केवल सोना नहीं, विकास आधारित निवेश की ओर बढ़ रहा देश – बदल रही है निवेश की नई सोच

– प्रधानमंत्री की सलाह ने निवेश को लेकर बदली आम लोगों की मानसिकता
– संपत्ति सुरक्षित रखने से आगे बढ़कर संपत्ति निर्माण पर जोर
-संतुलित निवेश, बीमा सुरक्षा और धैर्य ही आर्थिक मजबूती की कुंजी

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। देश की बदलती आर्थिक परिस्थितियों, तेज़ी से बढ़ती वित्तीय जागरूकता और विकासोन्मुख अर्थव्यवस्था के बीच निवेश की पारंपरिक सोच में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। लंबे समय तक भारतीय परिवारों में सोना बचत और सुरक्षा का सबसे भरोसेमंद माध्यम माना जाता रहा है, लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि समय की मांग केवल बचत नहीं बल्कि योजनाबद्ध निवेश के माध्यम से संपत्ति निर्माण करना है। वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी के अनुसार प्रधानमंत्री द्वारा समय-समय पर उत्पादक निवेश को बढ़ावा देने की बात ने आम नागरिकों को नई दिशा दी है। उनका कहना है कि देश अब केवल पारंपरिक बचत मॉडल से आगे बढ़कर विकास आधारित निवेश व्यवस्था की ओर बढ़ रहा है, जहां नागरिक सीधे देश की आर्थिक प्रगति के भागीदार बन सकते हैं। रविंद्र तिवारी बताते हैं कि भारतीय परिवारों में सोना आज भी सुरक्षित निवेश माना जाता है और यह आर्थिक संकट के समय सहारा देता है, लेकिन केवल सोने पर निर्भर रहना भविष्य की बड़ी वित्तीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। वर्तमान समय में महंगाई, शिक्षा खर्च, स्वास्थ्य सेवाएं और जीवन स्तर में बढ़ोतरी को देखते हुए धन को बढ़ाने वाली योजनाओं में निवेश करना आवश्यक हो गया है।

उनके अनुसार आज का दौर केवल धन सुरक्षित रखने का नहीं बल्कि धन निर्माण का है। यदि व्यक्ति अपनी आय का एक हिस्सा योजनाबद्ध तरीके से विकासशील क्षेत्रों में निवेश करता है तो लंबे समय में आर्थिक स्थिरता और संपत्ति दोनों प्राप्त की जा सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि देश में आत्मनिर्भर भारत अभियान, आधारभूत संरचना विकास, डिजिटल व्यवस्था, विनिर्माण क्षेत्र और नवाचार आधारित उद्योगों को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। ऐसे में यदि नागरिक निवेश के माध्यम से इन क्षेत्रों से जुड़ते हैं तो उन्हें आर्थिक लाभ के साथ राष्ट्रीय विकास में योगदान देने का अवसर भी मिलता है। रविंद्र तिवारी का कहना है कि सोना सुरक्षा देता है, लेकिन उद्योग, रोजगार और उत्पादन में प्रत्यक्ष योगदान नहीं देता। इसके विपरीत शेयर बाजार, सामूहिक निवेश योजनाएं और विकास आधारित क्षेत्रों में निवेश लंबे समय में बेहतर लाभ की संभावना उत्पन्न करते हैं।

धैर्य और सही रणनीति के साथ किया गया निवेश भविष्य में मजबूत आर्थिक आधार तैयार कर सकता है। वे बताते हैं कि हर व्यक्ति बड़ी राशि से निवेश शुरू नहीं कर सकता। ऐसे में नियमित अंतराल पर छोटी बचत को योजनाबद्ध निवेश के रूप में लगाना बेहतर विकल्प है। इससे धीरे-धीरे बड़ा कोष तैयार किया जा सकता है और आर्थिक लक्ष्य आसानी से पूरे किए जा सकते हैं। वित्तीय सुरक्षा के विषय में उन्होंने विशेष रूप से स्वास्थ्य बीमा और जीवन सुरक्षा बीमा को अनिवार्य बताया। उनका कहना है कि एक गंभीर बीमारी या आकस्मिक घटना वर्षों की बचत को समाप्त कर सकती है। इसलिए किसी भी परिवार की आर्थिक योजना की पहली सीढ़ी सुरक्षा कवच तैयार करना होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने आपातकालीन निधि बनाने पर भी जोर दिया। उनके अनुसार प्रत्येक परिवार को कम से कम छह महीने के खर्च के बराबर धन सुरक्षित रूप से अलग रखना चाहिए, ताकि अचानक उत्पन्न परिस्थितियों में आर्थिक दबाव से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त कुछ निवेश सुरक्षित योजनाओं, सावधि जमा और सरकारी प्रतिभूतियों में रखना संतुलित निवेश रणनीति माना जाता है।

निवेश के मूल सिद्धांत पर प्रकाश डालते हुए रविंद्र तिवारी कहते हैं कि सफलता का सबसे बड़ा मंत्र धैर्य, अनुशासन और सही जानकारी है। बाजार में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन दीर्घकालीन दृष्टिकोण रखने वाले निवेशकों को समय के साथ बेहतर परिणाम मिलते हैं। भारत तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में विश्व मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रहा है। ऐसे समय में निवेशकों के लिए यह अवसर है कि वे केवल पारंपरिक बचत तक सीमित न रहें, बल्कि विकास आधारित निवेश को अपनाकर स्वयं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएं। निवेश की बदलती यह सोच संकेत देती है कि आने वाला समय उन लोगों का होगा जो समझदारी, योजना और धैर्य के साथ आर्थिक निर्णय लेंगे। केवल सोना जमा करने की परंपरा से आगे बढ़कर देश की विकास यात्रा के साथ कदम मिलाना ही आज की नई आर्थिक समझ बनती जा रही है।