साइबर ठगों पर कसेगा शिकंजा, पुलिस-बैंक मिलकर बनाएंगे सुरक्षित गाजियाबाद

-पुलिस, बैंक और जनता मिलकर ही साइबर अपराध पर लगा सकते हैं प्रभावी रोक: केशव कुमार चौधरी
-संदिग्ध खातों पर निगरानी, 1930 हेल्पलाइन और संयुक्त जागरूकता अभियान से साइबर अपराध रोकने की रणनीति तय
-साइबर ठगी रोकने को पुलिस और बैंकिंग तंत्र एक मंच पर, संदिग्ध लेन-देन की निगरानी और त्वरित कार्रवाई के दिए निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जनपद में लगातार बढ़ रहे साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने और बैंकिंग प्रणाली को अधिक सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से मंगलवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। मंगलवार को अतिरिक्त पुलिस आयुक्त मुख्यालय एवं अपराध केशव कुमार चौधरी की अध्यक्षता में जिले के सभी बैंकों के नोडल अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक का मुख्य उद्देश्य साइबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाना, बैंक और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा आम नागरिकों को डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक करना रहा। बैठक के दौरान अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराधियों द्वारा नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बनाया जा रहा है, जिससे आम जनता की मेहनत की कमाई खतरे में पड़ रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि साइबर अपराध केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन चुका है। इसलिए पुलिस और बैंकिंग संस्थानों के बीच त्वरित सूचना साझा करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक में उपस्थित बैंक नोडल अधिकारियों के साथ साइबर फ्रॉड के हालिया मामलों का विश्लेषण किया गया।

इस दौरान पाया गया कि अधिकांश मामलों में समय रहते लेन-देन को रोकने पर पीडि़तों की धनराशि बचाई जा सकती है। अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने निर्देश दिया कि सभी बैंक संदिग्ध खातों, असामान्य ट्रांजेक्शन और अचानक बड़ी धनराशि के ट्रांसफर पर विशेष निगरानी रखें। उन्होंने कहा कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल साइबर सेल और स्थानीय पुलिस को उपलब्ध कराई जाए ताकि त्वरित कार्रवाई संभव हो सके। बैठक में यह भी जोर दिया गया कि साइबर फ्रॉड की शिकायत प्राप्त होने के बाद शुरुआती  ‘गोल्डन टाइम’ अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। यदि बैंक और पुलिस समयबद्ध समन्वय से कार्य करें तो ठगी की रकम को रोकने या वापस कराने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों ने बैंक प्रतिनिधियों को साइबर अपराध से संबंधित शिकायतों के त्वरित निस्तारण की प्रक्रिया विस्तार से समझाई।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त ने साइबर हेल्पलाइन 1930 के प्रभावी उपयोग पर विशेष बल देते हुए कहा कि आम नागरिकों को इस हेल्पलाइन के बारे में अधिक से अधिक जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने बैंक अधिकारियों से आग्रह किया कि बैंक शाखाओं, एटीएम केंद्रों तथा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साइबर सुरक्षा संबंधी जागरूकता संदेश प्रदर्शित किए जाएं। इसके साथ ही ग्राहकों को ओटीपी साझा न करने, अज्ञात लिंक पर क्लिक न करने और फर्जी कॉल से सतर्क रहने के लिए लगातार जागरूक किया जाए। बैठक में संयुक्त जागरूकता अभियान चलाने पर भी सहमति बनी। पुलिस और बैंक मिलकर स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों तथा आवासीय क्षेत्रों में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे, ताकि डिजिटल लेन-देन करने वाले नागरिकों को संभावित खतरों से बचाया जा सके।

अधिकारियों ने माना कि साइबर अपराध रोकने का सबसे प्रभावी तरीका तकनीकी सतर्कता के साथ-साथ जनभागीदारी है। अंत में अतिरिक्त पुलिस आयुक्त केशव कुमार चौधरी ने कहा कि साइबर अपराधों पर नियंत्रण तभी संभव है जब पुलिस, बैंकिंग संस्थान और आम नागरिक एक टीम के रूप में कार्य करें। उन्होंने सभी नोडल अधिकारियों को निर्देशित किया कि साइबर फ्रॉड के मामलों में संवेदनशीलता, तत्परता और जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाए। बैठक में मौजूद अधिकारियों ने साइबर अपराध मुक्त गाजियाबाद बनाने के लिए पूर्ण सहयोग और सक्रिय सहभागिता का भरोसा भी व्यक्त किया।