किसान आंदोलन में किसान ने दिव्यांग शौचालय में की आत्महत्या

यूपी गेट पर आयोजित किसान आंदोलन की बदल रही तस्वीर

पिछले 24 घंटे में दो किसानों की मौत से किसानों में बढा आक्रोष

गाजियाबाद। नए कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन की तस्वीर शुक्रवार से बदलती जा रही है। शुक्रवार की दोपहर को जहां ठंड से एक किसान का निधन हो गया था, वहीं शनिवार सुबह प्रदेश के रामपुर जनपद के बिलासपुर निवासी कश्मीर सिंह ने नगर निगम के दिव्यांग शौचालय में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। उनके पास से एक सुसाइड नोट भी मिला है। इसमें उन्होंने अपनी जीवन लीला समाप्त करने के पीछे खुद को जिम्मेदार ठहराया है। किसान की मौत की खबर पर आंदोलन स्थल के किसानों में शोक है। पुलिस भी मौके पर पहुंच गई है। वही किसान संगठनों ने आंदोलन स्थल के मंच से मृतक किसान को भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की जिद पर अड़े किसानों का धरना लगातार तेज होता जा रहा है,दूसरी तरफ इस तरह के हादसों से किसान आंदोलन की तस्वीर बदलती जा रही है। हालांकि नव वर्ष के आगमन को लेकर किसानों में उत्साह दिखा और धरना स्थल पर भीड़ ही नजर आई। यहां घूमने-फिरने के मकसद से आने वाले लोगों की आवाजाही भी बढ़ रही है। पिछले 24 घंटे में यूपी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन में 2 किसानों की मौत से किसानों में आक्रोश है। वहीं, दूसरी और शुक्रवार को यूपी गेट पर चल रहे किसान आंदोलन में शामिल गलतान सिंह की तबीयत बिगडऩे के बाद अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। आंदोलन में उनके दो पुत्र, भाई व भतीजा भी शामिल हैं। उनके गांव से करीब दो दर्जन किसान मौजूद हैं। परिजनों ने शव का पोस्मार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस ने शव को परिजनों को सौंप दिया। परिजन शव को लेकर रामपुर ले गए। बता दें कि किसान नेताओं का केंद्र सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हो चुकी हैं, लेकिन उन वातार्ओं का अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका है। 30 दिसंबर को हुई वार्ता में जिसमें किसान नेताओं व केंद्र सरकार के बीच कुछ सहमति बनी थी। अब अगली वार्ता चार जनवरी को होगी। किसानों का कहना है कि अगर बातचीत नहीं बनी तो 6 जनवरी को कुंडली और टीकरी बार्डर से ट्रैक्टर यात्रा शुरू की जाएगी। दरअसल, छठे दौर की बातचीत में सरकार ने जिस तरह से सकारात्मक रुख दिखाया है, इसके बाद किसान भी शांत हैं और 4 जवरी तक सारे नये आंदोलन टाल रखे हैं। फिलहाल, कुंडली समेत अन्य बार्डर पर किसान नेता रूटीन में किसानों के बीच बात रख रहे हैं और अब तक आंदोलन को लेकर जो कुछ हुआ है, वही जानकारी दे रहे हैं।

जबकि भाकियू के राष्ट्रीय महासचिव शमशेर सिंह दहिया का कहना है कि तीन कानून रद हों और एमएसपी पर कानूनी गारंटी मिले। पिछली बैठक में ही सरकार को स्पष्ट कर दिया था और सरकार ने भरोसा दिया है कि 4 जनवरी की वार्ता में इसका हल निकाला जाएगा। किसानों ने भी चार तक शांतिपूर्ण आंदोलन चलाया हुआ है और कोई नया निर्णय नहीं लिया है। नये साल के दिन संयुक्त मोर्चा ने तय किया है कि अगर चार जनवरी को बातचीत सिरे नहीं चढ़ी, तो वह छह जनवरी को ट्रैक्टर यात्रा करेंगे। अगर सरकार किसानों की मांग पूरी कर देती है, तो किसान अगले ही दिन धन्यवाद करते हुए अपने घरों को लौट जाएंगे, नहीं तो छह को किसान कुंडली और टिकरी बॉर्डर से ट्रैक्टरों के साथ शाहजहांपुर बार्डर के लिए कूच करेंगे। इसी कड़ी में 26 जनवरी की परेड में भी शामिल होना है और बीच के आंदोलन बाद में तय होंगे।