-सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर जिला कारागार में चला विशेष जागरूकता अभियान
-16 दिव्यांग बंदियों को योजनाओं, पेंशन और उपकरणों की जानकारी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। डासना स्थित जिला कारागार में गुरुवार को दिव्यांग बंदियों के अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं को लेकर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। शासन एवं कारागार मुख्यालय के निर्देश तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में निरुद्ध दिव्यांग बंदियों को सरकारी योजनाओं से जोडऩा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का संचालन जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा तथा जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान के नेतृत्व में किया गया। अधिकारियों ने बंदियों को बताया कि सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है और जेल में निरुद्ध दिव्यांगजन भी इन सुविधाओं के समान रूप से पात्र हैं। जागरूकता कार्यक्रम के दौरान कारागार में निरुद्ध 16 दिव्यांग बंदियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी ने बताया कि दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, श्रवण यंत्र सहित अनेक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं। इसके अलावा दिव्यांग पेंशन योजना, दिव्यांग विवाह प्रोत्साहन अनुदान तथा यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) कार्ड की प्रक्रिया से भी बंदियों को अवगत कराया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इन योजनाओं का उद्देश्य दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना और उन्हें सामाजिक मुख्यधारा से जोडऩा है। कार्यक्रम के दौरान पात्र बंदियों को व्हीलचेयर एवं बैसाखियां भी वितरित की गईं, जिससे उनकी दैनिक गतिविधियों में सहूलियत मिल सके।
अधिकारियों ने कहा कि कारागार केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और पुनर्वास का केंद्र भी है। इसी सोच के तहत दिव्यांग बंदियों में जागरूकता बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में जेल प्रशासन और चिकित्सा विभाग के अधिकारियों की सक्रिय सहभागिता रही। इस अवसर पर जेलर केके दीक्षित, चिकित्सा अधिकारी डॉ. एमके तोमर, डिप्टी जेलर अरविंद कुमार, बीएन पांडेय तथा फार्मासिस्ट राजेश त्रिपाठी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
अधिकारियों ने बंदियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक दस्तावेज, आवेदन प्रक्रिया और विभागीय सहायता के बारे में भी जानकारी दी। प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम न केवल जागरूकता बढ़ाते हैं, बल्कि बंदियों में आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच का विकास भी करते हैं। जिला कारागार में आयोजित यह पहल सुधारात्मक न्याय व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिससे दिव्यांग बंदियों को भविष्य में सम्मानजनक पुनर्वास का अवसर मिल सके।
















