– गाजियाबाद के डीएम ने बगैर पंखे-लाइट के कार्यालय में किया काम, पूरे कलक्ट्रेट में एक घंटे गुल रही बिजली
– बिजली की हुई बर्बादी तो डीएम ने किया पश्चाताप, कलक्ट्रेट की कटवा दी बिजली
विजय मिश्र (उदय भूमि ब्यूरो)
गाजियाबाद। सेल्फ रेग्यूलेशन कैसे होता है इसकी मिसाल डीएम डॉ. अजय शंकर पांडे ने पेश की है। बिजली की बर्बादी होने पर डीएम ने ना सिर्फ प्रायश्चित किया बल्कि ऊर्जा संचयन को लेकर लोगों को एक संदेश भी दिया। गाजियाबाद के डीएम के इस प्रायश्चित की काफी चर्चा हुई और सभी ने उनकी इच्छाशक्ति और मंशा की सराहना की। दरअसल कलक्ट्रेट स्थित डीएम के कमरे में 15 मिनट तक बिजली की बर्बादी हुई। डीएम को लगा कि कई और अधिकारियों के यहां इस तरह बिजली की बर्बादी होती है। कलक्ट्रेट का निरीक्षण किया तो उनकी शंका सच साबित हुई। इस पर प्रायश्चित करते हुए डीएम ने एक घंटे तक बिना पंखे लाइट के अपने कार्यालय में काम किया। डीएम ने एक घंटे के लिए पूरे कलक्ट्रेट की बिजली कटवा दी और सभी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को ताकीद करते

हुए आगे से कमरे में किसी के नहीं होने पर एसी, पंखे और लाइट बंद रखने को कहा।
जिलाधिकारी डॉ. अजय शंकर पांडेय के इस अनोखी प्रायश्चित ने सभी को प्रभावित किया। अजय शंकर पांडे वक्त एवं नियम पाबंद अधिकारियों में गिने जाते हैं। आईएएस अधिकारी होने के बावजूद वह अपने कार्यालय में स्वयं झाड़ू लगाकर सफाई करते हैं। बृहस्पतिवार को डीएम ने अपने ऑफिस के पंखे-लाइट बंद कराकर फरियादियों की सुनवाई की। बिजली के अनावश्यक खर्च को रोकने के लिए डीएम ने यह कदम उठाया। डीएम ने न सिर्फ अपने कार्यालय में एक घंटे तक बिजली के बिना काम किया बल्कि पूरे इस अवधि तक कलेक्ट्रेट परिसर में अधिकारियों एवं कर्मचारियों के ऑफिस की बिजली भी कटवा दी। डीएम ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को हिदायत दी कि ऑफिस आने से पहले सफाई होने के बाद एक घंटे तक लाइट-पंखे आदि बंद रखे जाएं। इस समय वह बिजली की बचत को लेकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। विभागों को साफ-साफ कह रखा है कि कोई बिजली को वेबजह खर्च न करे। यह नियम उन्होंने अपने कार्यालय पर भी लागू कर रखा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी व्यक्ति अपने कार्यालय से जाएगा तो उसे हर हाल में बिजली के स्विच ऑफ करने होंगे।
दरअसल डीएम बृहस्पतिवार को जब अपने कार्यालय में पहुंचे तो उनके कार्यालय के सभी पंखे और एसी चल रहे थे। जिलाधिकारी ने वहां मौजूद आफिस अटेंडेंट से पूछा तो उन्होंने कहा कि 15 मिनट पहले ही पंखे और एसी चलाए हैंं। ऐसे में जिलाधिकारी ने कार्यालय का मुखिया होने के नाते सबसे पहले अपने कार्यालय के सभी पंखे बंद कराए और उसके बाद पूरे कलेक्ट्रेट परिसर की लाइट बंद करा दी। जिलाधिकारी ने पहले भी कलेक्ट्रेट परिसर में पानी की बर्बादी को लेकर खुद पर एक हजार रुपए का जुर्माना लगा चुके हैं। डीएम ने आज एडीएम व सिटी मजिस्ट्रेट तक को कक्षों की लाइट बंद कराकर काम कराया। कलेक्ट्रेट में निरीक्षण करते समय जिलाधिकारी अजय शंकर पांडेय को अधिकतर अधिकारी व कर्मचारी समय से कार्यालय में नहीं मिले। ऐसे में बिजली की बर्बादी पर उन्होंने नाराजगी जताई। औचक निरीक्षण से अधिकारियों व कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। सुबह 9:40 पर डीएम अपने कार्यालय पहुंचे। इसके बाद वह सीधे अधिकारियों व कर्मचारियों के कक्ष का निरीक्षण करने लगे। सीएम के निर्देशानुसार साढ़े नौ बजे अधिकारियों का अपने कार्यालय में उपस्थित होना अनिवार्य है, मगर डीएम के औचक निरीक्षण में अधिकतर अधिकारी अपने कार्यालय में सुबह 10 बजे तक भी नहीं पहुंच पाए। सभी को चेतावनी दी गई।
















