डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की रणनीति से कैश वैन लूट का पर्दाफाश, 6 महीने की रेकी करने वाला गैंग बेनकाब

-दिनदहाड़े डकैती का खुलासा, 8.06 लाख बरामद- पुलिस की सटीक जांच से दो शातिर गिरफ्तार
-सीसीटीवी, सर्विलांस और टीमवर्क बना सफलता की कुंजी, फरार आरोपियों की तलाश तेज
-डीसीपी सिटी की सख्त मॉनिटरिंग से अपराधियों पर शिकंजा, पुलिस की सक्रिय कार्यशैली की मिसाल

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र के कृष्णानगर बागू में छह मई को हुई सनसनीखेज एटीएम कैश वैन लूट की घटना का पुलिस ने प्रभावी कार्रवाई करते हुए सफल खुलासा कर दिया है। संयुक्त पुलिस टीम की इस बड़ी सफलता के पीछे डीसीपी सिटी धवल जायसवाल की सक्रिय निगरानी, रणनीतिक योजना और सतत मॉनिटरिंग को अहम माना जा रहा है। स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से लूटे गए 8 लाख 6 हजार रुपये, घटना में प्रयुक्त बलेनो कार, अवैध तमंचा, कारतूस तथा कुल्हाड़ी बरामद की गई है। पुलिस के अनुसार इस लूट को छह बदमाशों के संगठित गिरोह ने अंजाम दिया था, जिन्होंने करीब छह महीने तक कैश वैन की गतिविधियों पर नजर रखी और चार बार ट्रायल करने के बाद वारदात को अंजाम दिया। डीसीपी सिटी ने सोमवार को प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि पकड़े गए बदमाशों की पहचान मोहम्मद कैफ (23) निवासी प्रताप विहार विजयनगर और मोहम्मद रिजवान (20) निवासी माता कॉलोनी विजयनगर के रूप में हुई है। पूछताछ में सामने आया कि दोनों आरोपी लूट की पूरी साजिश में सक्रिय रूप से शामिल थे। घटना के तुरंत बाद डीसीपी सिटी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बहुस्तरीय जांच प्रणाली लागू की।

आठ पुलिस टीमों का गठन किया गया और सीसीटीवी फुटेज, सर्विलांस डाटा, वाहन मूवमेंट और तकनीकी साक्ष्यों को एक साथ जोड़कर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस ने एनएच-9 हाईवे, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे, मोदीनगर, मुरादनगर और कांवड़ मार्ग तक संदिग्ध वाहनों की गतिविधियों को खंगाला। इसी क्रम में बिना नंबर प्लेट की बलेनो कार पुलिस के रडार पर आई, जो बाद में गैंग के मास्टरमाइंड जुबैर की निकली। डीसीपी सिटी की निगरानी में पुलिस टीमों ने लगातार दबिश अभियान चलाया, जिसके परिणामस्वरूप चिपियाना अंडरपास क्षेत्र से आरोपी मोहम्मद कैफ को गिरफ्तार किया गया। उसकी निशानदेही पर मोहम्मद रिजवान को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

कैश वैन लूट जैसे हाई-प्रोफाइल केस का खुलासा करने पर एडिशनल पुलिस कमिश्नर मुख्यालय एवं अपराध द्वारा स्वाट टीम, क्राइम ब्रांच और क्रॉसिंग रिपब्लिक पुलिस टीम को 50 हजार रुपये नकद पुरस्कार देने की घोषणा की गई है। डीसीपी सिटी ने कहा कि गाजियाबाद में संगठित अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। आधुनिक तकनीक, मजबूत पुलिस नेटवर्क और सक्रिय फील्ड पुलिसिंग के माध्यम से अपराधियों को जल्द कानून के शिकंजे में लाया जाएगा। कैश वैन लूट का यह खुलासा न केवल पुलिस की दक्षता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि योजनाबद्ध अपराध कितने भी शातिर तरीके से क्यों न किए जाएं, पुलिस की सतर्कता और नेतृत्व क्षमता के सामने ज्यादा देर टिक नहीं सकते।

6 महीने की रेकी और 4 बार ट्रायल
जांच में सामने आया कि गिरोह ने बेहद सुनियोजित तरीके से वारदात को अंजाम दिया। मास्टरमाइंड जुबैर को पहले से जानकारी थी कि इंडिया वन कंपनी की कैश वैन रोजाना कृष्णानगर बागू स्थित एटीएम में नकदी भरने आती है। बदमाशों ने छह महीने तक कैश वैन की टाइमिंग, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की गतिविधियों का अध्ययन किया। चार बार नकली ट्रायल कर यह तय किया गया कि कितने मिनट में वारदात पूरी की जा सकती है और किस मार्ग से फरार होना आसान रहेगा। छह मई की दोपहर बदमाश हथियारों के साथ दो घंटे पहले ही मौके पर पहुंच गए। जैसे ही कैशियर और गनमैन एटीएम की ओर गए, आरोपियों ने चालक तेजपाल को तमंचे के बल पर नीचे उतार दिया और कैश वैन लेकर फरार हो गए।

चलती वैन में तोड़े सीसीटीवी और लूटी नकदी
भागते समय बदमाशों ने कुल्हाड़ी और ग्राइंडर की मदद से कैश वैन के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और डीवीआर निकाल लिया, ताकि पहचान न हो सके। इसके बाद कैश बॉक्स से 27 लाख रुपये निकालकर बलेनो कार में रखे गए और कैश वैन को दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर छोड़ दिया गया। बाद में डासना मसूरी स्थित एक मकान में सभी आरोपियों ने नकदी का बंटवारा किया। पुलिस ने रकम बांटने वाले मकान मालिक को भी मुकदमे में आरोपी बनाया है। डीसीपी धवल जायसवाल की कार्यशैली बनी सफलता का आधार पूरे ऑपरेशन में डीसीपी सिटी की कार्यशैली स्पष्ट रूप से सामने आई। उन्होंने केवल कागजी जांच तक सीमित रहने के बजाय फील्ड इंटेलिजेंस, टेक्निकल सर्विलांस और टीम समन्वय पर विशेष जोर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार जांच के हर चरण की मॉनिटरिंग स्वयं डीसीपी स्तर से की गई। लगातार समीक्षा बैठकों, त्वरित निर्णय और टीमों के बीच बेहतर तालमेल के कारण केस जल्द खुल सका। डीसीपी ने स्पष्ट किया कि संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है और फरार आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। सभी फरार बदमाशों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है।

मास्टरमाइंड की तलाश तेज
जांच में खुलासा हुआ कि गैंग का सरगना जुबैर मूल रूप से मुजफ्फरनगर के खतौली क्षेत्र का निवासी है और लंबे समय से विजयनगर में रह रहा था। उसने अपने रिश्तेदारों और परिचितों को शामिल कर गिरोह तैयार किया था। पुलिस अब जुबैर सहित अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। पुलिस टीमों को अलग-अलग जिलों में रवाना किया गया है।