मां के शोक में भी जनसैलाब, इंद्र प्रताप तिवारी ‘खब्बू’ की जनस्वीकृति ने रचा इतिहास

-शांति भोज में उमड़ा एक लाख से अधिक लोगों का सैलाब, राजनीति और समाज की हर सीमा हुई ध्वस्त

उदय भूमि संवाददाता
अयोध्या। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बाहुबली और जनप्रिय नेता के रूप में पहचान बना चुके इंद्र प्रताप तिवारी ‘खब्बू’ का प्रभाव और स्वीकार्यता आज भी उसी मजबूती से कायम है। उनकी पूज्य माताजी के निधन के उपरांत आयोजित शांति भोज कार्यक्रम ने न केवल सामाजिक समरसता का संदेश दिया, बल्कि यह भी दिखा दिया कि जननेताओं की असली ताकत सत्ता नहीं, बल्कि जनता का भरोसा होती है। गुरुवार को अवध इंटरनेशनल स्कूल परिसर में आयोजित शांति भोज कार्यक्रम में देशभर से आए नामचीन नेताओं, संत-महंतों, समाजसेवियों और आम नागरिकों ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित की। अयोध्या, गोंडा, अम्बेडकरनगर, सुल्तानपुर, जौनपुर, अमेठी, बहराइच, गाजियाबाद, नोएडा, दिल्ली, उत्तराखंड, लखनऊ, प्रयागराज और वाराणसी सहित सैकड़ों जिलों से पहुंचे लोगों की संख्या करीब एक लाख से अधिक बताई जा रही है। कार्यक्रम की विशालता ऐसी थी कि लोगों को अपने वाहन दूर सड़क किनारे पार्क कर पैदल परिसर तक पहुंचना पड़ा। यह आयोजन अपने आकार और सहभागिता के कारण एक मिसाल बन गया।

राजनीतिक इतिहास में शायद ही किसी नेता या अधिकारी के यहां शोक अवसर पर इतना बड़ा और अनुशासित जनसमूह एकत्र हुआ हो। यह भी उल्लेखनीय रहा कि खब्बू तिवारी को केवल एक वर्ग या जाति तक सीमित नेता नहीं माना गया। ब्राह्मण समाज के साथ-साथ अन्य जातियों और धर्मों के लोगों की भागीदारी ने यह स्पष्ट कर दिया कि उनकी स्वीकार्यता सर्वसमाज में है। संत-महंत, मुस्लिम, सिख और हिंदू समाज के प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को सामाजिक एकता का प्रतीक बना दिया। खब्बू तिवारी की लोकप्रियता यूं ही नहीं बनी। बीते चौदह दिनों से यह दृश्य लगातार देखने को मिला कि जैसे ही लोगों को माताजी के निधन का समाचार मिला, वे स्वत: उनके आवास की ओर खिंचे चले आए। कहा जाता है कि सुख में तो बहुत से लोग साथ होते हैं, लेकिन दुख की घड़ी में जो साथ खड़ा रहे वही सच्चा मित्र और शुभचिंतक होता है।

यह सच्चाई खब्बू तिवारी के यहां साफ दिखाई दी। कार्यक्रम में सभी राजनीतिक दलों की सीमाएं टूटती नजर आईं। समाजवादी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी, अपना दल सहित विभिन्न दलों के नेताओं के साथ-साथ बिहार सरकार के जदयू के एक कैबिनेट मंत्री, बड़े समाचार चैनलों और अख़बारों के संपादक, मीडिया समूहों के मालिक, उद्योगपति और आमजन बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इनमें वे लोग भी शामिल थे, जिनके लिए खब्बू तिवारी एक सहारा, एक भरोसा और एक आवाज माने जाते हैं। माताजी के निधन से भीतर से टूटे होने के बावजूद इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू पूरे समय संयम और मजबूती के साथ लोगों से मिलते रहे। उन्होंने कभी यह आभास नहीं होने दिया कि वह किस गहरे निजी दु:ख से गुजर रहे हैं।

जानने वाले बताते हैं कि बीते कई महीनों से वह लखनऊ के नामचीन अस्पताल में अपनी मां की सेवा में लगे रहे और साथ ही क्षेत्र की सेवा से भी कभी दूर नहीं हुए। यह वही संस्कार हैं, जो उन्हें अपनी मां से मिले और जिन्हें उनके अनुज शिक्षक भूपेश जी भी पूरी निष्ठा से निभाते रहे। गुरुवार को अवध इंटरनेशनल स्कूल परिसर सुबह नौ बजे से ही श्रद्धांजलि देने वालों से भरने लगा और यह सिलसिला देर रात तक चलता रहा। यह दृश्य केवल शोक का नहीं, बल्कि उस जनसेवा, संस्कार और विश्वास का प्रमाण था, जो वर्षों की मेहनत से अर्जित होता है। यही है इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू की असली ताकत, जो समय और परिस्थितियों से परे आज भी लोगों के दिलों में कायम है।