Ghaziabad में विधवा का दर्द सुनते ही डीएम रविन्द्र कुमार मांदड़ ने खुद पुलिस बल के साथ पहुंचकर दिलाया उसका आशियाना

-भू-माफिया के कब्जे पर चला प्रशासन का डंडा, जनसुनवाई में लगाई गुहार
-चार दिन में मिला न्याय; जिलाधिकारी की तत्परता से कब्जामुक्त हुआ मकान
-धोखाधड़ी से कब्जे का आरोप सही मिलने पर डीएम ने मौके पर संभाला मोर्चा, पुलिस को मुकदमा दर्ज करने के निर्देश
-मकान वापस मिलने पर छलके विधवा के खुशी के आंसू, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी का जताया आभार

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिले में भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख सोमवार को एक बार फिर देखने को मिला, जब जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने स्वयं मौके पर पहुंचकर एक बुजुर्ग विधवा महिला को उसका मकान वापस दिलाया। वर्षों से न्याय की आस लगाए बैठी महिला को जब प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद अपने घर का कब्जा मिला तो उसकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। महिला ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उसे अब न्याय व्यवस्था पर फिर से विश्वास हो गया है।
मामला विजयनगर क्षेत्र के सेक्टर-11 स्थित बी-26 मकान का है। यहां रहने वाली चंचल पत्नी स्वर्गीय नरेंद्र बाबू ने बीते 29 मई को जिलाधिकारी की जनसुनवाई में पहुंचकर अपनी पीड़ा सुनाई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि ताज मोहम्मद नामक व्यक्ति ने धोखाधड़ी और आर्थिक मजबूरी का फायदा उठाकर उसके मकान पर कब्जा कर लिया है। महिला के अनुसार उसने जरूरत के समय ताज मोहम्मद से डेढ़ लाख रुपये उधार लिए थे, जिसके बदले मकान के मूल दस्तावेज गिरवी रखे गए थे। बाद में ब्याज और अन्य मदों को जोड़कर रकम सात लाख रुपये बताई गई और इसी आधार पर मकान पर कब्जा कर लिया गया।

पीडि़ता का आरोप था कि ताज मोहम्मद ने बाद में उक्त मकान का कब्जा मोमीन नामक व्यक्ति को दे दिया। महिला ने कई बार स्थानीय पुलिस अधिकारियों और संबंधित विभागों से शिकायत की, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। अंतत: उसने जिलाधिकारी की जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के निर्देश दिए। जांच के दौरान सामने आया कि महिला के आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। एसडीएम सदर अरुण दीक्षित द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट में भी शिकायत को सही पाया गया। जांच में यह तथ्य भी सामने आया कि आरोपित ताज मोहम्मद पूर्व में भी भूमि कब्जाने के मामलों में जेल जा चुका है।

सोमवार को जिलाधिकारी स्वयं डीसीपी सिटी धवल जायसवाल, एसडीएम सदर अरुण दीक्षित, एसीपी कोतवाली उपासना पाण्डेय तथा भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने पूरे मामले की जांच की और मौके पर ही विधवा महिला को उसके मकान का कब्जा दिलाने की कार्रवाई कराई। प्रशासन की मौजूदगी में मकान खाली कराया गया और विधवा महिला को उसका घर सौंप दिया गया। मकान वापस मिलने के बाद भावुक हुई चंचल ने कहा कि उसे उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी न्याय मिल जाएगा। उसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिलाधिकारी का धन्यवाद करते हुए कहा कि प्रशासन की तत्परता के कारण उसे अपना घर वापस मिल सका है। इस अवसर पर जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शासन की मंशा है कि किसी भी गरीब, असहाय, विधवा, बुजुर्ग अथवा जरूरतमंद व्यक्ति का शोषण न होने पाए।

उन्होंने कहा कि किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में प्रशासन जीरो टॉलरेंस की नीति पर कार्य कर रहा है। जिलाधिकारी ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए कि आरोपितों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि भू-माफियाओं और अवैध कब्जाधारियों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा तथा किसी भी पीडि़त को न्याय दिलाने में प्रशासन पीछे नहीं हटेगा। जिले में हुई इस कार्रवाई को प्रशासन की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। साथ ही यह संदेश भी गया है कि अब अवैध कब्जा कर कमजोर लोगों का शोषण करने वालों के खिलाफ प्रशासन सीधे मैदान में उतरकर कार्रवाई करने के लिए तैयार है।