-देशभक्ति और श्रीकृष्ण की लीलाओं से सराबोर हुआ पूरा परिसर, छात्र-छात्राओं ने दी अद्भुत प्रस्तुतियां
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। 15 अगस्त 2025 का दिन शुक्रवार को गाजियाबाद के गौतम पब्लिक सी.सी. सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पी-ब्लॉक प्रताप विहार और रोजवेली पब्लिक स्कूल के लिए विशेष महत्व का रहा। इस दिन विद्यालय में 79वां स्वतंत्रता दिवस और श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का संयुक्त भव्य समारोह आयोजित हुआ, जिसमें देशभक्ति और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। सुबह से ही विद्यालय परिसर एक अद्भुत रंगोली की तरह सजा-धजा नजर आ रहा था। चारों ओर तिरंगे की शान बिखरी हुई थी-दीवारों पर राष्ट्रध्वज के रंगों की सजावट, फहराते झंडे, चमचमाते बैनर और रंग-बिरंगी झालरें वातावरण को जीवंत बना रही थीं। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की झांकियों ने मानो वृंदावन का रूप धारण कर लिया था-मंच पर सजे माखन चोर, बांसुरी बजाते नंदलाल और राधा संग खड़े कान्हा के मनमोहक रूप ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
हर कोना उत्साह, उमंग और श्रद्धा से सराबोर था। बच्चों के चेहरों पर उल्लास की अनोखी चमक और आंखों में सपनों का उजास था। जैसे ही ‘जय हिंद’, ‘वन्दे मातरम्’ और ‘राधे-राधे’ के गगनभेदी नारे गूंजते, पूरा परिसर देशभक्ति और भक्ति के पवित्र संगम में डूब जाता। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के डायरेक्टर आशीष गौतम, प्रधानाचार्या पूनम गौतम, उपप्रधानाचार्या तनूजा और एकेडमिक हेड चेतन शर्मा द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराकर हुई। जैसे ही तिरंगा शान से लहराया, सभी ने खड़े होकर सलामी दी और पूरे जोश के साथ राष्ट्रगान गाया। यह क्षण वहां मौजूद हर व्यक्ति के दिल में गर्व और भावनाओं की लहर भर गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की छटा
इस अवसर पर विद्यार्थियों ने देशभक्ति और भक्ति दोनों रंगों में रंगी प्रस्तुतियां दीं। फैंसी ड्रेस, कृष्ण बांसुरी मेकिंग, कंदिल मेकिंग, दही-हांडी डेकोरेशन और क्राउन मेकिंग प्रतियोगिताओं में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता और कौशल का शानदार प्रदर्शन किया। छोटे-छोटे बच्चों ने राधा-कृष्ण, बलराम और सुदामा के रूप में मंच पर आकर दर्शकों का मन मोह लिया। श्रीकृष्ण लीलाओं पर आधारित नाटक ने सभी को वृंदावन की गलियों में पहुंचा दिया। बच्चों ने “श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारीज्” और देशभक्ति गीतों पर नृत्य करते हुए सभी का दिल जीत लिया। तालियों की गडग़ड़ाहट, ढोलक की थाप और बांसुरी की मधुर तान ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।
“आज़ादी को संजोकर रखना हम सबका कर्तव्य”
डायरेक्टर आशीष गौतम ने कहा कि 15 अगस्त केवल कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह भारत के गौरव, बलिदान और संघर्ष का प्रतीक है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने अपने प्राणों की आहुति देकर हमें यह अमूल्य आजादी दिलाई। हमें इसे सुरक्षित रखने के लिए एकजुट रहना होगा। देश के विकास में योगदान देने के लिए हर व्यक्ति को अपने क्षेत्र में ईमानदारी, मेहनत और समर्पण से कार्य करना चाहिए। तभी हम विश्व पटल पर भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित कर पाएंगे।
“शिक्षा का लक्ष्य चरित्र निर्माण और राष्ट्रप्रेम”
प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने कहा कि सच्ची शिक्षा वह है, जो हमें ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार, नैतिकता और देशभक्ति का भाव भी देती है। यदि शिक्षा में ये तत्व नहीं हैं, तो वह अधूरी है। स्वतंत्रता दिवस और जन्माष्टमी का एक साथ आना हमें यह सिखाता है कि कर्म, प्रेम और सेवा ही जीवन का वास्तविक मार्ग है। हर छात्र का कर्तव्य है कि वह अपने माता-पिता, समाज और देश का मान बढ़ाए।
“गीता का संदेश जीवन में उतारें”
उपप्रधानाचार्या तनूजा ने विद्यार्थियों को श्रीमद्भगवद्गीता का संदर्भ देते हुए कहा कि भगवान कृष्ण ने गीता में कहा है ‘कर्म करो, फल की चिंता मत करो’। हमें परिणाम की परवाह किए बिना अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने भी किसी डर या स्वार्थ के कारण पीछे हटना नहीं चुना। हमें भी अपनी जिम्मेदारियों को निडरता और ईमानदारी से निभाना चाहिए।
“देशभक्ति केवल शब्दों में नहीं, आचरण में भी”
एकेडमिक हेड चेतन शर्मा ने कहा कि देशभक्ति का अर्थ केवल नारे लगाना या मंच पर भाषण देना नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के जीवन में झलकनी चाहिए। समय पर पढ़ाई करना, अनुशासन का पालन करना, ईमानदारी से कार्य करना और अपने देश की प्रतिष्ठा को ऊंचा उठाना – यही सच्ची देशभक्ति है। हमें आने वाली पीढ़ी को ऐसे संस्कार देने होंगे कि वे हर जगह भारत की पहचान बनें।
भावनाओं से सराबोर कविता
कार्यक्रम के दौरान एक कविता ने सभी के दिल को छू लिया
“वीरों ने दी कुर्बानी अपनी,
मिला यह स्वतंत्रता का नाम।
गंगा की धारा, हिमालय का मान,
भारत माँ का है गौरव सम्मान।
एकता में शक्ति, प्रेम में पहचान,
यही है हमारे भारत की शान।”
इस कविता ने उपस्थित हर व्यक्ति को स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी का महत्व याद दिला दिया।
जयकारों के साथ हुआ समापन
समारोह का समापन राष्ट्रगान और “भारत माता की जय”, “वन्दे मातरम्”, “राधे-राधे” के गगनभेदी नारों के साथ हुआ।
तिरंगे की शान, श्रीकृष्ण की मुस्कान और बच्चों के उत्साह ने इस दिन को अविस्मरणीय बना दिया।




















