विकास आयुक्त (हथकरघा) ने ‘संरचना’ एक्सपो का किया भव्य निरीक्षण, भारतीय हथकरघा की विविधता को सराहा

-विशेष फैशन शोकेस में भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा की जीवंत झलक
-कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के उत्कृष्ट शिल्प को राष्ट्रीय मंच पर मिला अवसर
-एक्सपो का उद्देश्य हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहन और बाजार सशक्तिकरण

उदय भूमि संवाददाता
नई दिल्ली। जनपथ स्थित हैंडलूम हाट में आयोजित हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट एक्सपो ‘संरचना’ का बुधवार को विकास आयुक्त (हथकरघा), वस्त्र मंत्रालय डॉ. एम. बीना ने भव्य निरीक्षण किया। उन्होंने प्रदर्शनी में लगे विभिन्न स्टॉलों का दौरा कर देशभर से आए बुनकरों और स्वयं सहायता समूहों से संवाद किया तथा उनके उत्कृष्ट शिल्प की सराहना की। इस अवसर पर आयोजित विशेष फैशन शोकेस  ‘भारत वीव्स – प्राइड इन एवरी यार्न’ ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। पांच प्रमुख संग्रहों के माध्यम से भारतीय हथकरघा और शिल्प परंपरा की विविधता को दर्शाया गया। ‘वैदिक कलेक्शन- टाइमलेस हेरिटेज’Ó ने प्राचीन वैदिक परंपराओं से प्रेरित डिज़ाइन को आधुनिक परिधानों में पेश किया, जबकि ‘खादी कलेक्शन- धागा दर्पण: वूवन फ्रीडम’ ने खादी के महत्व और राष्ट्रीय पहचान को प्रभावशाली रूप से प्रदर्शित किया। ‘साड़ी कलेक्शन – सिक्स यार्ड्स ऑफ लिगेसी’ में विभिन्न क्षेत्रीय बुनाइयों और पारंपरिक शिल्प कौशल को समकालीन परिधान में दिखाया गया। इसके अलावा ‘हैंडलूम एग्जीक्यूटिव वियर – थ्रेड्स फॉर टुमॉरो’ और ‘फुलकारी कलेक्शन- थ्रेड्स ऑफ जॉय’ ने पेशेवर व पारंपरिक परिधानों में भारतीय हथकरघा की उपयोगिता और जीवंतता को प्रदर्शित किया।

संरचना एक्सपो में आगंतुकों को हैंडीक्राफ्ट्स, हैंडलूम वस्त्र, जूट उत्पाद, होम डेकोर और गिफ्ट आइटम्स की समृद्ध श्रृंखला देखने को मिली। देशभर से 100 से अधिक प्रतिभागियों, जिनमें बुनकर, सहकारी समितियाँ और उत्पादन इकाइयाँ शामिल थीं, ने इस मंच पर अपने उत्पाद प्रदर्शित किए। डॉ. एम. बीना ने बताया कि एक्सपो का उद्देश्य भारतीय हथकरघा उद्योग को प्रोत्साहित करना और कारीगरों को सशक्त बाज़ार उपलब्ध कराना है। नेशनल डिज़ाइन सेंटर के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शनी का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक तकनीकों और आधुनिक उपभोक्ताओं के बीच सेतु स्थापित करना है। इससे न केवल कारीगरों को रोजगार और पहचान मिल रही है, बल्कि शहरी दर्शक भी भारतीय हथकरघा की सांस्कृतिक विरासत और समृद्ध विविधता से जुड़े हैं। एक्सपो 18 जनवरी 2026 तक प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 8 बजे तक आमजन के लिए खुला रहेगा।

डॉ. बीना ने कहा कि संरचना एक्सपो भारतीय हथकरघा की समृद्ध विरासत को संरक्षित करने और वैश्विक मंच पर इसकी पहचान बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। यह कारीगरों को न केवल राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाता है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बनाता है। हम चाहते हैं कि हर बुनकर और शिल्पकार अपने हुनर के साथ देश और विश्व के सामने आए। नेशनल डिजाइन सेंटर, राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT), राष्ट्रीय जूट बोर्ड, नाबार्ड और सत्यम फैशन इंस्टिट्यूट के सहयोग से आयोजित इस एक्सपो ने भारतीय हथकरघा को नई पहचान देने के साथ-साथ युवा प्रतिभाओं और शिल्पकारों को अपनी कला प्रदर्शित करने का राष्ट्रीय मंच प्रदान किया।