-उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका विषय पर छह दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का शुभारंभ
-देश-विदेश के विशेषज्ञों ने शिक्षण, शोध और नवाचार में एआई के बढ़ते महत्व पर डाला प्रकाश
-शिक्षकों को भविष्य की तकनीकों से जोडऩे और नवाचार आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने पर रहेगा विशेष फोकस
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। तेजी से बदलती तकनीक के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) उच्च शिक्षा के स्वरूप को नई दिशा दे रहा है। इसी परिवर्तनशील परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए एचआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी में मंगलवार को ‘उच्च शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका : एक बहु-विषयक दृष्टिकोण’ विषय पर फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम (एफडीपी) का भव्य शुभारंभ किया गया। यह शैक्षणिक कार्यक्रम 6 जुलाई से 11 जुलाई 2026 तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश-विदेश के विशेषज्ञ शिक्षकों को एआई आधारित आधुनिक शिक्षण पद्धतियों, अनुसंधान और नवाचार से परिचित कराएंगे। कार्यक्रम का आयोजन एसोसिएशन ऑफ फार्मास्यूटिकल टीचर्स ऑफ इंडिया, इंडियन फार्मेसी ग्रेजुएट्स एसोसिएशन तथा एसीआईसी, मेरठ के सहयोग से किया जा रहा है। उद्घाटन समारोह में शिक्षाविदों, संस्थान के पदाधिकारियों और फैकल्टी सदस्यों ने बड़ी संख्या में भाग लिया तथा भविष्य की शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की। उद्घाटन सत्र में संस्थान के चेयरमैन एच.एस. बंसल, सचिव अनिल बंसल, संयुक्त सचिव अनमोल बंसल, ग्रुप डायरेक्टर डॉ. सुधीर कुमार, कॉलेज ऑफ फार्मेसी के निदेशक डॉ. अनुज मित्तल तथा आयोजन सचिव सुश्री प्रीति कुनियाल सहित आयोजन समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया और शिक्षकों से नई तकनीकों को अपनाकर विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने का आह्वान किया।
अपने संबोधन में संस्थान के पदाधिकारियों ने कहा कि आज के समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल सूचना प्रौद्योगिकी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मेसी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन, शिक्षा और अनुसंधान सहित लगभग प्रत्येक क्षेत्र में इसकी उपयोगिता लगातार बढ़ रही है। ऐसे में शिक्षकों के लिए भी आवश्यक है कि वे नई तकनीकों की गहन समझ विकसित करें, ताकि विद्यार्थियों को समय की मांग के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और नवाचार आधारित शिक्षा प्रदान की जा सके। उद्घाटन समारोह के बाद आयोजित पहले तकनीकी सत्र में इंफोसिस के वरिष्ठ सलाहकार अपूर्व वर्मा ने ‘एआई : सच्चाई, असर और आगे का रास्ता’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस किस प्रकार उद्योगों, स्वास्थ्य सेवाओं, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली को तेजी से बदल रहा है। उन्होंने एआई के सकारात्मक उपयोग, उससे जुड़ी चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना था कि आने वाले वर्षों में एआई प्रत्येक पेशे का अभिन्न हिस्सा बनने जा रहा है और शिक्षा जगत को इसके अनुरूप स्वयं को तैयार करना होगा। दूसरे तकनीकी सत्र का संचालन जर्मनी की संस्था फ्रंटियर्स में सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग मैनेजर हितेश पंत ने ऑनलाइन माध्यम से किया।
उन्होंने ‘अपनी एआई क्षमता को अनलॉक करें’ विषय पर व्याख्यान देते हुए फैकल्टी सदस्यों को शिक्षण, शोध और शैक्षणिक सामग्री तैयार करने में एआई आधारित उपकरणों के व्यावहारिक उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि शिक्षक आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग करें, तो विद्यार्थियों के सीखने की गुणवत्ता और शोध कार्यों की उपयोगिता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। कार्यक्रम के आयोजन सचिव सुश्री प्रीति कुनियाल ने बताया कि इस फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का उद्देश्य शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बहुआयामी संभावनाओं से परिचित कराना तथा उन्हें आधुनिक शिक्षण प्रणाली के अनुरूप दक्ष बनाना है।
छह दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ एआई, डिजिटल शिक्षण, अनुसंधान, नवाचार और नई तकनीकों से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपने अनुभव साझा करेंगे। संस्थान के निदेशक डॉ. अनुज मित्तल ने कहा कि एचआईएमटी कॉलेज ऑफ फार्मेसी हमेशा से गुणवत्तापूर्ण, तकनीक आधारित और नवाचार केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। यह कार्यक्रम उसी सोच का हिस्सा है, जिसके माध्यम से शिक्षकों को वैश्विक स्तर की नई तकनीकों से जोड़कर उन्हें भविष्य की शिक्षा प्रणाली के लिए तैयार किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों के ज्ञान और कौशल को नई दिशा देगा तथा विद्यार्थियों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।
















