बिल्ड भारत एक्सपो 2025: दूसरे दिन 4000 से अधिक विजिटर्स ने किया भ्रमण, एमएसएमई और इंटरनेशनल ट्रेड पर हुई चर्चा

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय औद्योगिक प्रदर्शनी बिल्ड भारत एक्सपो 2025 (19 से 21 मार्च) के दूसरे दिन का आयोजन बेहद शानदार और सफल रहा। इस भव्य आयोजन में देश-विदेश के उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और व्यापारियों सहित 4000 से अधिक विजिटर्स ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। उन्होंने विभिन्न सेक्टर्स के नई तकनीकों, अत्याधुनिक उत्पादों और नवाचारों का न केवल अवलोकन किया, बल्कि इनसे जुड़ी व्यावसायिक संभावनाओं और भविष्य की रणनीतियों पर भी गहन चर्चा की। इस आयोजन ने एमएसएमई सेक्टर के विकास और वोकल फॉर लोकल से लोकल टू ग्लोबल के विजन को मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित किया। बिल्ड भारत एक्सपो के दूसरे दिन गुरुवार को वोकल फॉर लोकल से लोकल टू ग्लोबल थीम पर कई महत्वपूर्ण सेमिनार आयोजित किए गए। देश के कई प्रख्यात उद्योगपतियों, विशेषज्ञों और राजनेताओं ने इसमें भाग लिया। इस आयोजन की खास बात यह रही कि नाइजीरिया, इजराइल, इजिप्ट और फिजी के एंबेसेडर्स और डिप्लोमेट्स ने भी इसमें भाग लिया। उन्होंने भारतीय कंपनियों के साथ बी2बी मीटिंग्स कीं और टेक्सटाइल, स्टील और एक्सपोर्ट के क्षेत्र में व्यापार की संभावनाओं पर चर्चा की।

पर्यावरण संरक्षण और उद्योग की भूमिका:
आर्किटेक्ट गुरमीत सिंह, गौरव वरमानी, दीपक गहलोत और बबिता गोयल ने पर्यावरण संरक्षण में उद्योगों की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।

रेलवे और मेट्रो के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में अवसर:
आर्किटेक्ट दलजीत सिंह, गुल अग्रवाल, विधि अग्रवाल और डॉ. नम्रिता कलसी ने रेलवे और मेट्रो के क्षेत्र में एमएसएमई के लिए उपलब्ध संभावनाओं पर चर्चा की।

अंतरराष्ट्रीय बाजार:
पूर्व अपर मुख्य सचिव, उ.प्र. सरकार के अमित मोहन प्रसाद, डीजीएफटी के संतोष सांरगी और एफआईईओ के डीजी अजय सहाय ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की संभावनाओं पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारतीय उद्योगों के लिए वैश्विक बाजार में अपार संभावनाएं हैं और एमएसएमई सेक्टर के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को स्थापित करने का सुनहरा अवसर है। निर्यात के क्षेत्र में सरकार की ओर से कई प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ उठाकर भारतीय उद्यमी वैश्विक व्यापार में अपनी मजबूत पहचान बना सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता और विविधता को देखते हुए विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। एमएसएमई सेक्टर को निर्यात के क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, वित्तीय सहायता और लॉजिस्टिक्स सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। लोकल टू ग्लोबल के विजन को साकार करने के लिए एमएसएमई उद्यमियों को नई रणनीतियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकतम उपयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और विभिन्न औद्योगिक संस्थाओं के सहयोग से एमएसएमई सेक्टर को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए हरसंभव सहायता दी जाएगी। वहीं एफआईईओ के एक्स डीजी राकेश कुमार, ईपीसीएच सुदीप राजगधिया ने इंटरनेशनल मार्केट में एक्सपोर्ट्स की संभावनो पर अपने विचार रखे। इस पैनल डिस्कशन में आईआईए जीएसटी सब्जेक्ट कमेटी चेयरमैन शशांक शेखर गुप्ता एवं इंटरनेशनल अफेयर कमेटी के चेयरमैन अमन अग्रवाल ने भी अपने विचार रखे।

