करुणेन्द्र सिंह: लखनऊ आबकारी की मजबूत ढाल, माफिया के लिए सख्त दीवार

-अनुभव, अनुशासन और ईमानदारी से गढ़ा गया प्रशासनिक मॉडल
-ग्रामीण अड्डों से वीआईपी जोन तक समान सख्ती
-नियम तोड़ने वालों के लिए कोई रियायत नहीं, चाहे अपना हो या पराया
-राजस्व भी बढ़ा, जनहानि पर भी लगा अंकुश—डबल टारगेट में सफलता
-टीमवर्क, टेक्निकल निगरानी और जीरो टॉलरेंस से बदली आबकारी की तस्वीर
-24 घंटे अलर्ट टीम, अवैध शराब निर्माण और तस्करी पर लगातार प्रभावी कार्रवाई

उदय भूमि संवाददाता
लखनऊ। आबकारी विभाग प्रदेश सरकार के उन महत्वपूर्ण विभागों में शामिल है, जहां से स्टांप ड्यूटी के बाद सर्वाधिक राजस्व प्राप्त होता है। लेकिन यह विभाग केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है। अवैध शराब के निर्माण, बिक्री और तस्करी पर रोक लगाकर जनहानि को रोकना भी इसकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। सीमित संसाधनों, बढ़ती चुनौतियों और संगठित शराब माफिया के नेटवर्क के बीच इस जिम्मेदारी को निभाना आसान नहीं होता। खासकर राजधानी लखनऊ जैसे संवेदनशील और वीआईपी मूवमेंट वाले जिले में, जहां जरा-सी चूक भी विभाग और शासन के लिए बड़ी मुसीबत बन सकती है। इन्हीं चुनौतियों के बीच जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह ने अपनी सख्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी कार्यशैली से न सिर्फ अवैध शराब के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया, बल्कि आबकारी विभाग को एक नई कार्यसंस्कृति भी दी है। करीब 9 माह से लखनऊ जिले की कमान संभाल रहे करुणेन्द्र सिंह की पहचान आज एक तेज तर्रार, ईमानदार और रणनीतिक अधिकारी के रूप में हो चुकी है। आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह का स्पष्ट मानना है कि विभाग का उद्देश्य केवल राजस्व बढ़ाना नहीं, बल्कि समाज को सुरक्षित रखना भी है।

अवैध शराब से होने वाली मौतें, मिलावटी शराब से बिगड़ती सेहत और अपराधों को बढ़ावा देने वाले नेटवर्क को तोडऩा उनकी प्राथमिकता में सबसे ऊपर है। यही कारण है कि उनके कार्यकाल में लखनऊ में अवैध शराब के कई बड़े रैकेट ध्वस्त किए गए हैं। करुणेन्द्र सिंह कहते हैं कि शराब माफिया सिर्फ अपने मुनाफे के लिए आमजन की जिंदगी से खिलवाड़ करते हैं। ऐसे में आबकारी विभाग को सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि निरंतर निगरानी और मजबूत खुफिया तंत्र भी तैयार करना होता है। हालांकि लखनऊ में जिला आबकारी अधिकारी के रूप में उन्हें अभी करीब 9 माह ही हुए हैं, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली में उल्लेखनीय बदलाव कर दिए हैं। हर दिन नई रणनीति, नए प्रयोग और निरंतर समीक्षा उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। लाइसेंसी दुकानों के विक्रेताओं और अनुज्ञापियों को भी उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया है कि नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। व्यक्तिगत जीवन में करुणेन्द्र सिंह बेहद सरल, सौम्य और व्यवहारकुशल अधिकारी माने जाते हैं। लेकिन जब बात काम की आती है, तो वे किसी भी तरह का समझौता नहीं करते। अवैध शराब के खिलाफ उनकी नीति और रणनीति शराब माफियाओं पर लगातार भारी पड़ रही है।

मजबूत नेटवर्किंग, सटीक रणनीति
सीमित संसाधनों के बावजूद लखनऊ आबकारी विभाग की सफलता के पीछे करुणेन्द्र सिंह की मजबूत नेटवर्किंग रणनीति अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने विभागीय टीम के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन, पुलिस और अन्य एजेंसियों के साथ समन्वय को प्राथमिकता दी। इसी का नतीजा है कि अवैध शराब निर्माण स्थलों पर समय रहते छापेमारी हो रही है और बाहरी राज्यों से आने वाली तस्करी पर भी लगाम कसी गई है। उनका मानना है कि बिना टीमवर्क कोई भी अधिकारी सफल नहीं हो सकता। इसलिए वे हर स्तर के अधिकारी और कर्मचारी को साथ लेकर चलने में विश्वास रखते हैं।

15 निरीक्षकों की सक्रिय टीम, हर क्षेत्र पर पैनी नजर
लखनऊ जिले में आबकारी विभाग की कमान संभाल रहे करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में 15 आबकारी निरीक्षकों की मजबूत टीम काम कर रही है। इस टीम में आबकारी निरीक्षक राहुल सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, विवेक सिंह, रिचा सिंह, अभिषेक सिंह, रजनीश प्रताप सिंह, अरविंद बघेल, कौशलेन्द्र रावत, प्रदीप शुक्ला, अखिलेश चौधरी, अखिल गुप्ता, मोनिका यादव, रामश्याम त्रिपाठी, शिखर मल्ल और विजय राठी शामिल हैं। यह टीम जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार गश्त, जांच और कार्रवाई कर अवैध शराब के नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हुई है। नतीजतन, शराब माफिया के लिए लखनऊ अब सुरक्षित ठिकाना नहीं रह गया है।

