हंगामेदार रही नगर निगम की बोर्ड बैठक, खतरानक कुत्तों के पालने पर लगी रोक, शहरवासियों ने जताई खुशी, बोर्ड बैठक में 23 प्रस्तावों पर हुई चर्चा 6 प्रस्ताव निरस्त
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। नगर निगम की बोर्ड बैठक में शनिवार को अहम फैसला लिया गया। गाजियाबाद में अब पिटबुल समेत खतरनाक प्रजातियों के कुत्ते पालने पर लगी रोक लगा दी गई है। शहर में अब लोग पिटबुल, राटवेलर और डोगो अर्जेंटीनो प्रजाति के कुत्ते नहीं पाल सकेंगे। नगर निगम की बोर्ड बैठक में कुत्तों पर नियमावली का प्रस्ताव भी पास हो गया है। जिन लोगों के पास इस नस्ल के कुत्ते पहले से हैं उनका बधियाकरण कर पंजीकरण कराना होगा। अगर पंजीकरण नहीं कराया जाता है तो उस पर जुमार्ना या अन्य कार्रवाई की जाएगी। भाजपा पार्षद संजय सिंह ने कुत्तों पर नियमावली का प्रस्ताव रखा। जिसे बोर्ड ने स्वीकृति दे दी। संभावित रूप से नगर निगम के वर्तमान बोर्ड की यह अंतिम बैठक थी। लेकिन इस बोर्ड बैठक में फिजूल की बात अधिक और काम की बात कम हुई। लगभग 8 घंटे तक चली बोर्ड बैठक में अधिकांश समय हंगामा होता रहा। वार्डों में विकास कार्यों पर रोक लगाए जाने के कथित बयान को लेकर पार्षदों ने जमकर हंगामा किया। भाजपा, सपा और कांग्रेसी पार्षदों में कई मुद्दों पर खिंचतान दिखी। मुलायम सिंह यादव के नाम पर सड़क का नामाकरण करने की मांग को लेकर सपा पार्षद आसिफ खान सदन में धरने पर बैठ गये। कई और पार्षद आ गये। बाद में मेयर द्वारा समााने के बाद अपनी सीट पर लौटे। बैठक के पहले सत्र में कोई प्रस्ताव नहीं रखा गया और पार्षद निगम अधिकारियों पर आरोप लगाते रहे। इस दौरान पार्षदों के बीच आपस में भी काफी नोकोंक हुई। बैठक के दौरान स्वास्थ विभाग और निर्माण विभाग के कामों को लेकर खूब हंगामा हुआ। टैक्स और संपत्ति विभाग के अधिककारियों पर पार्षदों ने कई गंभीर आरोप लगाये। बैठक के दूसरे सत्र में 23 प्रस्तावों पर चर्चा हुई जिसमें से 6 प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

शनिवार को नगर निगम सभागार में मेयर आशा शर्मा की अध्यक्षता एवं नगर आयुक्त डॉ. नितिन गौड़ की मौजूदगी में नगर निगम की बोर्ड बैठक 11 बजे से शुरू हुई। बैठक शाम 7 बजे तक चली। मेयर ने सबसे पहले सदन में दिवंगत मुलायम सिंह यादव के निधन पर दो मिनट का मौन धारण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद 11.10 बजे से बोर्ड बैठक की वंदेमातरम गान कर शुरूआत की गई। बोर्ड बैठक में नगर निगम प्रशासन की ओर से करीब 23 प्रस्ताव रखे गए थे। इसमें से 6 प्रस्तावों को निरस्त करने के बाद 17 प्रस्तावों को हंगामे के बीच पास किया गया। नगर निगम की करीब 8 घंटे तक चली बोर्ड बैठक में शहर में टैक्स से छूटे हुए भवनों का डिजिटल सर्वे का प्रस्ताव निरस्त किया गया वहीं, नर्सिंग होम से 5000 रुपए शुल्क लेने का प्रस्ताव पास किया गया। क्लीनिक का 3 हजार रुपए शुल्क वार्षिक होगा। इसके अलावा संपत्तियों के नामतरण पर रजिस्ट्री का 1 प्रतिशत शुल्क लेने एवं लेट होने पर 1 हजार रुपए जुर्माना लिया जाएगा। इसके अलावा मलबा उठाने के लिए नगर निगम द्वारा 800 रुपए लेने के प्रस्ताव पर भी सहमति बनी। क्रॉसिंग रिपब्लिक में बिल्डर को जमीन देने का प्रस्ताव निरस्त किया गया। शहर में स्मार्ट पार्किंग के लिए 3 टेंडर छोड़े जाएंगे। मेयर ने लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित करने का निर्णय लिया। बोर्ड बैठक में अपर नगर आयुक्त अरुण कुमार यादव, शिवपूजन यादव, एकाउंट आफिसर राजेश गौतम, चीफ इंजीनियर एनके चौधरी, जीएम जलकल आनंद त्रिपाठी, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज सिंह, नगर स्वास्थ अधिकारी डॉ. मिथलेश, सीटीओ डॉ. संजीव सिन्हा, मुख्य नगर लेखा परीक्षक विवेक सिंह, एग्जूयकेटिव इंजीनियर देशराज सिंह, एग्जयूकेटिव इंजीनियर जैदी, लाइट प्रभारी योगेंद्र यादव आदि मौजूद रहे।

