नोएडा के 50 साल: गांव से ग्लोबल सिटी तक का सफर, CEO कृष्णा करुणेश ने नोएडा प्राधिकरण के डेवलेपमेंट प्रोजेक्ट को दी गति

-1976 की नींव से 2026 का आधुनिक महानगर – नोएडा की स्वर्णिम विकास यात्रा
-स्थापना से औद्योगिक क्रांति तक : छोटे गांवों से उभरा देश का प्रमुख आर्थिक केंद्र
-एक्सप्रेसवे, मेट्रो और कनेक्टिविटी ने बदली पहचान, NCR का सबसे तेज़ी से बढ़ता शहर बना नोएडा
-आईटी हब से ग्लोबल इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन तक, अर्थव्यवस्था की नई ताकत बना शहर
-न्यू नोएडा की तैयारी के साथ भविष्य की ओर कदम, अगले 25 साल की नई विकास कहानी तैयार

उदय भूमि संवाददाता
नोएडा। नोएडा ने शुक्रवार को अपनी 50 साल की ऐतिहासिक यात्रा पूरी कर ली। 17 अप्रैल 1976 को स्थापित हुआ नोएडा अब देश के सबसे अहम औद्योगिक और आर्थिक केंद्रों में गिना जाता है। दिल्ली पर बढ़ते दबाव को कम करने और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 1976 में न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी (नोएडा) की नींव रखी थी। यह उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976 के तहत विकसित किया गया एक विशेष औद्योगिक क्षेत्र था। शुरुआती दौर में यह इलाका छोटे गांवों और कृषि भूमि तक सीमित था, लेकिन योजनाबद्ध विकास ने इसे आधुनिक शहर में बदल दिया।

1976 से 1980 के बीच सेक्टर-1 से सेक्टर-11 तक बुनियादी ढांचा तैयार किया गया, जिससे छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिला और रोजगार के अवसर पैदा हुए। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद नोएडा ने तेजी से रफ्तार पकड़ी। सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क (STPI) की स्थापना के साथ यह शहर आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों का बड़ा केंद्र बन गया। नोएडा की खास बात यह है कि यहां नगर निगम नहीं है, बल्कि पूरा प्रशासन नोएडा प्राधिकरण के तहत संचालित होता है। पहले यह क्षेत्र गाजियाबाद और बुलंदशहर का हिस्सा था, लेकिन 1997 में अलग कर गौतम बुद्ध नगर जिला बनाया गया। आज नोएडा करीब 20 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है, जिसमें 80 से ज्यादा गांव और सैकड़ों सेक्टर शामिल हैं।

कनेक्टिविटी से बदली तस्वीर

21वीं सदी में नोएडा के विकास को सबसे ज्यादा गति बेहतर कनेक्टिविटी से मिली। 2001 में डीएनडी फ्लाईओवर शुरू होने से दिल्ली और नोएडा के बीच की दूरी काफी कम हो गई। इसके बाद नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे ने औद्योगिक और रियल एस्टेट सेक्टर को नई दिशा दी। 2009 में दिल्ली मेट्रो के विस्तार के साथ नोएडा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का एक प्रमुख शहरी केंद्र बनकर उभरा है। आज नोएडा उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बन चुका है और राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य में इसकी भूमिका अहम मानी जा रही है। हालांकि, तेजी से विकास के बीच श्रमिकों और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी सामने आते रहे हैं, जो इस विकास यात्रा के साथ जुड़ी चुनौतियों को भी दर्शाते हैं।नोएडा स्थापना दिवस के मौके पर जहां शहर अपनी उपलब्धियों पर गर्व कर रहा है, वहीं भविष्य की चुनौतियों और संतुलित विकास की जरूरत भी साफ नजर आती है।

सुनियोजित और आधुनिक शहरों में से एक है नोएडा

कभी 1970 के दशक में एक सुनसान और कृषि प्रधान क्षेत्र से शुरू हुआ नोएडा आज देश के सबसे सुनियोजित और आधुनिक शहरों में गिना जाता है। औद्योगिक विकास के उद्देश्य से बसाए गए इस शहर ने न सिर्फ खुद को स्थापित किया, बल्कि इसकी सफलता से प्रेरित होकर ग्रेटर नोएडा और यमुना सिटी जैसे नए शहरी केंद्र भी अस्तित्व में आए। अब न्यू नोएडा भी बसाने की प्लानिंग शुरू हो गई है। यह दादरी और बुलंदशहर क्षेत्र के करीब 80 गांवों की जमीन पर बसाया जाएगा। इसके लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जा रही है, जिसमें 4300 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा तय किया गया है। न्यू नोएडा का मास्टर प्लान-2041 उत्तर प्रदेश कैबिनेट द्वारा 18 अक्टूबर 2024 को मंजूर किया जा चुका है। इसे चार चरणों में विकसित किया जाएगा। न्यू नोएडा आने वाले वर्षों में नई पहचान बनेगा।