सेमिनार में भारत सरकार के प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञों ने स्वच्छ और हरित ऊर्जा पर साझा किए अपने विचार:
बिल्ड भारत एक्सपो 2025 के दूसरे दिन आयोजित हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा विषय पर केंद्रित सेमिनार में भारत सरकार के कई प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस सेमिनार में भारत सरकार के सचिव श्रीमती निधि खरे, पूर्व सचिव प्रवीन कुमार और पूर्व एपीसी आलोक सिन्हा ने मुख्य वक्ता और विशेषज्ञ के रूप में उपस्थिति दर्ज कराई। इस सेमिनार में स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उपयोग, भविष्य की संभावनाओं और उद्योग जगत में इसके प्रभाव पर गहन चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने से होने वाले दीर्घकालिक लाभों पर प्रकाश डाला और उद्योगों को पर्यावरण के अनुकूल बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए आवश्यक है, बल्कि यह उद्योगों की लागत को कम करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने में भी मददगार साबित होगी। इस अवसर पर आईआईए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दिनेश गोयल ने भी अपने विचार साझा करते हुए कहा, हरित ऊर्जा के उपयोग से उद्योगों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। सरकार द्वारा चलाई जा रही स्वच्छ ऊर्जा से संबंधित योजनाओं और सब्सिडी का लाभ उठाकर उद्योग जगत को पर्यावरण के अनुकूल और प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की दिशा में कार्य करना चाहिए। विशेषज्ञों ने उद्योगों को पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की जगह सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि हरित ऊर्जा के उपयोग से न केवल कार्बन फुटप्रिंट कम होगा, बल्कि यह भारतीय उद्योगों को वैश्विक मंच पर मजबूत करने में भी सहायक होगा। सेमिनार में मौजूद उद्योग प्रतिनिधियों ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में सरकार द्वारा दी जा रही सहायता और योजनाओं की सराहना की। विशेषज्ञों ने उद्योग जगत से हरित ऊर्जा के अधिकतम उपयोग का आह्वान किया और इसके लिए आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग का आश्वासन दिया।

एमएसएमई के लिए सिडबी की योजनाए:
सिडबी के क्षेत्रीय प्रबंधक राजीव कुमार ने एमएसएमई के लिए उपलब्ध योजनाओं की जानकारी दी। एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके विकास के लिए सिडबी की ओर से कई महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं। एमएसएमइ उद्यमियों को वित्तीय सहायता देने के लिए सिडबी के विभिन्न कार्यक्रमों और योजनाओं को और अधिक सरल और सुगम बनाया गया है। उद्यमियों को अपने व्यवसाय के विस्तार और तकनीकी उन्नयन के लिए सिडबी की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सिडबी एमएसएमई के विकास के लिए विभिन्न वित्तीय योजनाओं, रियायती ऋण और सहायक कार्यक्रमों के माध्यम से देश के उद्योग जगत को मजबूती देने के लिए प्रतिबद्ध है।

4000+ विजिटर्स ने एक्सपो में दिखाया उत्साह:
4000 से अधिक विजिटर्स ने विभिन्न स्टॉल्स पर जाकर नए इनोवेशन और तकनीकों के बारे में जानकारी ली। भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय बिल्ड भारत एक्सपो 2025 के दूसरे दिन का आयोजन शानदार रहा। इस दिन 4000 से अधिक विजिटर्स ने प्रदर्शनी का भ्रमण कर नई तकनीकों, उत्पादों और इनोवेशन का अनुभव लिया। नाइजीरिया, इजराइल, इजिप्ट और फिजी के डिप्लोमेट्स ने भी व्यापार की संभावनाओं पर चर्चा की। विभिन्न सेमिनारों में वोकल फॉर लोकल से लोकल टू ग्लोबल जैसे विषयों पर विशेषज्ञों ने विचार साझा किए। प्रतिभागियों ने एमएसएमई क्षेत्र के विकास को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। 21 मार्च शुक्रवार को एक्सपो के समापन समारोह में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगी।

एमएसएमई को मिलेगा प्रोत्साहन
आईआईए के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज सिंघल ने कहा एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और इसके सशक्तिकरण के लिए ठोस नीतिगत सुधारों की आवश्यकता है। लीजहोल्ड औद्योगिक भूमि को फ्री होल्ड में बदलना एमएसएमई के विकास के लिए बेहद जरूरी है। इससे उद्यमियों को भूमि पर स्वामित्व का अधिकार मिलेगा, जिससे वे अधिक आत्मनिर्भर बन सकेंगे और अपने व्यापार का विस्तार आसानी से कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि देश में एक समान (यूनिफॉर्म) लैंड पॉलिसी लागू करने की जरूरत है ताकि सभी राज्यों में एमएसएमई के लिए समान नियम और सुविधाएं मिल सकें। इससे न केवल नए उद्योगों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि छोटे और मध्यम उद्योगों को भी वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने का अवसर मिलेगा। नीरज सिंघल ने सरकार से आग्रह किया कि एमएसएमई सेक्टर को सशक्त बनाने के लिए वित्तीय सहायता, सरल ऋण प्रक्रिया और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं का विस्तार किया जाए। एमएसएमई को मजबूत किए बिना आत्मनिर्भर भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता।