- प्रधानाचार्या पूनम गौतम और उपप्रधानाचार्य तनुजा ने पौधारोपण कर विद्यार्थियों को प्रकृति संरक्षण का दिया संदेश
- पर्यावरण बचाना आने वाली पीढिय़ों के प्रति हमारी जिम्मेदारी: पूनम गौतम
- वृक्ष पृथ्वी के संतुलन और मानव जीवन की सबसे बड़ी पूंजी: तनुजा
- हर छात्र लगाए एक पौधा और उसे पेड़ बनने तक संभाले, विद्यालय परिवार ने दिलाया हरित भविष्य का संकल्प
- वृक्षारोपण, पर्यावरण शपथ और जागरूकता गतिविधियों से गूंजा विद्यालय परिसर, बच्चों ने दिया हरित भारत का संदेश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बढ़ते प्रदूषण, घटते वन क्षेत्र और बदलते पर्यावरणीय संतुलन के बीच नई पीढ़ी को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य से गौतम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल प्रताप विहार में मंगलवार को वन महोत्सव उत्साह, उमंग और पर्यावरण संरक्षण के संकल्प के साथ मनाया गया। पूरे विद्यालय परिसर में हरियाली, पौधों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रेरक संदेशों का अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम केवल औपचारिक पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों को प्रकृति से जोडऩे तथा पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का सशक्त प्रयास भी साबित हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम गौतम, उपप्रधानाचार्य तनुजा, निदेशक आशीष गौतम तथा एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने विद्यालय परिसर में पौधारोपण कर किया। इसके बाद सभी अतिथियों ने पौधों की नियमित देखभाल का संकल्प लेते हुए विद्यार्थियों से भी प्रकृति संरक्षण को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों ने हरित भविष्य की उम्मीदों को नई ऊर्जा प्रदान की। अपने प्रेरक संबोधन में प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने कहा कि आज पर्यावरण संरक्षण केवल एक सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव अस्तित्व की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमें केवल ऑक्सीजन ही नहीं देते, बल्कि जलवायु संतुलन बनाए रखने, वर्षा चक्र को सुरक्षित रखने, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि यदि प्रत्येक छात्र अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले, तो आने वाले वर्षों में धरती को फिर से हराभरा बनाया जा सकता है। पौधा लगाना आसान है, लेकिन उसे पेड़ बनाना हमारी वास्तविक जिम्मेदारी है। विद्यालय की उपप्रधानाचार्य तनुजा ने अपने संबोधन में पर्यावरण संरक्षण को परिवार और समाज दोनों की साझा जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि प्रकृति हमें जीवन का आधार देती है, इसलिए उसका संरक्षण करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और तेजी से घटते हरित क्षेत्र पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय हैं। यदि आज हम सचेत नहीं हुए, तो आने वाली पीढिय़ों को स्वच्छ हवा, शुद्ध जल और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराना कठिन हो जाएगा।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे केवल विद्यालय तक सीमित न रहें, बल्कि अपने घर, मोहल्ले और समाज में भी पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश लेकर जाएं। उन्होंने कहा बच्चे ही समाज के सबसे बड़े परिवर्तनकर्ता होते हैं। यदि उनमें प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी की भावना विकसित हो जाए, तो देश का पर्यावरणीय भविष्य स्वत: सुरक्षित हो जाएगा। विद्यालय के निदेशक आशीष गौतम ने कहा कि आधुनिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल संरक्षण अपनाने और अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना था कि प्रकृति से जुड़कर ही स्वस्थ और समृद्ध समाज का निर्माण संभव है। एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी सकारात्मक आदतें-जैसे एक पौधा लगाना, पानी की बचत करना, प्लास्टिक का कम उपयोग करना और आसपास स्वच्छता बनाए रखना-भविष्य में बड़े बदलाव का आधार बन सकती हैं।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे पर्यावरण संरक्षण को केवल एक अभियान नहीं, बल्कि अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक पौधारोपण किया और पर्यावरण जागरूकता से जुड़े संदेशों के माध्यम से सभी को हरियाली का महत्व समझाया। विद्यालय परिसर में लगाए गए पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी विद्यार्थियों ने स्वयं लेने का संकल्प लिया। इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम ‘, ‘पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ’ और ‘हरित भारत, स्वच्छ भारत’ जैसे संदेशों के साथ पूरे वातावरण में प्रकृति के प्रति प्रेम और जिम्मेदारी का भाव स्पष्ट दिखाई दिया। समापन अवसर पर विद्यालय परिवार ने संकल्प लिया कि भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण, जल बचाओ, स्वच्छता और वृक्षारोपण जैसे जनहित के कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित किए जाएंगे, ताकि विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व, प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण संरक्षण की भावना निरंतर विकसित होती रहे। वन महोत्सव का यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को हरित, स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य की ओर प्रेरित करने वाला एक सशक्त संदेश बनकर उभरा।