पार्षद मनोज चौधरी ने उठाया कमीशनखोरी का मुद्दा
कांग्रेसी पार्षद मनोज चौधरी ने कहा कि सबसे पहले कमीशन खोरी रोकी जाए। 20 से 30 फीसदी पैसा कमीशन खोरी में जा रहा है। हर चीज में लूट खसौट हो रही है। भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने भी साफ किया कि जो एक बार सदन में निर्णय हो चुका है,उसे बदलने का किसी को भी अधिकार नहीं है। जनता टैक्स का भुगतान करती है,उसे हक है कि उसके एरिया में विकास के काम कराए जाए। यदि अफसरों को केवल बयान वाजी तक ही सीमित रहना है तो अधिकारी अपने अपने पदों से इस्तीफा देते हुए चुनाव मैदान में उतरें।कांग्रेसी पार्षद जाकिर सैफी ने इस बीच कहा कि स्टीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर भी जबरदस्त तरीके से खेल हो रहा है। जिन लाइटों की कंपनी के द्वारा मरम्मत की जानी चाहिए वह ठीक नहीं की जा रही है। देखा जाए तो निगम अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त है। सडकें बनती है और एक माह के भीतर ही टूट जाती है। कोई देखने वाला नहीं है।

बसपा पार्षद ने निगम पार्षदों को ही घेरा
BSP पार्षद आनंद चौधरी ने कहा कि वरिष्ठ पार्षदों द्वारा पूर्व के मुद्दे नहीं उठाए गए। इस पर भाजपा पार्षद अनिल स्वामी, राजेंद्र त्यागी भड़क उठे।व हीं,नगर निगम की बोर्ड बैठक में नेहरूनगर स्थित स्वीमिंग पूल का मुद्दा गरमाया। यहां पर ठेके पर दिए गए कांट्रेक्टर ने उसका स्वरूप बदल दिया। मेयर के बड़े भाई भाजपा के वरिष्ठ पार्षद अनिल स्वामी ने मुद्दा उठाया। मेयर ने इस पर कमेटी बनाकर स्वयं भी इसका मौके पर जाकर निरीक्षण करने का निर्णय लिया। बोर्ड बैठक में नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.मिथिलेश कुमार ने ठेके पर दिए गए कंपनी को कूड़ा उठाने पर विस्तार से बताया। 5 कूड़ा ट्रांसफर मधुबन-बापूधाम में 4400 वर्गमीटर जमीन के अलावा प्रत्येक जोन में 5 स्टेशन 25 करोड़ में बनेंगे।

दुकानों के किराया बढ़ोत्तरी पर नहीं बनी बात
नगर निगम की 1702 दुकानों का किराया बढ़ाने के प्रस्ताव पर पार्षदों ने सहमति नहीं बनी। हालांकि काफी संख्या में पार्षदों ने इसका समर्थन किया और बोले कि दुकानों का किराया बढ़ना चाहिये। बाद में इस मामले में एक कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। कूडा उठाने का ठेका निरस्त करने की मांग भी पार्षदों ने रखा। पार्षदों ने इस बात पर जोर दिया कि कूड़ा उठाने का जिस प्राइवेट कंपनी को ठेका दिया गया है,वह एक सिरे से निरस्त किया जाए। कूड़ा उठाने के नाम पर जबरदस्त तरीके से खेल हो रहा है। जिस कंपनी को कूड़ा उठाने का ठेका दिया है,वह वाहनों में गोबर आदि भर लेते है, ताकि वजन दिखाया जा सकें। इस पर सदन की बैठक में निर्णय लिया गया कि कूड़ा उठाने वाली एजेंसी की निगरानी करते हुए कूड़ा का शुल्क निगम लेगा।

भाजपा पार्षद ने निर्माण विभाग के खिलाफ खोला मोर्चा
भाजपा पार्षद राजीव शर्मा ने कहा कि सड़कों पर पैच वर्क कार्य के नाम पर निगम में जबरदस्त तरीके से घोटाला हो रहा है। राजीव शर्मा ने कहा कि धारा 177 बी के अंतर्गत 64 करोड़ लागत से ऐसे किस एरिया में गडढे भर गए,ये सदन के सामने स्पष्ट किया जाए। दुर्भाग्य पूर्ण पहलू ये है कि 177 बी के अंतर्गत कार्य कराए जाने की निगम कार्यकारिणी से भी स्वीकृति नहीं ली गई। बैठक में भाजपा के पार्षद कुमार माहेश्वरी ने मुद्दा उठाया कि अपनी पार्टी के लोग ठेकेदार बन गए है। अपनी इच्छा के अनुसार इन ठेकेदारों के द्वारा काम किए जाते है। किसी तरह का विरोध किए जाने पर पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के माध्यम से खामौश रहने का दबाव बनाया जाता है। उनके द्वारा सदन बैठक के दौरान मामले को उठाया तो मेयर और पार्षद उनके खिलाफ ही खडे हो गए। बोर्ड बैठक में इनके अलावा महिला पार्षदों ने भी अपने-अपने वार्डों में लाइट,सफाई से लेकर विकास कार्य नहीं होने पर जमकर अपनी बात रखीं। इसके अलावा वार्डों में विकास कार्य से संबंधित प्रस्ताव भी रखे गए।

नाली का चेनल टूटा है या मोटर खराब वह भी नहीं हो रही है ठीक
बीजेपी के वरिष्ठ पार्षद राजेंद्र त्यागी ने कहा कि इससे अधिक दुर्भाग्य पूर्ण स्थिति दूसरी नहीं हो सकती है कि यदि किसी नाली का चेनल टूटा है या किसी वाटर पानी की मोटर खराब हो गई है,वह तक ठीक नहीं करायी जा रही है। जनता टैक्स का भुगतान करती है,उसे हक है कि उसके एरिया में विकास के काम कराए जाए। यदि अफसरों को केवल बयान वाजी तक ही सीमित रहना है तो अधिकारी अपने अपने पदों से इस्तीफा देते हुए चुनाव मैदान में उतरें।

सडकों के गडढे बन रहे है प्राण घातक
बीजेपी के पार्षद हिमांशु लव ने कहा कि सडकों के गडढे प्राण घातक साबित हो रहे है। हाल में गडढों के चलते एक बुजुर्ग महिला की मौत हो गई। इसके अलावा दो अन्य दो पहिया वाहन सवार घायल हो गए। उनकी हडडी टूट गई है। एक अन्य पार्षद का कहना था कि एक व्यक्ति तो मौजूदा अस्पताल में भर्ती है। लिखित में अवगत कराने के बावजूद कोई सुनने वाला नहीं है।

लाइटों की मरम्मत में भी खेल
कांग्रेसी पार्षद जाकिर सैफी ने इस बीच कहा कि स्टीट लाइटों की मरम्मत के नाम पर भी जबरदस्त तरीके से खेल हो रहा है। जिन लाइटों की कंपनी के द्वारा मरम्मत की जानी चाहिए वह ठीक नहीं की जा रही है। देखा जाए तो निगम अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त है। सडकें बनती है और एक माह के भीतर ही टूट जाती है। कोई देखने वाला नहीं है।

मेयर ने एक साल पहले जिस नाले का किया उदघाटन अभी तक काम शुरू नही
बीजेपी के पार्षद सरदार सिंह भाटी का कहना था कि इससे बडा दूसरा दुर्भाग्य नहीं हो सकता है कि महापौर के द्वारा एक साल पहले जिस नाले का उदघाटन किया,वह काम अभी तक आरंभ नहीं हुआ है। मोहन नगर जोन के आधा दर्जन वार्ड ऐसे है,जिनमें पिछले तीन माह से लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे है। कुछ पार्षदों का तर्क था कि हरवंश नगर में चार सौ पोल पर लाइटें ही नहीं लगायी गई है। हरवंश नगर में पानी का भी संकट है। एक मकान को डेंजर घोषित किया,इस नोटिस का असर ये हुआ कि भवन स्वामी ने सदमे में दम तोड दिया।