खास बातें

स्थापना : 17 अप्रैल 1976 को उत्तर प्रदेश औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम के तहत हुई।

उद्देश्य : दिल्ली पर उद्योगों के बोझ को कम करना और एक व्यवस्थित औद्योगिक शहर बसाना।

नाम का अर्थ : नोएडा का मतलब ‘न्यूब ओखला इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है।

शुरुआत : शुरुआत में यह बुलंदशहर जिले का हिस्सा था और बाद में गाजियाबाद का, फिर 6 सितंबर 1997 को इसे गौतमबुद्ध नगर जिले में शामिल किया गया।

स्थापना : 17 अप्रैल 2026 को नोएडा अपनी स्वर्ण जयंती (50 वर्ष) के बाद 51वें वर्ष में प्रवेश करेगा। सेक्टर-96 में नवनिर्मित प्रशासनिक भवन का लोकार्पण और अन्य परियोजनाओं का शिलान्यास प्रस्तावित है।

आर्थिक महत्व : नोएडा उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाले जिलों में से एक है और इसे एक प्रमुख आईटी, मीडिया और रियल एस्टेट हब के रूप में जाना जाता है।

चार महीने में दिखा तेज प्रशासनिक असर, सीईओ कृष्णा करुणेश ने बदली नोएडा विकास की रफ्तार

अपने चार महीने से कम के कार्यकाल में नोएडा अथॉरिटी के सीईओ कृष्णा करुणेश ने बड़े फैसले लिए। रुके प्रॉजेक्ट को गति दी तो लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई भी की। उनकी प्राथमिकता शहर को समस्या मुक्त बनाना है। खासकर वह ट्रैफिक इंतजाम को बेहतर करने में जुटे हैं। स्पोर्ट सिटी जैसे प्रॉजेक्ट को उन्होंने गति दी है। 2011 बैच के आईएएस अधिकारी कृष्णा करुणेश ने 24 जनवरी 2026 को नोएडा प्राधिकरण के सीईओ का कार्यभार संभाला था। इसके बाद से शहर के विकास कार्यों को नई गति दी है। उनके नेतृत्व में नोएडा में प्रशासनिक सक्रियता और योजनाओं के क्रियान्वयन में स्पष्ट तेजी देखने को मिली है।सीईओ बनने के बाद कृष्णा करुणेश ने सबसे पहले लंबित परियोजनाओं की समीक्षा शुरू की और उन्हें तय समयसीमा में पूरा कराने पर जोर दिया। बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, सीवर, जल आपूर्ति और स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विशेष अभियान चलाए गए। शहर की प्रमुख सड़कों के रखरखाव और सौंदर्यीकरण पर भी खास ध्यान दिया गया, जिससे नोएडा की शहरी छवि और बेहतर हुई है।

कृष्णा करुणेश
सीईओ
नोएडा प्राधिकरण

औद्योगिक और निवेश के क्षेत्र में भी उनके प्रयास सराहनीय रहे हैं। निवेशकों की समस्याओं के त्वरित समाधान और प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में कदम उठाए गए, जिससे कारोबारी माहौल अधिक अनुकूल हुआ है। यही वजह है कि नोएडा में नए निवेश प्रस्तावों को गति मिली है। कृष्णा करुणेश ने नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ तकनीक के उपयोग को भी बढ़ावा दिया है। डिजिटल मॉनिटरिंग, ऑनलाइन सेवाओं और पारदर्शिता पर जोर देकर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाया गया है। जनता की शिकायतों के निस्तारण के लिए भी प्रभावी तंत्र विकसित किया गया है, जिससे लोगों को राहत मिली है। इसके अलावा, हरित विकास और पर्यावरण संतुलन को लेकर भी उन्होंने कई पहल की हैं। पार्कों के विकास, वृक्षारोपण और स्वच्छता अभियानों को प्राथमिकता दी गई है। कम समय में ही कृष्णा करुणेश ने अपने कार्यों से यह संकेत दे दिया है कि नोएडा को एक और अधिक सुव्यवस्थित, आधुनिक और नागरिक हितैषी शहर बनाने की दिशा में वे प्रतिबद्ध हैं।

हवन पूजन करके बनाएंगे स्थापना दिवस

नोएडा। नोएडा के 50 वां स्थापना दिवस पर पूजा व हवन का आयोजना होगा। हवन पूजन सेक्टर-6 स्थित अथॉरिटी दफ्तर में होगा। इसमें नोएडा अथॉरिटी के सीईओ समेत तमाम अधिकारी शामिल रहेंगे।