अफॉर्डेबल हाउसिंग संकट: देश के हाउसिंग सेक्टर की स्थिति पर व्यापारी समिति ने जताई गंभीर चिंता

-ट्रांस हिंडन बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन ने सरकार से बजट में ठोस कदम उठाने की मांग की, चेताया – 2030 तक 3 करोड़ यूनिट की कमी संभव

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। देश के हाउसिंग सेक्टर की मौजूदा स्थिति को लेकर ट्रांस हिंडन बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। संगठन के अध्यक्ष संदीप शुक्ला ने कहा कि हाउसिंग सेक्टर आज दोराहे पर खड़ा है। जहां लग्जरी हाउसिंग निरंतर नए रिकॉर्ड तोड़ रही है और निवेशकों की डिमांड बढ़ रही है, वहीं मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों के लिए घर का सपना धीरे-धीरे टूटता जा रहा है। एसोसिएशन ने सरकार से अपील की है कि 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट में अफॉर्डेबल हाउसिंग को प्राथमिकता दी जाए और ठोस घोषणाएं की जाएँ। संदीप शुक्ला ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक देश में अफॉर्डेबल हाउसिंग की कमी लगभग 3 करोड़ यूनिट तक पहुंच सकती है। वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में लगभग 94 लाख अफॉर्डेबल घरों की कमी है। संदीप शुक्ला ने बताया कि यह केवल संख्या का मामला नहीं है, बल्कि लाखों मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों का भविष्य, बच्चों की शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा इससे जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि अफॉर्डेबल हाउसिंग में देरी से हर साल करीब 15 लाख परिवार अपने घर का सपना खो देंगे। रियल एस्टेट सेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में अफॉर्डेबल हाउसिंग की हिस्सेदारी 38 प्रतिशत थी, जो 2025 में घटकर 18 प्रतिशत रह गई है। यह स्पष्ट संकेत है कि इस क्षेत्र पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि अफॉर्डेबल हाउसिंग केवल घरों का मामला नहीं है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक संतुलन का भी प्रश्न है। ट्रांस हिंडन बिल्डर वेलफेयर एसोसिएशन ने बजट में घर खरीदने वालों के लिए कर में छूट, हाउसिंग डेवलपर्स के लिए प्रोत्साहन पैकेज, आसान लोन और ब्याज में रियायत, भूमि पर टैक्स में छूट और सरकारी सहायता जैसे कदम उठाने की मांग की है।

संदीप शुक्ला ने कहा यदि सही समय पर नीतिगत हस्तक्षेप किया गया, तो न केवल हाउसिंग सेक्टर का विकास होगा, बल्कि मिडिल और लोअर मिडिल क्लास परिवारों के घर का सपना भी साकार होगा। अफॉर्डेबल हाउसिंग में देरी का मतलब हर साल लाखों परिवारों के सपनों का टूटना और सामाजिक असंतुलन बढऩा है। एसोसिएशन ने यह भी स्पष्ट किया कि अफॉर्डेबल हाउसिंग की समस्या केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे और मझौले शहरों में भी यह एक बड़ी चुनौती बन रही है। बजट में ठोस घोषणाएं होने से देश में हाउसिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी और आम नागरिकों के लिए घर का सपना साकार करना आसान होगा।