गाजियाबाद के कल्लूगढ़ी में चला बुलडोजर, एक हेक्टेयर सरकारी जमीन से हटाया गया अवैध मदरसा; प्रशासन का बड़ा एक्शन

-मुख्यमंत्री के निर्देशों पर गाजियाबाद प्रशासन की सख्त कार्रवाई, 1.23 करोड़ रुपये हर्जाने के आदेश के बाद ध्वस्तीकरण
-जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ की मौजूदगी में चला अभियान, भारी पुलिस बल और आरआरएफ रही तैनात
-सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जों के खिलाफ जारी रहेगा अभियान, दोषियों से होगी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत बुधवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डासना क्षेत्र के कल्लूगढ़ी में ग्राम सभा की भूमि पर बने अवैध मदरसे को बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। लगभग एक हेक्टेयर सरकारी जमीन पर निर्मित इस मदरसे के खिलाफ लंबे समय से राजस्व एवं प्रशासनिक कार्रवाई चल रही थी। प्रशासनिक आदेशों और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद आखिरकार जिला प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर अवैध निर्माण को जमींदोज कर दिया। बुधवार सुबह से ही डासना के कल्लूगढ़ी क्षेत्र में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई थी। जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में भारी पुलिस बल और आरआरएफ की तैनाती की गई। सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के बाद बुलडोजरों की मदद से मदरसा जामिया अरबिया इशातुल इस्लाम के भवन को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू की गई, जो देर तक जारी रही। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह निर्माण ग्राम डासना के खसरा संख्या-1548 ख की भूमि पर किया गया था।

राजस्व अभिलेखों में यह भूमि ग्राम सभा एवं सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है। आरोप है कि मदरसा प्रबंधन समिति ने वर्ष 2021 से इस भूमि पर अवैध कब्जा कर पक्का निर्माण कराया था। लगभग एक हेक्टेयर क्षेत्र में सात बड़े कमरे, दो शौचालय, एक विद्युत कक्ष, टिन शेड वाले दो अतिरिक्त कमरे, पार्कनुमा क्षेत्र, निर्माणाधीन ढांचा तथा चारदीवारी का निर्माण किया गया था। स्थानीय लोगों के अनुसार मदरसा पिछले करीब तीन वर्षों से बंद पड़ा हुआ था, लेकिन निर्माण यथावत मौजूद था। प्रशासन ने पहले भी कई बार नोटिस जारी कर कब्जा हटाने और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया था। इसके बावजूद कब्जा नहीं हटाया गया। राजस्व विभाग की रिपोर्ट के आधार पर उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 की धारा-67 के अंतर्गत वाद संचालित किया गया। तहसीलदार न्यायिक एवं असिस्टेंट कलेक्टर प्रथम श्रेणी द्वारा पारित आदेश में मदरसा प्रबंधन को भूमि से बेदखल करने के साथ-साथ 1 करोड़ 23 लाख रुपये का हर्जाना जमा करने के निर्देश भी दिए गए थे। प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार आदेश पारित होने के बावजूद अवैध कब्जा जारी रहा और निर्धारित समय सीमा के भीतर भूमि खाली नहीं की गई।

इसके बाद जिला प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का निर्णय लिया। बुधवार को जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़, अपर जिलाधिकारी (भू-अध्याप्ति) अवनीश सिंह, एडिशनल पुलिस कमिश्नर कानून-व्यवस्था राज करन नैय्यर, डीसीपी ग्रामीण सुरेन्द्र नाथ तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे और पूरे अभियान की निगरानी करते रहे।
जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मॉंदड़ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जनपद में सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराने का अभियान निरंतर जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति, संस्था या संगठन को सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन का उद्देश्य केवल भूमि को मुक्त कराना ही नहीं, बल्कि सरकारी राजस्व को क्षति पहुंचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना भी है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा किया है, उनके खिलाफ नियमानुसार वसूली की जाएगी और आवश्यकता पडऩे पर दंडात्मक कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।

एडिशनल पुलिस कमिश्नर राज करन नैय्यर और डीसीपी ग्रामीण सुरेन्द्र नाथ तिवारी ने बताया कि अवैध निर्माण और बिना वैध अनुमति संचालित गतिविधियों के संबंध में विधिक कार्रवाई भी की गई है। संबंधित संचालक फारूख बेग निवासी दिल्ली के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया है और मामले की आगे की जांच की जा रही है। गौरतलब है कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग द्वारा जनपद में सरकारी भूमि पर बने मदरसों और कब्रिस्तानों का सर्वे कराया गया था। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार जिले में ऐसे सैकड़ों मामले चिन्हित किए गए हैं, जिनकी जांच और सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है।

हाल ही में कई वक्फ संपत्तियों के सूचीकरण को भी निरस्त किया गया है और संबंधित पक्षों से अभिलेख मांगे गए हैं। कल्लूगढ़ी में हुई यह कार्रवाई प्रशासन के उस अभियान का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों को समाप्त कर सार्वजनिक संपत्तियों को सुरक्षित किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में भी इसी प्रकार की कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी स्तर पर अवैध कब्जों को संरक्षण नहीं दिया जाएगा। जिला प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वालों के खिलाफ अब सख्त और निर्णायक कार्रवाई का दौर जारी रहेगा।