उर्फ आस मोहम्मद को गिरफ्तार कर 25 पव्वा अवैध शराब बरामद की गई। ये तस्कर शराब दुकानों के बंद होने के बाद या खुलने से पहले अवैध बिक्री कर सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा रहे थे। आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को जेल भेजा गया। टी-20 मैच की भाषा में कहें तो आबकारी टीम हर दिन तस्करों की विकेट गिराकर स्कोरबोर्ड अपने पक्ष में करती नजर आ रही है।
जिले में आबकारी विभाग की कार्रवाई केवल छापेमारी तक सीमित नहीं है। विभाग ने बहुस्तरीय रणनीति लागू की है-
लाइसेंसी शराब दुकानों का औचक निरीक्षण, दुकानों के आसपास ढाबों व प्रतिष्ठानों की जांच, हाईवे और राष्ट्रीय मार्गों पर वाहन चेकिंग, सीमावर्ती क्षेत्रों की विशेष निगरानी, मुखबिर तंत्र का मजबूत नेटवर्क, इन रणनीतियों ने अवैध शराब कारोबारियों की कमर तोड़ दी है। अब तस्करों के लिए जिले में प्रवेश करना ही सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
आमतौर पर कार्रवाई और राजस्व को दो अलग-अलग पहलू माना जाता है, लेकिन गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग ने दोनों के बीच संतुलन स्थापित किया है। जहां एक ओर अवैध शराब पर सख्ती की जा रही है, वहीं दूसरी ओर लाइसेंसी व्यापार को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाया गया है। इससे सरकारी राजस्व बढ़ा, अवैध कारोबार घटा, जनता को सुरक्षित माहौल मिला। यही कारण है कि आज गौतमबुद्ध नगर आबकारी व्यवस्था पूरे प्रदेश के लिए मॉडल बनती दिखाई दे रही है।
कप्तान और टीम की संयुक्त जीत
जिले की बदलती तस्वीर यह साबित करती है कि मजबूत नेतृत्व और समर्पित टीम किसी भी चुनौती को अवसर में बदल सकती है। जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की नेतृत्व क्षमता और निरीक्षकों की सक्रिय कार्यशैली ने विभाग को नई पहचान दी है। आज गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग सिर्फ कार्रवाई करने वाला विभाग नहीं बल्कि सुरक्षा, राजस्व और प्रशासनिक दक्षता का उदाहरण बन चुका है। टी-20 क्रिकेट की तरह तेज फैसले, सटीक रणनीति और लगातार आक्रामक खेल-यही वह फार्मूला है जिसने शराब तस्करों को बैकफुट पर ला दिया है। और अगर यही रफ्तार जारी रही तो आने वाले समय में गौतमबुद्ध नगर न केवल प्रदेश का सबसे कमाऊ जिला रहेगा, बल्कि अवैध शराब मुक्त जिले के रूप में भी नई पहचान स्थापित करेगा। कुल मिलाकर, यह मुकाबला जारी है-लेकिन फिलहाल मैदान पर आबकारी विभाग की टीम ही विजेता नजर आ रही है और तस्करों की विकेट लगातार गिरती जा रही है।
















