-गर्मी बढ़ते ही अग्निशमन विभाग का बड़ा अभियान, फायर सिस्टम दुरुस्त न करने वालों पर सख्त कार्रवाई
-नोटिस के बाद भी नहीं जागे बिल्डर और आरडब्ल्यूए, अब न्यायालय में दायर किए गए वाद
-लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों को किसी कीमत पर नहीं बख्शा जाएगा: राहुल पाल
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भीषण गर्मी के बीच आग लगने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए अग्निशमन विभाग ने फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी करने वाले भवन स्वामियों, बिल्डरों और आरडब्ल्यूए के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। फायर विभाग की लगातार चेतावनी और नोटिस के बावजूद अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली को कार्यशील नहीं करने वाली सात बड़ी आवासीय सोसायटियों के खिलाफ न्यायालय में वाद दायर कर दिया गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि लोगों की सुरक्षा से समझौता करने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) राहुल पाल ने बताया कि गर्मी के मौसम में तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसके कारण भवनों में स्थापित विद्युत उपकरणों पर लोड बढ़ जाता है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने की घटनाओं का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए अग्निशमन विभाग द्वारा जिलेभर में फायर ऑडिट और मॉक ड्रिल अभियान चलाया जा रहा है। लोगों को आग से बचाव और आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित निकासी के बारे में जागरूक भी किया जा रहा है।
राहुल पाल ने बताया कि फायर ऑडिट के दौरान बहुमंजिला आवासीय और व्यावसायिक भवनों में स्थापित अग्निशमन सुरक्षा प्रणालियों की कार्यशीलता की गहन जांच की जा रही है। निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर फायर फाइटिंग सिस्टम, फायर अलार्म, हाइड्रेंट, स्प्रिंकलर और अन्य सुरक्षा उपकरण अकार्यशील पाए गए। ऐसे मामलों में संबंधित बिल्डरों, आरडब्ल्यूए पदाधिकारियों और मेंटेनेंस टीमों को तत्काल खामियां दूर करने के निर्देश दिए गए थे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा अधिनियम-2022 के तहत संबंधित भवन प्रबंधन को नोटिस जारी कर अग्निशमन उपकरणों को निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यशील करने के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया। इसके बावजूद कई भवन प्रबंधन संस्थाओं ने सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रखी। विभाग ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कानूनी कार्रवाई का निर्णय लिया। सीएफओ के अनुसार वैशाली, इंदिरापुरम, वसुंधरा और खोड़ा क्षेत्र की सात प्रमुख आवासीय सोसायटियों के खिलाफ न्यायालय में वाद दाखिल किए गए हैं।
इनमें राजहंस सोसायटी, जयपुरिया सनराइज ग्रीन सोसायटी, गौर ग्रीन विस्टा, सुपरटेक अवंत गार्डन, सूर्य कनिष्क टावर, जीकेजी हाइट्स और हिंडौन हाइट्स अपार्टमेंट शामिल हैं। इन सोसायटियों में फायर सेफ्टी व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्यशील नहीं पाई गई थी। राहुल पाल ने कहा कि बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले हजारों लोगों की सुरक्षा सीधे तौर पर अग्निशमन व्यवस्था पर निर्भर करती है। यदि किसी आपात स्थिति में फायर सिस्टम काम नहीं करता तो बड़ा हादसा हो सकता है। इसलिए विभाग इस मामले में किसी प्रकार की ढिलाई बरतने के पक्ष में नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जिन अन्य भवनों, सोसायटियों या संस्थानों ने अभी तक अपनी अग्निशमन सुरक्षा प्रणाली को पूर्ण रूप से कार्यशील नहीं कराया है, उन्हें भी शीघ्र आवश्यक सुधार करने होंगे। यदि निर्धारित समय के भीतर मानकों का अनुपालन नहीं किया गया तो उनके खिलाफ भी न्यायालय में वाद दायर कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य अग्निशमन अधिकारी
गर्मी के मौसम में आग लगने की घटनाओं की संभावना काफी बढ़ जाती है। ऐसे में बहुमंजिला भवनों और सोसायटियों में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम का पूरी तरह कार्यशील होना अत्यंत आवश्यक है। अग्निशमन विभाग द्वारा लगातार फायर ऑडिट, मॉक ड्रिल और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद कुछ सोसायटियों और भवन प्रबंधन द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है। नोटिस दिए जाने और पर्याप्त समय मिलने के बाद भी जिन भवनों में अग्निशमन सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, उनके विरुद्ध न्यायालय में वाद दाखिल किए गए हैं। हमारा उद्देश्य कार्रवाई करना नहीं, बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा से समझौता करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। सभी भवन स्वामी, आरडब्ल्यूए और प्रबंधन समितियां तत्काल फायर सेफ्टी मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करें, अन्यथा उनके विरुद्ध भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राहुल पाल
मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ), गाजियाबाद।















