– पुलिस की जांच में खुला खेल, कैशियर का सटोरिये के साथ थे प्रगाढ़ संबंध
– चिकनी चुपड़ी बातें करके रिकार्ड दिखाने में अधिकारी को कर रहा था आनाकानी
उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। बिजली विभाग में हुए करोड़ों रुपये के गबन के मामले में पुलिस को बिजली विभाग के कर्मचारी और सटोरियों के बीच प्रगाढ़ सबंध के सबूत मिले हैं। पकड़े गये कर्मचारी और उसके संबंधों के आधार पर पुलिस मामले की तह तक जाने के लिए उसके बैंक खातों की जांच के साथ सगे संबंधियों की गतिविधियों पर भी नजर रख रही है। उधर, बिजली विभाग ने भी कैश काउंटर पर बैठने वाले कर्मचारियों एवं कैश बुक का रिकार्ड अपडेट रखने को लेकर विभागीय निर्देश भी जारी कर दिया है। विभागीय जांच में यह जानकारी सामने आई है कि कैश काउंटर पर बैठने वाले कर्मचारी ने अधिकारी को धोखे में रखा और कैशबुक एवं बैक स्टटमेंट को लेकर गलत जानकारियां भी दी। इस मामले में एकाउंटेंट की भूमिका की भी विस्तृत जांच हो रही है। अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पाल सिंह की सक्रियता का असर रहा कि आरोपी पुलिस की पकड़ में आया। नहीं तो आरोपी और भी बड़ा खेल कर जाता। सीओ द्वितीय अवनीश कुमार ने बताया कि मामले के अन्य आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस दबिश दे रही है और सटोरियों के बारे में पूरी जानकारी जुटा रही है।
ज्ञात हो कि पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम गाजियाबाद जोन के वितरण चांड- सप्तम में तैनात हैड कैशियर ने कोरोना संकटकाल के दौरान कैश काउंटर पर जमा होने वाली रकम को बैंक में जमा नहीं कराया। पिछले महीने मामला संज्ञान में आने के बाद सप्तम खंड के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र पाल सिंह ने खंड में तैनात हैड कैश्यिर सुमित गुप्ता के खिलाफ सिहानी गेट कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया। शुरूआत में लगभग 3 करोड़ रुपये के गबन का संदेह था। लेकिन जब बाद में जांच की गई तो यह साढ़े 5 करोड़ रुपये से अधिक का मामला निकला। पुलिस जांच में पता चला कि सप्तम खंड में हेड कैशियर के पद पर तैनात सुमित गुप्ता ने उपभोक्ताओं द्वारा जमा कराई बिजली बिल की राशि को पूरी जमा होना दिखाकर कागजों में गड़बड़ी की थी। लेकिन रकम बैंक में जमा नहीं कराया। मुकदमा दर्ज होने के बाद सुमित फरार हो गया। पुलिस ने मेरठ से फरार चल रहे निलंबित हेड कैश्यिर सुमित गुप्ता और सचिन शर्मा मेरठ को दीवान अस्पताल के पास पटेल नगर से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से 11.52 लाख रुपए बरामद किए गए।
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पुलिस की तफ्तीश में इसके सहयोगी सचिन शमाज् पर भी राजस्व का गबन करने में लिप्त पाया गया। इन दोनों ने निगम का करीब 5.64 करोड़ रुपए गबन किया था। सुमित गुप्ता के कब्जे से 10.81 लाख रुपए और सचिन शमाज् के कब्जे से 71 हजार रुपए समेत 11.51 लाख रुपए बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार सुमित गुप्ता ने पूछताछ के दौरान बताया कि बिजली घर से गबन किए गए रुपए में से कुछ रुपए अमन पुत्र पवन माहेश्वरी निवासी मेरठ,राहुल गुप्ता पुत्र योगेश गुप्ता निवासी राधाकुंज कालोनी को दे रखा हंै। वहीं कुछ रुपए वह जुए सट्टा में हार गया है।
अधिशासी अभियंता की सजगता से फूटा भांडा
करोड़ों के गबन का आरोपी सुमित गुप्ता ने बड़े ही शातिराना ढ़ंग से करोड़ों रुपये का गबन किया। कोरोना संकटकाल और अधिशासी अभियंता एसपी सिंह की पत्नी के बीमार होने का उसने फायदा उठाया। पत्नी के बीमार होने के कारण अधिशासी अभियंता कुछ समय से परेशान थे और डॉक्टरों के चक्कर में व्यस्त थे। एसपी सिंह जब भी उससे कैश बुक की डिटेल मांगते तो वह मामले को टाल जाता और कभी आॅफिस में ना होने तो कभी छुट्टी का बहाना बना लेता। शक होने पर अधिशासी अभियंता ने मामले की जांच कराई तब जाकर भांडा फूटा। सुमित गुप्ता को पकड़वाने में भी अधिशासी अभियंता ने काफी मेहनत की। कई बार पुलिसकर्मियों को दबिश के दौरान महत्वपूर्ण जानकारियां दी। आरोपियों और उसके नजदीकियों के बारे में जानकारियां जुटा कर उसे पुलिस के हाथों पकड़वाने में मदद की।
