ईमानदारी और अनुशासन से बनी अलग पहचान
करीब 16 वर्ष आबकारी निरीक्षक और 14 वर्ष जिला आबकारी अधिकारी के रूप में कार्य कर चुके करुणेन्द्र सिंह की पहचान एक बेदाग और ईमानदार अधिकारी के रूप में रही है। वह नियमों को सर्वोपरि मानते हैं और नियम के विरुद्ध कार्य करने वालों के प्रति कोई नरमी नहीं बरतते। चाहे मामला विभागीय अधिकारी या कर्मचारी का ही क्यों न हो, उनके लिए नियम सबके लिए समान हैं। उनकी इसी सख्ती ने विभाग के भीतर भी अनुशासन और पारदर्शिता को मजबूत किया है।

1997 से शुरू हुआ सेवा सफर
करुणेन्द्र सिंह की पहली पोस्टिंग वर्ष 1997 में गाजियाबाद में आबकारी निरीक्षक के रूप में हुई थी। वहां उन्होंने फार्मेसी का चार्ज संभालने के साथ-साथ मोदीनगर सर्किल में भी अपनी सेवाएं दीं। इसके बाद गाजियाबाद, नोएडा और मेरठ जैसे संवेदनशील जिलों में रहते हुए उन्होंने अपनी कार्यशैली का लोहा मनवाया। वर्ष 2012 में सहायक आबकारी आयुक्त के रूप में उनकी पहली पोस्टिंग हापुड़ डिस्टलरी में हुई। इसके बाद वे जिला आबकारी अधिकारी के रूप में मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, वाराणसी, उन्नाव और सहारनपुर में तैनात रहे। हर जिले में उन्होंने अवैध शराब के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई कर एक मजबूत छवि बनाई।

राजस्व लक्ष्य की ओर मजबूती से कदम
वर्तमान वित्तीय वर्ष में लखनऊ जिले को आबकारी विभाग से करीब 3 हजार करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य मिला है। करुणेन्द्र सिंह के नेतृत्व में विभाग अब तक लगभग 2000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटा चुका है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिस रफ्तार से काम चल रहा है, उससे लक्ष्य हासिल करने की पूरी उम्मीद है।

सुरक्षित लखनऊ की दिशा में मजबूत कदम
अवैध शराब के नेटवर्क को तोडऩे के साथ-साथ करुणेन्द्र सिंह ने अपने स्तर पर ऐसा सिस्टम खड़ा किया है, जो लखनऊ को सुरक्षित वातावरण देने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। मजबूत निगरानी, सटीक कार्रवाई और टीमवर्क के जरिए उन्होंने यह साबित किया है कि सीमित संसाधनों में भी बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। जिला आबकारी अधिकारी करुणेन्द्र सिंह की कार्यशैली आज न सिर्फ विभाग के लिए, बल्कि प्रशासनिक तंत्र के लिए भी एक मिसाल बन चुकी है। लखनऊ में अवैध शराब के खिलाफ जारी यह अभियान आने वाले समय में और भी प्रभावी होने की उम्मीद है।

करुणेन्द्र सिंह, जिला आबकारी अधिकारी, लखनऊ

आबकारी विभाग की जिम्मेदारी केवल राजस्व संग्रह तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को अवैध और जहरीली शराब के दुष्प्रभाव से बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण दायित्व है। अवैध शराब का कारोबार सीधे तौर पर आमजन की जान से जुड़ा हुआ है और इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लखनऊ जैसे संवेदनशील और वीआईपी जनपद में आबकारी विभाग पूरी तरह सतर्क है और 24 घंटे निगरानी की जा रही है। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री और तस्करी में संलिप्त लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत सामने आने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। विभाग की सफलता का आधार टीमवर्क है। आबकारी निरीक्षकों, कर्मचारियों और अन्य संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के कारण ही प्रभावी कार्रवाई संभव हो पा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध कच्ची शराब के अड्डों को चिन्हित कर लगातार अभियान चलाया जा रहा है, वहीं बाहरी राज्यों से होने वाली शराब तस्करी पर भी विशेष नजर रखी जा रही है। उन्होंने लाइसेंसी दुकानों के अनुज्ञापियों और विक्रेताओं को चेतावनी देते हुए कहा कि सभी को शासन द्वारा तय नियमों के अनुसार ही कार्य करना होगा। ओवररेटिंग, अवैध बिक्री या किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियम सभी के लिए समान हैं।
विभाग को दिए गए राजस्व लक्ष्य को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ पूरा करना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने आमजन से भी अपील की कि यदि कहीं अवैध शराब का निर्माण या बिक्री हो रही हो, तो उसकी सूचना तुरंत आबकारी विभाग या प्रशासन को दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी।
करुणेन्द्र सिंह
जिला आबकारी अधिकारी